भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। आज देश में करोड़ों लोग ऐसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिनके जरिए उन्हें मुफ्त राशन, मुफ्त इलाज, गैस कनेक्शन, घर, बीमा, छात्रवृत्ति और आर्थिक सहायता मिल रही है। इन योजनाओं का मकसद सिर्फ राहत देना नहीं, बल्कि गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा देना भी है।
सरकार का दावा है कि इन योजनाओं ने करोड़ों परिवारों की जिंदगी बदली है। दूसरी ओर अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग यह सवाल उठाता है कि इतनी बड़ी संख्या में मुफ्त सुविधाएं देने से सरकारी वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है। बावजूद इसके, केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर प्राथमिकता दे रही हैं।
फ्री राशन योजना बनी देश की सबसे बड़ी स्कीम
अगर सबसे बड़े लाभार्थी आधार वाली योजना की बात करें, तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) सबसे ऊपर आती है। कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुई यह योजना अब करोड़ों परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी है।
इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को हर महीने मुफ्त गेहूं और चावल दिया जाता है। कई राज्यों में स्थानीय जरूरतों के हिसाब से अतिरिक्त खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का कहना है कि इससे गरीब परिवारों के मासिक खर्च में काफी कमी आई है और खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे देश में जहां बड़ी आबादी अब भी निम्न आय वर्ग में आती है, वहां खाद्य सुरक्षा योजनाएं सामाजिक स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
आयुष्मान भारत: गरीब परिवारों के लिए ‘हेल्थ सुरक्षा कवच’
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत योजना को दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी हेल्थ इंश्योरेंस योजनाओं में गिना जाता है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ हजारों निजी अस्पताल भी इस योजना से जुड़े हैं। हार्ट सर्जरी, कैंसर उपचार, किडनी ट्रांसप्लांट, न्यूरो सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भी इसमें शामिल है।
भारत में मेडिकल खर्च अक्सर गरीब परिवारों को कर्ज में धकेल देता था। आयुष्मान भारत ने इस समस्या को काफी हद तक कम किया है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में इस योजना का असर ज्यादा देखने को मिला है।
उज्ज्वला योजना: लकड़ी के चूल्हे से गैस तक का सफर
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली योजनाओं में शामिल मानी जाती है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त LPG गैस कनेक्शन दिए गए।
सरकार का तर्क था कि इससे महिलाओं को धुएं वाले चूल्हों से राहत मिलेगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम होंगी। लाखों ग्रामीण परिवारों में पहली बार गैस सिलेंडर पहुंचा।
हालांकि, बाद में गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर सवाल भी उठे। कई गरीब परिवारों के लिए रिफिल करवाना महंगा साबित हुआ। इसके बावजूद उज्ज्वला योजना को भारत के सबसे बड़े सामाजिक बदलाव कार्यक्रमों में गिना जाता है।
प्रधानमंत्री आवास योजना: कच्चे घर से पक्के मकान तक
देश में आवास संकट को कम करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) शुरू की गई। इसका लक्ष्य गरीब और निम्न आय वर्ग के लोगों को पक्का घर उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मॉडल बनाए गए हैं। कई लाभार्थियों को सीधे बैंक खातों में आर्थिक सहायता भेजी जाती है ताकि वे अपना घर बना सकें।
सरकार का दावा है कि इस योजना के तहत लाखों परिवारों को नए घर मिले हैं। ग्रामीण भारत में यह योजना सिर्फ आवास नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान का प्रतीक भी बन चुकी है।
पीएम किसान योजना: किसानों के खाते में सीधे पैसा
भारत की अर्थव्यवस्था में किसानों की बड़ी भूमिका है। छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की गई।
इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है।
सरकार का कहना है कि इससे किसानों को बीज, खाद और खेती से जुड़े छोटे खर्चों में मदद मिलती है। हालांकि कई राज्यों में पात्रता, भूमि रिकॉर्ड और लाभार्थियों की सूची को लेकर शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
बीमा योजनाएं: कम प्रीमियम में बड़ा सुरक्षा कवच
