Noida-Ganga Expressway Link: नोएडा और ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी देने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रस्तावित योजना के तहत करीब 15 किलोमीटर लंबी नई कनेक्टिविटी विकसित करने और 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाने का प्लान है। योजना लागू होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में करीब 30 से 45 मिनट तक का समय बच सकता है।
जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद इस पूरे क्षेत्र में यातायात का दबाव बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान-2041 में संशोधन की तैयारी की जा रही है।
लखनऊ में हुआ प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन
इस प्रस्ताव को लेकर सोमवार, 7 सितंबर को लखनऊ स्थित पिकअप भवन में प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने की। बैठक में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार समेत ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
प्रेजेंटेशन के बाद अब प्रस्तावित कनेक्टिविटी के तकनीकी, नियोजन और अन्य पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। मास्टर प्लान में जरूरी संशोधन और प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
करीब 15 किलोमीटर लंबी होगी नई कनेक्टिविटी
प्रस्ताव के अनुसार नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 15 किलोमीटर लंबी कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इसके लिए दादरी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले मार्ग को बेहतर बनाने की योजना है।
इस संपर्क मार्ग की चौड़ाई करीब 105 मीटर रखने का प्रस्ताव है। चौड़ी सड़क बनने से भविष्य में बढ़ने वाले वाहनों के दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है।
नई कनेक्टिविटी तैयार होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक जाने वाले लोगों को मौजूदा रास्तों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक पहुंच अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
30 से 45 मिनट तक बच सकता है सफर
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यात्रा के समय में कमी के तौर पर देखा जा रहा है। प्रस्ताव लागू होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने में करीब 30 से 45 मिनट तक की बचत होने का अनुमान है।
इसका फायदा उन यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों को भी मिल सकता है, जिन्हें गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों की ओर जाना होता है।
बेहतर संपर्क मार्ग मिलने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से एक्सप्रेसवे नेटवर्क तक पहुंच आसान हो सकती है।
जेवर एयरपोर्ट के बाद बढ़ेगा ट्रैफिक
जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान की एक अहम वजह माना जा रहा है। एयरपोर्ट के संचालन के बाद यात्रियों, निजी वाहनों, टैक्सियों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है।
इसके अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगातार हो रहे औद्योगिक और शहरी विस्तार के कारण भी आने वाले वर्षों में ट्रैफिक बढ़ सकता है। ऐसे में केवल मौजूदा सड़कों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
नई और चौड़ी कनेक्टिविटी तैयार होने से एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख एक्सप्रेसवे के बीच यातायात को बेहतर तरीके से वितरित किया जा सकेगा।
मास्टर प्लान-2041 में किया जाएगा संशोधन
इस परियोजना को ग्रेटर नोएडा के भविष्य के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके लिए ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान-2041 में आवश्यक बदलाव किए जाने की तैयारी है।
मास्टर प्लान में संशोधन के जरिए प्रस्तावित सड़क और कनेक्टिविटी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप जगह दी जा सकती है। इससे ग्रेटर नोएडा के मौजूदा क्षेत्रों के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाले इलाकों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिलेगी।
उद्योग और माल परिवहन को भी फायदा
नोएडा और ग्रेटर नोएडा तेजी से बड़े औद्योगिक और कारोबारी केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि औद्योगिक वाहनों और माल परिवहन के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
कम दूरी और बेहतर सड़क संपर्क से माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम हो सकता है। इससे क्षेत्र के कारोबारियों और औद्योगिक इकाइयों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा का एक्सप्रेसवे नेटवर्क होगा मजबूत
अगर प्रस्तावित योजना मंजूरी के बाद जमीन पर लागू होती है, तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा का एक्सप्रेसवे नेटवर्क और मजबूत हो सकता है। 105 मीटर चौड़ी सड़क और करीब 15 किलोमीटर की नई कनेक्टिविटी क्षेत्र को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती है।
खास तौर पर जेवर एयरपोर्ट के संचालन के बाद बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए यह कनेक्टिविटी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, फिलहाल यह योजना प्रस्ताव और नियोजन के चरण में है। अंतिम मंजूरी और निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविक समयसीमा और अन्य विवरण स्पष्ट होंगे।


