Nepal Flood News: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को तबाह कर दिया है। रासुवा की रहने वाली कॉपिला तमांग ने इस आपदा में अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उनका घर भी बाढ़ में बह गया। अब उनके पास परिवार की यादों के तौर पर मोबाइल फोन में मौजूद कुछ तस्वीरें ही बची हैं।
Nepal Flood News: नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ और उससे जुड़ी तबाही ने देश के कई हिस्सों में जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है। उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों में घर, सड़कें और पुल बह गए। हजारों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में रहने को मजबूर हैं।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच रासुवा की रहने वाली कॉपिला तमांग की कहानी बाढ़ की भयावहता को बेहद करीब से सामने लाती है। एक ही परिवार के 17 सदस्यों की मौत ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है।
एक झटके में खत्म हो गया पूरा परिवार
VIDEO | Nepal flood: Rescue and relief operations intensify in Rasuwa as Army airlifts survivors and supplies.
Volunteer Lepen Shah says, "We came here from Kathmandu yesterday. The government is also carrying out rescue and relief operations, and we are doing our bit to help.… pic.twitter.com/VuX72Rop7i
— Press Trust of India (@PTI_News) September 2, 2026 CNN की रिपोर्ट के अनुसार, कॉपिला तमांग ने बाढ़ में अपनी मां, बहन, दादी और परिवार के अन्य सदस्यों को खो दिया। मृतकों में केवल एक महीने का बच्चा भी शामिल था। बाढ़ ने उनके घर को भी अपनी चपेट में ले लिया।
कॉपिला के परिवार ने इससे पहले साल 2015 में आए विनाशकारी भूकंप का भी सामना किया था। उस समय उनका घर तबाह हो गया था। मुश्किलों के बावजूद परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया।
लेकिन करीब एक दशक बाद आई इस बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा।
आज कॉपिला के पास अपने परिवार की यादों के तौर पर मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें ही बची हैं। जिन लोगों के साथ उन्होंने जिंदगी बिताई, उनमें से अधिकांश अब उनके बीच नहीं हैं।
परिवार के लिए लौटकर आईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी
I met a girl who lost 17 members of her family and a 13-year-old survivor who nearly got washed away on her school bus. Displaced families are living in makeshift shelters after fleeing the worst-hit area of Rasuwa, Nepal. But they still don’t feel safe and fear more floods. pic.twitter.com/J9s4Zjp3hR
— Will Ripley (@willripleyCNN) September 2, 2026 बाढ़ आने के समय कॉपिला काठमांडू में थीं। जब उन्हें अपने पहाड़ी इलाके में परिवार के फंसने की खबर मिली तो वह तुरंत वापस लौट गईं।
लेकिन वहां पहुंचने तक हालात पूरी तरह बदल चुके थे।
उन्होंने CNN से बातचीत में बताया कि उन्हें अब बेहद अकेलापन महसूस होता है। परिवार के छोटे बच्चों के लिए यह नुकसान और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझने की स्थिति में नहीं है कि उसकी मां अब कभी वापस नहीं आएगी।
ऐसे में कॉपिला के सामने अपने दुख के साथ-साथ छोटे भाई को संभालने की जिम्मेदारी भी आ गई है। उनका कहना है कि अब उन्हें उसके लिए खुद को मजबूत बनाना होगा।
राहत शिविरों में भी खत्म नहीं हुआ डर
बाढ़ से बचाए गए हजारों लोगों को फिलहाल अस्थायी राहत शिविरों में रखा गया है। कुछ लोग स्कूलों और अधूरी इमारतों में भी रात गुजार रहे हैं।
लेकिन घर और परिवार खो चुके लोगों के लिए राहत शिविर भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं हो रहे हैं। कई लोगों को लगातार डर है कि कहीं पानी दोबारा न बढ़ जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक, रात के समय बाढ़ या पानी बढ़ने की आशंका की खबर मिलते ही कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगलों और पहाड़ी इलाकों की तरफ चले जाते हैं।
कई विस्थापित परिवार खुले स्थानों या अधूरी इमारतों की छतों पर रात बिताने को मजबूर हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने बताया कि बाढ़ में उसके दो छोटे भाई-बहनों की भी मौत हो गई।