केंद्र सरकार ने कम आय वर्ग के लोगों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए कई बीमा योजनाएं भी शुरू की हैं।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इन योजनाओं में बेहद कम प्रीमियम पर जीवन और दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है।
भारत में लंबे समय तक बीमा को सिर्फ मध्यम और उच्च वर्ग की सुविधा माना जाता था। लेकिन इन योजनाओं ने पहली बार गरीब तबके को भी बीमा सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया।
छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और शिक्षा सहायता
शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार कई योजनाएं चला रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाती है।
इसके अलावा तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा और विदेश में पढ़ाई के लिए भी कई स्कॉलरशिप प्रोग्राम मौजूद हैं। सरकार का उद्देश्य आर्थिक कमजोरी के कारण पढ़ाई न छूटे, यह सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय में शिक्षा आधारित योजनाएं ही गरीबी कम करने का सबसे प्रभावी तरीका साबित हो सकती हैं।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश
महिलाओं के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें मातृत्व सहायता, पोषण योजनाएं, स्वयं सहायता समूहों को फंडिंग और छोटे बिजनेस लोन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
कई योजनाओं में महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजे जाते हैं। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।
बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए पेंशन
सामाजिक सुरक्षा के तहत केंद्र सरकार बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग नागरिकों के लिए पेंशन योजनाएं भी चला रही है।
इन योजनाओं के तहत हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। कई राज्यों में राज्य सरकारें भी अतिरिक्त राशि जोड़ती हैं।
हालांकि पेंशन राशि को लेकर अक्सर मांग उठती रहती है कि बढ़ती महंगाई के हिसाब से इसमें वृद्धि की जानी चाहिए।
स्वच्छ भारत मिशन ने बदली ग्रामीण तस्वीर
स्वच्छ भारत मिशन को सिर्फ सफाई अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव के रूप में भी देखा गया। इस योजना के तहत देशभर में करोड़ों शौचालय बनाए गए।
ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच की समस्या लंबे समय से बड़ी चुनौती थी। शौचालय निर्माण ने खासकर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक असर डाला।
क्या मुफ्त योजनाएं अर्थव्यवस्था पर बोझ बन रही हैं?
सरकारी योजनाओं को लेकर सबसे बड़ी बहस यही है कि क्या लगातार मुफ्त सुविधाएं देना देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बन सकता है?
आलोचकों का कहना है कि फ्री योजनाओं पर बढ़ता खर्च राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकता है। साथ ही इससे सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार निर्माण पर खर्च करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर समर्थकों का तर्क है कि भारत जैसे विकासशील देश में सामाजिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। अगर गरीब परिवारों को राशन, इलाज और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तो आर्थिक असमानता और बढ़ सकती है।
डिजिटल सिस्टम ने बदली सरकारी योजनाओं की तस्वीर
सरकार का दावा है कि आधार लिंकिंग, डिजिटल भुगतान और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ी है।
अब अधिकतर योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और फर्जी लाभार्थियों पर भी कुछ हद तक रोक लगी है।
डिजिटल इंडिया अभियान ने सरकारी योजनाओं के वितरण सिस्टम को काफी हद तक आधुनिक बनाया है।
आने वाले समय में और बढ़ सकता है योजनाओं का दायरा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारें कल्याणकारी योजनाओं का दायरा और बढ़ा सकती हैं। चुनावी राजनीति में भी इन योजनाओं की अहम भूमिका होती है।
आज फ्री राशन, मुफ्त इलाज, गैस कनेक्शन, पक्का घर और किसानों को आर्थिक सहायता जैसी योजनाएं करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। आने वाले समय में सरकार का फोकस सिर्फ मुफ्त सुविधाएं देने तक सीमित रहेगा या रोजगार और आय बढ़ाने पर ज्यादा जोर होगा, यह भारत की आर्थिक नीति का बड़ा सवाल बना रहेगा।
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