नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के बीच ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली की मांग लगातार तेज हो रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लेकर बड़ा आंकड़ा पेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि 19 जुलाई 2026 तक 1,18,195 केंद्रीय कर्मचारी और पात्र रिटायर कर्मचारी UPS का विकल्प चुन चुके हैं। हालांकि सरकार के इस दावे के बाद कर्मचारी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए UPS की समीक्षा और इसमें बदलाव की मांग दोहराई है।
सरकार का कहना है कि UPS का उद्देश्य राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जुड़े कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक सुनिश्चित पेंशन का विकल्प देना है। वहीं कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह योजना अभी भी पूरी तरह सुनिश्चित पेंशन की गारंटी नहीं देती और इसमें कई व्यावहारिक समस्याएं हैं।
संसद में वित्त मंत्री ने क्या बताया?
लोकसभा के एक प्रश्न के जवाब में आज माननीय वित्त मंत्री @nsitharaman जी का #UPS के मुद्दे पर दिया गया जवाब बेहद निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है जिसमें उन्होंने बताया है कि #UPS को फिलहाल रिप्लेस करने या उसमें कोई बदलाव करने का सरकार का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह भी… pic.twitter.com/x2FgZHvvmo
— Dr Manjeet Singh Patel (@ManjeetIMOPS) August 3, 2026 लोकसभा में लिखित जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 19 जुलाई 2026 तक UPS के कुल 1,18,195 सब्सक्राइबर हो चुके हैं। इनमें तीन श्रेणियों के लोग शामिल हैं—
- नए भर्ती केंद्रीय कर्मचारी
- पहले से NPS के तहत कार्यरत कर्मचारी जिन्होंने UPS चुना
- पात्र रिटायर कर्मचारी जिन्होंने UPS का विकल्प अपनाया
सरकार का कहना है कि यह संख्या दिखाती है कि काफी कर्मचारी इस नई पेंशन व्यवस्था को स्वीकार कर रहे हैं।
OPS की मांग के बीच क्यों बढ़ा UPS पर विवाद?
8वें वेतन आयोग की चर्चा के साथ ही कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली बनी हुई है। उनका कहना है कि OPS में कर्मचारियों को बिना बाजार जोखिम के निश्चित पेंशन मिलती थी, जबकि NPS और UPS दोनों ही योगदान आधारित व्यवस्था हैं।
ऐसे में सरकार द्वारा UPS अपनाने वाले कर्मचारियों का आंकड़ा सामने आने के बाद बहस और तेज हो गई है कि क्या UPS वास्तव में OPS का विकल्प बन सकती है।
कर्मचारी संगठन क्यों नाराज हैं?
ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने वित्त मंत्री के जवाब पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल UPS में बदलाव या समीक्षा का कोई प्रस्ताव नहीं है। उनके मुताबिक इससे लाखों कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका लगा है।
उन्होंने कहा कि योजना लागू होने के बाद सरकार ने अभी तक इसका कोई औपचारिक रिव्यू भी नहीं किया है, जबकि कई कर्मचारी इससे जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं।
“UPS सुनिश्चित पेंशन योजना नहीं” – कर्मचारी संगठन
फेडरेशन का दावा है कि UPS को कर्मचारियों ने व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि यह पूरी तरह सुनिश्चित पेंशन योजना नहीं बल्कि एक पे-आउट आधारित व्यवस्था है, जिसमें कर्मचारी पूरे सेवा काल के दौरान योगदान देते हैं।
संगठन के अनुसार यही कारण है कि देशभर में कई कर्मचारी संगठन अभी भी OPS की बहाली की मांग कर रहे हैं।
दिल्ली में लागू होने को लेकर भी उठे सवाल
मंजीत सिंह पटेल ने यह भी दावा किया कि दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश में UPS को मंजूरी मिलने के बावजूद इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।
उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को न तो NPS के तहत लाभ स्पष्ट रूप से मिल रहा है और न ही UPS के तहत पूरी व्यवस्था स्पष्ट हो पाई है। उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसी स्थिति में कर्मचारी अपनी समस्याओं का समाधान किससे मांगें।
UPS क्यों लाई गई थी?
केंद्र सरकार ने 24 जनवरी 2025 को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को अधिसूचित किया था और 1 अप्रैल 2025 से इसे लागू किया गया।
यह योजना राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत एक वैकल्पिक व्यवस्था है। सरकार का उद्देश्य NPS से जुड़े कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक सुनिश्चित मासिक पेंशन उपलब्ध कराना है, जबकि योगदान आधारित ढांचा भी बरकरार रहे।
सरकार के अनुसार लंबे समय से कर्मचारी निश्चित पेंशन की मांग कर रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए UPS तैयार की गई।
किन कर्मचारियों को UPS का विकल्प मिला?
सरकार ने UPS का विकल्प केवल नए कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखा।
इसका लाभ इन लोगों को भी दिया गया है—
- NPS के तहत कार्यरत केंद्रीय कर्मचारी
- 31 मार्च 2025 तक NPS के अंतर्गत रिटायर हो चुके पात्र कर्मचारी
- जिन्होंने कम से कम 10 वर्ष की नियमित सरकारी सेवा पूरी की हो
- पात्र दिवंगत कर्मचारियों के कानूनी जीवनसाथी
UPS के प्रमुख फायदे
UPS चुनने वाले कर्मचारियों को सरकार ने कई अतिरिक्त सुविधाएं देने की घोषणा की है।
- रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का लाभ
- सेवा के दौरान मृत्यु, दिव्यांगता या मेडिकल आधार पर सेवा समाप्त होने पर CCS Pension Rules, 2021 तथा CCS Extraordinary Pension Rules, 2023 के तहत उपलब्ध लाभ लेने का विकल्प
- NPS की तरह टैक्स लाभ
- निर्धारित प्रावधानों के तहत वन-टाइम स्विच से NPS में वापस जाने का विकल्प
क्या UPS में आगे बदलाव होगा?
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि फिलहाल UPS की समीक्षा नहीं की गई है क्योंकि योजना को लागू हुए अभी अपेक्षाकृत कम समय हुआ है। सरकार का कहना है कि इसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए अभी पर्याप्त समय नहीं बीता है।
साथ ही सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल UPS में किसी बदलाव या इसे किसी अन्य पेंशन योजना से बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
8वें वेतन आयोग के बीच क्या है इसका मतलब?
8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया के बीच UPS को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के अलग-अलग रुख साफ दिखाई दे रहे हैं। एक ओर सरकार UPS को NPS कर्मचारियों के लिए बेहतर विकल्प बता रही है और इसके बढ़ते सब्सक्राइबरों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठन अभी भी OPS की बहाली और UPS की समीक्षा की मांग पर कायम हैं।
आने वाले महीनों में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और पेंशन सुधारों पर होने वाली चर्चाओं के दौरान UPS और OPS का मुद्दा केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में बना रह सकता है।


