Highlights
- सरकार ने कहा- देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं
- कुछ औद्योगिक खरीदारों की जमाखोरी से बढ़ रही पेट्रोल पंपों पर भीड़
- IOC, BPCL और HPCL रोजाना करीब ₹550 करोड़ का नुकसान उठा रहीं
- भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर, क्षमता घरेलू जरूरत से अधिक
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। सरकार ने कहा है कि भारत के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार और रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है। पेट्रोल पंपों पर दिखाई दे रही भीड़ किसी वास्तविक कमी की वजह से नहीं, बल्कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा चैनलों के दुरुपयोग और जमाखोरी के कारण बढ़ी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri लगातार सरकारी तेल कंपनियों, राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के साथ स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। बुधवार को पेट्रोलियम सचिव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry और Confederation of Indian Industry के साथ उच्च स्तरीय बैठक भी की।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर भरोसा न करें और जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है और हालात पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता कितनी मजबूत?
भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर बन चुका है। देश में इस समय 22 परिचालन रिफाइनरियां हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रति वर्ष है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की कुल घरेलू पेट्रोलियम खपत 243.2 मिलियन टन रही, यानी देश की उत्पादन क्षमता घरेलू जरूरत से भी ज्यादा है।
यही वजह है कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। इसी वित्त वर्ष में भारत ने करीब 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया है। इससे साफ है कि देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर किसी तरह का संकट नहीं है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और विविध आयात स्रोत देश को वैश्विक संकट के समय भी अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में रखते हैं। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिसका असर सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है।
सरकार क्यों नहीं बढ़ा रही पेट्रोल-डीजल के दाम?
सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है। इसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum भारी नुकसान झेल रही हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ये कंपनियां पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर रोजाना करीब ₹550 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद खुदरा कीमतों को नियंत्रित रखने का उद्देश्य महंगाई को काबू में रखना है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से परिवहन, खाद्य पदार्थ, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा की चीजों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे तो आने वाले समय में सरकार के सामने कीमतों को लेकर कठिन फैसले लेने की स्थिति बन सकती है।
पेट्रोल पंपों पर भीड़ क्यों बढ़ रही है?
सरकार ने कहा है कि कई जगहों पर दिखाई दे रही लंबी कतारें वास्तविक कमी नहीं, बल्कि “आर्बिट्रेज” के कारण पैदा हुई स्थिति है। आर्बिट्रेज का मतलब कीमतों के अंतर का फायदा उठाना होता है।
सरकार की नीति के अनुसार सब्सिडी वाला सस्ता ईंधन केवल आम खुदरा उपभोक्ताओं के लिए है। जबकि औद्योगिक खरीदारों को अंतरराष्ट्रीय दरों के हिसाब से कमर्शियल चैनलों के जरिए ईंधन खरीदना पड़ता है। लेकिन कुछ औद्योगिक उपभोक्ता ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कमर्शियल सप्लाई छोड़कर सामान्य पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल-पेट्रोल खरीद रहे हैं।
इसी वजह से कुछ इलाकों में अचानक मांग बढ़ गई है, जिससे लोगों को अस्थायी कमी जैसा माहौल दिखाई दे रहा है। सरकार ने इसे अवैध गतिविधि बताया है।
थोक बिक्री में आई भारी गिरावट
सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक थोक बिक्री में करीब 29% की गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण यही है कि कई बल्क खरीदार अब खुदरा पंपों से ईंधन खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।
राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
स्थिति को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष निगरानी दल बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने कहा है कि जमाखोरी, कालाबाजारी और अवैध स्टॉकिंग करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य नियंत्रण आदेशों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्यों से कहा गया है कि वे पेट्रोल पंपों की नियमित निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि खुदरा उपभोक्ताओं के हिस्से का ईंधन अवैध रूप से औद्योगिक उपयोग में न जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का यह कदम जरूरी है क्योंकि अफवाहों और कृत्रिम मांग के कारण कई बार बाजार में अनावश्यक घबराहट फैल जाती है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सरकार ने साफ कर दिया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। इसलिए लोगों को घबराकर अतिरिक्त ईंधन खरीदने की जरूरत नहीं है।
हालांकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता है तो आने वाले समय में तेल बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। लेकिन मौजूदा समय में सरकार का फोकस सप्लाई बनाए रखने, जमाखोरी रोकने और आम जनता को महंगाई से बचाने पर है।
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