Nepal Flood Update: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर विदेश मंत्रालय ने बड़ा अपडेट दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 28 अगस्त को बताया कि नेपाल-चीन सीमा के चीनी हिस्से में 400 से अधिक भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं। वहीं, करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है और उनकी तलाश जारी है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय मूल के करीब 100 अन्य लोग भी संपर्क से बाहर हैं। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास दूसरे देशों की नागरिकता है। इस बीच नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, आपदा में अब तक 547 लोगों की मौत हो चुकी है।
चीन की तरफ फंसे 400 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि चीन की तरफ नेपाल-चीन सीमा के पास फंसे 400 से अधिक भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। इनमें से कई लोग अपने परिवारों के संपर्क में हैं।
उन्होंने कहा कि बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय चीनी अधिकारियों के संपर्क में है। भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
जायसवाल के मुताबिक, चीन की तरफ फंसे भारतीयों में से 96 नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। इसके अलावा नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे।
320 भारतीयों से नहीं हो पा रहा संपर्क
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस समय करीब 320 भारतीय नागरिक ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है या जो लापता बताए जा रहे हैं। सरकार इन लोगों की स्थिति का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
जायसवाल ने बताया कि करीब 100 भारतीय मूल के ऐसे लोग भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। माना जा रहा है कि इनमें कुछ लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं। हालांकि, ये लोग भारतीय नागरिक नहीं बल्कि दूसरे देशों के नागरिक हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय मिशन लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रहे हैं।
जयशंकर ने की उच्चस्तरीय बैठक
नेपाल में बिगड़े हालात को देखते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान की समीक्षा की गई।
बैठक में काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारत के राजदूत वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए। इस दौरान खासतौर पर लापता भारतीय नागरिकों की स्थिति और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयासों पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों में मौजूद भारतीय दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर ताजा जानकारी साझा की है।
नेपाल में बाढ़ से 547 लोगों की मौत
नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है। कई इलाकों में अभी भी राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन को आशंका है कि कुछ क्षेत्रों में हालात दोबारा बिगड़ सकते हैं।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने भोटेकोशी नदी क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
एजेंसी के मुताबिक, बुधवार को जिस इलाके में अचानक बाढ़ आई थी, वहां अब कीचड़युक्त पानी का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में क्षेत्र में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
इन जिलों में मिले सबसे ज्यादा शव
नेपाल पुलिस के मुताबिक, देश के आठ जिलों से अब तक 547 शव बरामद किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा शव चितवन और नवलपरासी पूर्व से मिले हैं।
- नवलपरासी पूर्व: 134 शव
- चितवन: 221 शव
- गोरखा: 44 शव
- नुवाकोट: 38 शव
- धादिंग: 40 शव
- तनाहू: 29 शव
- नवलपरासी पश्चिम: 28 शव
- रसुवा: 13 शव
चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भी पांच लोगों की मौत हुई है।
करीब 977 लोग अब भी लापता
नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 977 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें सुरक्षाकर्मी, विदेशी पर्यटक और नेपाली यात्री भी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, लापता लोगों में:
- 86 सुरक्षाकर्मी
- 517 विदेशी पर्यटक
- 127 नेपाली यात्री
शामिल हैं।
अब तक प्रभावित क्षेत्रों से 1,545 घायल और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें 84 लोगों का इलाज काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।
85 भारतीय विदेशी पर्यटकों में शामिल
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया कि बाढ़ प्रभावित अलग-अलग क्षेत्रों से कम से कम 121 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें 85 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
इसके अलावा बचाए गए पर्यटकों में दक्षिण कोरिया के 9 और चीन के 16 नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल पुलिस के अनुसार, आपदा के तीसरे दिन भी बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में कुल 7,451 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।
बांध टूटने की सूचना के बाद फिर अलर्ट
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच तिब्बत की तरफ एक बांध के दोबारा टूटने की सूचना के बाद भी अलर्ट जारी किया गया है। इसके चलते भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
NDRRMA ने बचाव अभियान में शामिल सुरक्षाकर्मियों और इन नदी क्षेत्रों में मौजूद लोगों से अपील की है कि वे किसी भी खतरे के संकेत को नजरअंदाज न करें। जलस्तर बढ़ने या बाढ़ का खतरा महसूस होने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की सलाह दी गई है।
भारत की प्राथमिकता लापता नागरिकों को सुरक्षित निकालना
नेपाल की इस भीषण त्रासदी के बीच भारत सरकार का मुख्य फोकस प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने पर है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय मिशन स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
एक तरफ चीन की सीमा में फंसे 400 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित बताए गए हैं, वहीं 320 भारतीयों से संपर्क नहीं होने के कारण उनकी तलाश सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में बनी हुई है। भारत सरकार ने नेपाल को राहत और बचाव अभियान में हरसंभव सहायता देने की बात भी कही है।