ऐसे हालात में राहत शिविरों की रातें सिर्फ चिंता और डर में गुजर रही हैं। कई लोग अपने खोए हुए परिजनों को याद करके रोते हैं और उनके लिए नींद लेना भी मुश्किल हो गया है।
13 साल की बच्ची भी परिवार से हुई अलग
इस आपदा का सबसे गंभीर असर बच्चों पर भी पड़ा है। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ के दौरान वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। कुछ समय तक उसे यह भी पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं।
UNICEF के मुताबिक, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग क्षेत्रों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ के कारण कई स्कूलों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कुछ बच्चों को स्कूल से लौटते समय अचानक बढ़े पानी से बचने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कई बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
घर ही नहीं, लोगों की पूरी जिंदगी उजड़ गई
नेपाल की इस त्रासदी में नुकसान सिर्फ मकानों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। कई परिवारों ने अपने माता-पिता, बच्चों, भाई-बहनों और दूसरे करीबी रिश्तेदारों को खो दिया है।
कई लोग अभी भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। कुछ परिवारों को अब तक अपने प्रियजनों के शव भी नहीं मिले हैं। ऐसे में उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है।
कुछ मामलों में लापता लोगों की जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होने में भी समय लगा। प्रभावित परिवारों के सामने अब एक साथ कई चुनौतियां हैं—लापता परिजनों को ढूंढना, रहने के लिए सुरक्षित जगह तलाशना और अपनी जिंदगी को दोबारा शुरू करना।
नेपाल में 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत
नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बुधवार तक बढ़कर 1,127 हो गई। आपदा के करीब एक सप्ताह बाद भी बचाव और राहत अभियान जारी है तथा हजारों लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन में 348, नवलपरासी पूर्व में 217, नवलपरासी पश्चिम में 190 और नुवाकोट में 155 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा गोरखा में 66, धादिंग में 59, रसुवा में 45 और तनाहूं में 38 शव बरामद हुए हैं।
पुलिस के मुताबिक, 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके थे। लापता लोगों के परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है।
अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित क्षेत्रों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जबकि करीब 4,858 लापता लोगों की तलाश जारी बताई गई है।
7,900 से ज्यादा पुलिसकर्मी राहत अभियान में तैनात
अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। सुरक्षा बल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम जारी है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के करीब 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हुई थी। इसके बाद उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही हुई।
कॉपिला की कहानी सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं
कॉपिला तमांग की कहानी इस आपदा के मानवीय नुकसान की एक झलक है। एक ऐसा परिवार जिसने पहले भूकंप में अपना घर खोया, फिर मेहनत से दोबारा जिंदगी बनाई और अब बाढ़ में परिवार के 17 सदस्यों के साथ अपना घर भी खो दिया।
उनके पास अब पुरानी तस्वीरें हैं, एक छोटा भाई है जिसे मां के चले जाने का मतलब अभी पूरी तरह समझ नहीं आया और एक ऐसी जिंदगी है जिसे उन्हें अपने परिवार के बिना फिर से शुरू करना होगा।
नेपाल की इस बाढ़ ने हजारों परिवारों को इसी तरह के सवालों के सामने खड़ा कर दिया है—लापता परिजन कब मिलेंगे, घर कब दोबारा बनेगा और क्या अगली रात बिना किसी डर के गुजर पाएगी?
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन प्रभावित लोगों के लिए असली चुनौती आने वाले दिनों में शुरू होगी, जब उन्हें अपने घर, परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी के बिना भविष्य को दोबारा खड़ा करना होगा।


