बच्चे को सिर्फ अपनी बात कहना नहीं, दूसरों की बात ध्यान से सुनना भी सिखाएं। लिसनिंग स्किल बेहतर होने से उसकी कंसंट्रेशन, कम्युनिकेशन और सोशल बिहेवियर में सुधार आ सकता है।
बच्चों का अपनी बात खुलकर रखना अच्छी बात है, लेकिन कई बार यही आदत जिद या बहस का रूप ले लेती है। बच्चा माता-पिता की बात पूरी सुने बिना जवाब देने लगता है, हर बात पर अपनी बात मनवाने की कोशिश करता है या किसी के समझाने पर तुरंत नाराज हो जाता है। ऐसी स्थिति में बार-बार डांटने या गुस्सा करने के बजाय उसकी Listening Skills यानी ध्यान से सुनने की आदत पर काम करना ज्यादा असरदार हो सकता है।
अच्छी पेरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्चे को बोलना, अपनी बात रखना और आत्मविश्वास से जवाब देना सिखाना नहीं है। उसे यह समझना भी जरूरी है कि बातचीत में सामने वाले की बात सुनना, अपनी बारी का इंतजार करना और दूसरे के विचारों को समझना उतना ही महत्वपूर्ण है।
माता-पिता कुछ आसान तरीकों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करके बच्चे की इस आदत को धीरे-धीरे बेहतर कर सकते हैं।

1. पहले बच्चे की बात पूरी सुनें
अगर बच्चा अपनी बात बताना चाहता है तो उसे बीच में रोकने के बजाय पहले उसकी बात पूरी सुनें। जब माता-पिता खुद बच्चे को ध्यान से सुनते हैं, तो बच्चा भी धीरे-धीरे यही व्यवहार सीखता है।
यदि बच्चा किसी बात पर जिद कर रहा है तो तुरंत यह कहने के बजाय कि “तुम हमेशा जिद करते हो”, उससे पूछें कि वह ऐसा क्यों चाहता है। उसकी बात समझने के बाद अपनी बात शांत तरीके से समझाएं।
इससे बच्चे को महसूस होता है कि उसकी भावनाओं और बात को महत्व दिया जा रहा है। ऐसे माहौल में उसके लिए माता-पिता की बात सुनना भी आसान हो सकता है।
2. बातचीत के दौरान बीच में बोलने की आदत कम करें
कई बच्चे सामने वाला बोल रहा होता है और उसी समय अपनी बात शुरू कर देते हैं। उन्हें डांटने के बजाय बातचीत के दौरान छोटी-सी प्रैक्टिस कराई जा सकती है।
बच्चे को बताएं कि पहले सामने वाला अपनी बात पूरी करेगा और उसके बाद उसकी बारी आएगी। घर में खाने की टेबल या परिवार के साथ बातचीत के दौरान इसे गेम की तरह भी अपनाया जा सकता है।
धीरे-धीरे बच्चा अपनी बारी का इंतजार करना, दूसरों की बात पूरी सुनना और उसके बाद जवाब देना सीख सकता है। इससे उसके व्यवहार में धैर्य और सेल्फ-कंट्रोल भी विकसित हो सकता है।
3. कहानी और सवाल-जवाब वाली एक्टिविटी करें
बच्चे की Listening Skills बेहतर करने के लिए रोज थोड़े समय की कहानी सुनाने की एक्टिविटी काफी उपयोगी हो सकती है। कहानी खत्म होने के बाद उससे छोटे-छोटे सवाल पूछें।
मसलन, कहानी में मुख्य किरदार कौन था? उसने क्या किया? उसे किस परेशानी का सामना करना पड़ा? इसके बाद क्या हुआ?
