भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) का बाजार अब सिर्फ गाड़ियों की बिक्री तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंश्योरेंस सेक्टर में भी इसका जबरदस्त असर देखने को मिल रहा है। ऑनलाइन इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म Policybazaar की FY26 मोटर इंश्योरेंस ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार, देश में EV इंश्योरेंस पॉलिसियों में एक साल के भीतर रिकॉर्ड 670% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह भारत के मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में सबसे तेजी से बढ़ने वाली कैटेगरी बन चुकी है।
रिपोर्ट से यह भी साफ हुआ है कि अब वाहन बीमा का बाजार सिर्फ दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। टियर-2 और टियर-3 शहरों में लोगों की बढ़ती जागरूकता और इंटरनेट पहुंच ने मोटर इंश्योरेंस सेक्टर की तस्वीर बदल दी है।
छोटे शहरों से आई सबसे बड़ी ग्रोथ
कुछ साल पहले तक वाहन बीमा को लेकर जागरूकता मुख्य रूप से महानगरों में ही देखने को मिलती थी। लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। FY26 रिपोर्ट के अनुसार, गैर-महानगरीय भारत में कार इंश्योरेंस अपनाने की दर में 15% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मेट्रो शहरों में यह ग्रोथ केवल 8% रही।
देश के कुल कार इंश्योरेंस बाजार में अब टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी बढ़कर 77% तक पहुंच गई है। पिछले साल यह आंकड़ा 75% था। यह बदलाव दिखाता है कि छोटे शहरों में लोग अब केवल वाहन खरीदने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा और इंश्योरेंस को भी गंभीरता से लेने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
- इंटरनेट और डिजिटल पेमेंट्स की बढ़ती पहुंच
- ऑनलाइन पॉलिसी खरीदना और रिन्यू करना आसान होना
- क्लेम प्रोसेस का डिजिटल होना
- सड़क दुर्घटनाओं और वाहन सुरक्षा को लेकर बढ़ती जागरूकता
- नए वाहन खरीदने वालों में फाइनेंस आधारित खरीदारी बढ़ना
अब लोग केवल थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं, बल्कि कॉम्प्रिहेंसिव कवर, जीरो डेप्रिसिएशन और बैटरी प्रोटेक्शन जैसे एड-ऑन भी तेजी से ले रहे हैं।
EV इंश्योरेंस में 670% का रिकॉर्ड उछाल क्यों आया?
भारत में EV बिक्री पिछले दो वर्षों में तेजी से बढ़ी है। सरकार की FAME स्कीम, राज्यों की सब्सिडी और पेट्रोल-डीजल की ऊंची कीमतों ने लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ आकर्षित किया है। अब इसका सीधा असर इंश्योरेंस सेक्टर पर दिखाई दे रहा है।
FY25 की तुलना में FY26 में EV इंश्योरेंस पॉलिसियों में 670% की वृद्धि दर्ज होना इस बात का संकेत है कि EV अब केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं।
हालांकि अभी भी कुल मोटर इंश्योरेंस बाजार में EV की हिस्सेदारी केवल 1% है, लेकिन जिस रफ्तार से यह बढ़ रहा है, उससे आने वाले वर्षों में यह तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
EV इंश्योरेंस तेजी से बढ़ने के पीछे कुछ अहम कारण हैं:
1. महंगी बैटरी और रिपेयर कॉस्ट
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी बेहद महंगी होती है। छोटी दुर्घटना में भी रिपेयर बिल लाखों तक पहुंच सकता है। ऐसे में ग्राहक बेहतर इंश्योरेंस कवर लेना पसंद कर रहे हैं।
2. EV फाइनेंसिंग बढ़ना
कई बैंक और NBFC अब EV लोन तेजी से दे रहे हैं। फाइनेंस कंपनियां अक्सर कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस अनिवार्य करती हैं।
3. नई EV कंपनियों की एंट्री
भारतीय बाजार में लगातार नए EV मॉडल लॉन्च हो रहे हैं। इससे बीमा कंपनियों ने भी EV-फोकस्ड प्रोडक्ट्स लॉन्च करने शुरू कर दिए हैं।
4. सरकार का EV फोकस
केंद्र और राज्य सरकारें EV इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई नीतियां ला रही हैं। इससे ग्राहक विश्वास बढ़ा है।
महाराष्ट्र बना EV इंश्योरेंस का सबसे बड़ा हब
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र देश में EV इंश्योरेंस अपनाने वाला सबसे बड़ा राज्य बनकर उभरा है। मुंबई और पुणे इस ग्रोथ के मुख्य केंद्र रहे। देश की कुल बीमित EV कारों में अकेले महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 8% बताई गई है। इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं बड़े पैमाने पर EV चार्जिंग नेटवर्क, कॉर्पोरेट और स्टार्टअप इकोसिस्टम, ऊंची फ्यूल कॉस्ट, शहरी ग्राहकों की खरीद क्षमता, राज्य सरकार की EV पॉलिसी पुणे और मुंबई में EV टैक्सी, फ्लीट और प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
तेलंगाना ने कार इंश्योरेंस ग्रोथ में मारी बाजी
जहां EV इंश्योरेंस में महाराष्ट्र आगे रहा, वहीं कुल कार इंश्योरेंस ग्रोथ के मामले में तेलंगाना सबसे आगे निकला। राज्य में सालाना आधार पर 30% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई। हैदराबाद जैसे शहरों में आईटी सेक्टर, बढ़ती कार बिक्री और डिजिटल इंश्योरेंस अपनाने की वजह से यह तेजी देखने को मिली।
किस ईंधन वाली गाड़ियों का सबसे ज्यादा बीमा हो रहा?
भले ही EV इंश्योरेंस तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन भारत का मोटर इंश्योरेंस बाजार अभी भी पेट्रोल वाहनों के कब्जे में है।
कुल बीमित वाहनों में हिस्सेदारी
| ईंधन प्रकार | हिस्सेदारी |
|---|---|
| पेट्रोल वाहन | 68.3% |
| डीजल वाहन | 24.7% |
| CNG वाहन | 5.8% |
| EV | लगभग 1% |
यह आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल वाहन अभी भी बाजार की रीढ़ बने हुए हैं, लेकिन CNG और EV सेगमेंट लगातार तेजी पकड़ रहे हैं।
इंश्योरेंस सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 5 वर्षों में मोटर इंश्योरेंस इंडस्ट्री पूरी तरह बदल सकती है। अब बीमा कंपनियां केवल बेसिक कवर बेचने के बजाय ग्राहक की जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज्ड पॉलिसियां तैयार कर रही हैं।
EV के लिए अब अलग से ये फीचर्स दिए जा रहे हैं बैटरी प्रोटेक्शन कवर, रोडसाइड चार्जिंग सहायता, चार्जर डैमेज कवर, जीरो डेप्रिसिएशन, मोटर प्रोटेक्ट एड-ऑन इससे बीमा बाजार का औसत प्रीमियम भी बढ़ रहा है।
आगे क्या?
भारत में EV बिक्री और डिजिटल इंश्योरेंस दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में मोटर इंश्योरेंस सेक्टर में अगले कुछ वर्षों में और बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है। खासतौर पर छोटे शहर इस ग्रोथ के नए इंजन बनकर उभर रहे हैं। अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और सरकार EV सेक्टर को सपोर्ट करती रही, तो आने वाले समय में EV इंश्योरेंस भारत के सबसे बड़े फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में से एक बन सकता है।
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