Javelin Anti-Tank Missile: भारत अपनी सैन्य और रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बढ़ा रहा है। अमेरिका से अत्याधुनिक Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना है। प्रस्तावित सौदे से भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता मजबूत होने के साथ भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग और भविष्य में संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। इसी कड़ी में भारत अमेरिकी Javelin एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। यह हथियार खास तौर पर बख्तरबंद वाहनों और टैंकों जैसे लक्ष्यों से निपटने के लिए बनाया गया है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोरे के मुताबिक, प्रस्तावित खरीद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके साथ ही भविष्य में इस सिस्टम के को-प्रोडक्शन यानी संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं भी बन सकती हैं।
करीब 4.57 करोड़ डॉलर का प्रस्तावित रक्षा सौदा
सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने नवंबर 2025 में विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत भारत को Javelin सिस्टम और उससे जुड़े उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी थी।
प्रस्तावित पैकेज की अनुमानित कीमत करीब 4.57 करोड़ डॉलर बताई गई है। इस पैकेज में लगभग 100 FGM-148 Javelin मिसाइल राउंड, एक फ्लाई-टू-बाय मिसाइल और 25 Javelin Lightweight Command Launch Units (CLU) या Block 1 Command Launch Units शामिल हैं।
यह शुरुआती खरीद है। आगे चलकर दोनों देश भारत में इस सिस्टम के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता और स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री को फायदा मिल सकता है।
क्या है Javelin मिसाइल?
Javelin एक आधुनिक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है, जिसे खास तौर पर दुश्मन के बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे चर्चित खासियत इसकी Fire-and-Forget क्षमता है।
इस तकनीक में ऑपरेटर लक्ष्य की पहचान और लॉकिंग करने के बाद मिसाइल दागता है। लॉन्च के बाद मिसाइल अपने गाइडेंस सिस्टम की मदद से लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इससे ऑपरेटर को लगातार मिसाइल को गाइड करने की जरूरत नहीं रहती और वह लॉन्च के बाद अपनी स्थिति बदल सकता है।
युद्ध के मैदान में यह क्षमता खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि मिसाइल दागने के बाद सैनिक को लंबे समय तक उसी स्थान पर रहकर लक्ष्य को ट्रैक नहीं करना पड़ता।
टैंक और बख्तरबंद लक्ष्यों के खिलाफ उपयोगी
Javelin को मुख्य रूप से टैंक और दूसरे बख्तरबंद लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल कुछ परिस्थितियों में बंकर जैसे संरक्षित लक्ष्यों के खिलाफ भी किया जा सकता है।
इसका अपेक्षाकृत कॉम्पैक्ट लॉन्च सिस्टम पैदल सैनिकों के लिए उपयोगी है। यही वजह है कि इस तरह के हथियार विशेष रूप से उन इलाकों में अहम हो जाते हैं जहां भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही मुश्किल होती है।
भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि देश की सेना को अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन करना पड़ता है। पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में पैदल सैनिकों के पास प्रभावी एंटी-आर्मर हथियार होना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
किसने बनाया है Javelin सिस्टम?
Javelin मिसाइल सिस्टम को Javelin Joint Venture के तहत अमेरिका की प्रमुख रक्षा कंपनियों RTX और Lockheed Martin ने विकसित किया है।
यह सिस्टम अमेरिकी सेना के अलावा कई अन्य देशों की सेनाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी डिजाइन का उद्देश्य सैनिकों को ऐसा पोर्टेबल एंटी-आर्मर हथियार उपलब्ध कराना है, जिसे अपेक्षाकृत तेजी से तैनात किया जा सके।
भारत के लिए क्यों खास है Javelin?
भारत के लिए इस संभावित खरीद का महत्व केवल मिसाइलों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसके कई रणनीतिक पहलू हैं।
पहला, इससे भारतीय सेना की पैदल इकाइयों की एंटी-टैंक क्षमता मजबूत हो सकती है। आधुनिक युद्ध में टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहन अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में उनके खिलाफ प्रभावी हथियार जरूरी हैं।
दूसरा, Javelin का पोर्टेबल सिस्टम मुश्किल इलाकों में उपयोगी हो सकता है। सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में हल्के और मोबाइल एंटी-आर्मर सिस्टम सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
तीसरा, यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा-औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ा सकता है। अगर भविष्य में संयुक्त उत्पादन की दिशा में प्रगति होती है तो इससे भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
सिर्फ हथियार खरीद नहीं, रक्षा सहयोग का भी संकेत
भारत पिछले कुछ वर्षों में अपनी सैन्य जरूरतों के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में घरेलू उत्पादन पर भी जोर दे रहा है। ऐसे में अमेरिका से अत्याधुनिक सिस्टम की खरीद और उसके बाद संभावित संयुक्त उत्पादन का मॉडल भारत की लंबी अवधि की रक्षा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, प्रस्तावित सौदे को भारत की एंटी-टैंक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन इसकी अंतिम शर्तें, डिलीवरी और भविष्य के संयुक्त उत्पादन से जुड़ी व्यवस्थाएं अलग-अलग आधिकारिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेंगी।
कुल मिलाकर, Javelin सिस्टम की संभावित खरीद भारतीय सेना को आधुनिक एंटी-आर्मर क्षमता देने के साथ भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को भी नई गति दे सकती है।


