MSME Loan Scheme: केंद्र सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को आसान और सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि सरकार ने ECLGS 5.0, SIDBI की नई योजनाओं और जनजातीय उद्यमियों के लिए विशेष फंडिंग स्कीम के जरिए MSME सेक्टर तक लोन की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य छोटे कारोबारियों, नए उद्यमियों और स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देकर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
Highlights
- ECLGS 5.0 के तहत MSME को ₹2.55 लाख करोड़ अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो का लक्ष्य।
- पात्र MSME को वर्किंग कैपिटल का 20% तक अतिरिक्त लोन मिलेगा।
- अतिरिक्त कर्ज पर 100% सरकारी गारंटी उपलब्ध होगी।
- SIDBI का कुल इनडायरेक्ट लोन पोर्टफोलियो ₹5.24 लाख करोड़ तक पहुंचा।
- GST Sahay App और TReDS के जरिए डिजिटल लोन प्रक्रिया को बढ़ावा।
- जनजातीय उद्यमियों के लिए ₹10 लाख से ₹5 करोड़ तक वित्तीय सहायता।
संसद में MSME लोन पर वित्त मंत्री का जवाब
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार MSME सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि मई 2026 में Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) 5.0 शुरू की गई, जिसका उद्देश्य MSME समेत विभिन्न क्षेत्रों में ₹2.55 लाख करोड़ के अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो को सुनिश्चित करना है।
सरकार का मानना है कि आसान वित्तीय सहायता मिलने से छोटे उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की आर्थिक वृद्धि को मजबूती मिलेगी।
ECLGS 5.0 के तहत मिलेगा अतिरिक्त लोन
वित्त मंत्री के अनुसार, ECLGS 5.0 के तहत पात्र MSME इकाइयों को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के पीक फंड-बेस्ड वर्किंग कैपिटल बकाया का 20% तक अतिरिक्त ऋण दिया जाएगा।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस अतिरिक्त लोन पर सदस्य ऋण देने वाली संस्थाओं (MLIs) को 100% सरकारी गारंटी मिलेगी। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों का जोखिम कम होगा और वे अधिक MSME इकाइयों को आसानी से कर्ज दे सकेंगे।
SIDBI ने बढ़ाया MSME सेक्टर में क्रेडिट फ्लो
सरकार ने संसद में बताया कि भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) MSME क्षेत्र को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
31 मार्च 2026 तक SIDBI का कुल इनडायरेक्ट लोन पोर्टफोलियो ₹5.24 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। यह फंड बैंकों, NBFC, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को पुनर्वित्त (Refinance) और ऑन-लेंडिंग के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है, जिससे छोटे कारोबारियों तक लोन आसानी से पहुंचता है।
नए उद्यमियों को भी मिलेगा सस्ता कर्ज
SIDBI देशभर में अपनी 167 शाखाओं के माध्यम से MSME को प्रत्यक्ष ऋण भी उपलब्ध करा रहा है।
इसके अलावा बैंक ने:
- NBFC के साथ Co-Lending Model शुरू किया है।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के साथ साझेदारी बढ़ाई है।
- GST Sahay App के जरिए डिजिटल लोन सुविधा उपलब्ध कराई है।
- TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से MSME के बिलों का जल्दी भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया है।
इन पहलों का उद्देश्य नए और छोटे उद्यमियों को कम ब्याज दर पर आसान वित्त उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण उद्यमों के लिए भी विशेष कार्यक्रम
सरकार ने बताया कि SIDBI ग्रामीण गैर-कृषि उद्यमों को मजबूत बनाने के लिए Modernization of Rural Enterprises (MoRE) कार्यक्रम चला रहा है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे उद्योगों की उत्पादकता, प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा SIDBI Cluster Development Fund (SCDF) के जरिए राज्यों को कम लागत पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि MSME क्लस्टरों में सड़क, बिजली, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास किया जा सके।
जनजातीय उद्यमियों के लिए खास योजनाएं
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार अनुसूचित जनजाति समुदाय के उद्यमियों को भी विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (NSTFDC) रियायती दरों पर कई वित्तीय योजनाएं चला रहा है।
इसके अलावा Venture Capital Fund for Scheduled Tribes (VCF-ST) के तहत:
- ₹10 लाख से ₹5 करोड़ तक की वित्तीय सहायता।
- 3.75% से 4% वार्षिक ब्याज दर।
- टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स के लिए ₹30 लाख तक इन्क्यूबेशन सहायता।
- नए जनजातीय उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और विस्तार करने में सहयोग।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल लोन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि MSME क्षेत्र की वित्तीय पहुंच बढ़ाना, डिजिटल लेंडिंग को मजबूत करना, ग्रामीण उद्योगों का आधुनिकीकरण करना और नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराना है।
यदि इन योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन होता है, तो इससे MSME सेक्टर की विकास दर तेज हो सकती है, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