इस तरह बच्चे को कहानी ध्यान से सुननी पड़ेगी ताकि वह सवालों का जवाब दे सके। यह एक्टिविटी उसकी कंसंट्रेशन और सुनकर जानकारी समझने की क्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकती है।
4. जिद पर गुस्सा करने के बजाय विकल्प दें
जब बच्चा किसी बात को लेकर जिद करे, तो हर बार सीधे मना करने या आवाज ऊंची करने के बजाय उसे सीमित विकल्प देना मददगार हो सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर बच्चा तुरंत खेलने जाना चाहता है लेकिन पढ़ाई का समय है, तो आप कह सकते हैं कि पहले 20 मिनट पढ़ाई कर लो, फिर खेलने जा सकते हो। इससे बच्चे को पूरी तरह से अपनी इच्छा दबाए जाने जैसा महसूस नहीं होगा।
साथ ही, जब वह आपकी बात सुनकर सहयोग करे तो उसकी तारीफ जरूर करें। सकारात्मक व्यवहार को पहचानने से बच्चे को समझ आता है कि शांत तरीके से बात सुनना और सहयोग करना अच्छी आदत है।
Listening Skills से बच्चे को क्या फायदे मिल सकते हैं?
ध्यान से सुनना केवल बातचीत की आदत नहीं है। इसका असर बच्चे के रोजमर्रा के व्यवहार और सीखने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।
बेहतर कंसंट्रेशन
जब बच्चा किसी की बात ध्यान से सुनता है, तो उसे कुछ समय तक अपना ध्यान एक ही जगह बनाए रखना पड़ता है। नियमित अभ्यास से उसकी एकाग्रता बेहतर हो सकती है। यही क्षमता पढ़ाई के दौरान शिक्षक की बात समझने और किसी काम को पूरा करने में भी मदद करती है।
कम्युनिकेशन स्किल में सुधार
अच्छा कम्युनिकेटर वही नहीं है जो अच्छी तरह बोलता है, बल्कि वह भी है जो सामने वाले की बात समझकर जवाब देता है। सुनने की आदत बच्चे को यह समझने में मदद करती है कि कब बोलना है और कब दूसरे व्यक्ति को अपनी बात पूरी करने देनी है।
इससे दोस्तों, भाई-बहनों और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत बेहतर हो सकती है।
दूसरों की भावनाएं समझने में मदद
ध्यान से सुनने पर बच्चा केवल शब्दों को नहीं समझता, बल्कि आवाज के उतार-चढ़ाव और बातचीत के अंदाज से सामने वाले की भावनाओं को भी पहचानना सीख सकता है।
समय के साथ इससे उसमें Empathy यानी दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
पढ़ाई में भी हो सकता है फायदा
क्लास में बच्चों को लगातार नई जानकारी और अलग-अलग निर्देश दिए जाते हैं। अगर बच्चा ध्यान से सुनने का आदी है, तो उसके लिए सवाल समझना और शिक्षक के निर्देशों का पालन करना आसान हो सकता है।
सवाल पूरा सुनना, जरूरी जानकारी याद रखना और निर्देश के मुताबिक काम करना उसकी सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है।
धैर्य और सेल्फ-कंट्रोल विकसित करने में मदद
किसी की बात पूरी होने तक इंतजार करना बच्चे के लिए शुरुआत में मुश्किल हो सकता है। लेकिन नियमित अभ्यास से वह तुरंत जवाब देने या बीच में बोलने के बजाय अपनी बारी का इंतजार करना सीख सकता है।
इससे धीरे-धीरे उसमें धैर्य और खुद पर नियंत्रण रखने की आदत विकसित हो सकती है।
बच्चे को समझाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
अगर बच्चा जिद करता है या आपकी बात नहीं सुनता, तो हर बार गुस्सा करना जरूरी नहीं है। पहले यह समझने की कोशिश करें कि वह आपकी बात क्यों नहीं मान रहा है। कई बार बच्चा थका हुआ, परेशान, किसी बात को लेकर उत्साहित या अपनी इच्छा पूरी न होने से निराश हो सकता है।
ऐसे समय में शांत आवाज में बात करना, उसकी बात सुनना और फिर अपनी अपेक्षा स्पष्ट करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता खुद भी बच्चे के लिए उदाहरण बनें। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा दूसरों की बात ध्यान से सुने, तो उसकी बात भी बिना टोके सुनें। बच्चों में आदतें केवल समझाने से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार को देखकर भी विकसित होती हैं।
इसलिए बच्चे की जिद को केवल डांटने की समस्या मानने के बजाय सुनने, समझने और शांत तरीके से संवाद करने की आदत पर काम करें। छोटे-छोटे बदलाव समय के साथ उसके व्यवहार और कम्युनिकेशन स्किल में सकारात्मक फर्क ला सकते हैं।


