Nepal Flood: नेपाल में भोटे कोशी नदी की भीषण बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। आपदा के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 2,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव टीमों ने 4,450 से अधिक लोगों को सुरक्षित बचाया है, जिनमें 187 से ज्यादा विदेशी नागरिक शामिल हैं।
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी अभियान और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं जारी हैं। नेपाल सरकार ने तत्काल राहत के साथ-साथ क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत बताई है।
626 शव बरामद, करीब 2,400 लोग अब भी लापता
भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ के बाद से सुरक्षा एजेंसियां, स्थानीय प्रशासन और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और लगभग 2,400 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। राहत टीमों ने 4,450 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें 187 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
प्रभावित जिलों में लापता लोगों की तलाश के लिए तलाशी अभियान जारी है। राहतकर्मी प्रभावित परिवारों तक भोजन, चिकित्सा सहायता और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में भी जुटे हैं।
भारत और चीन समेत कई देशों से मिल रही मदद
नेपाल ने आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग की है। भारत की ओर से सुरंगों और कठिन इलाकों में बचाव अभियान में मदद के लिए 11 सदस्यीय तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन की ओर से भी सुरंग बचाव अभियान के लिए विशेष टीम भेजे जाने की उम्मीद है।
भारत ने राहत अभियान के लिए 57 टन से अधिक राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई है। इसके अलावा चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी राहत सामग्री और सहायता मिलने की बात सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय मदद का उद्देश्य प्रभावित इलाकों में चल रहे खोज-बचाव अभियान को मजबूत करना और जरूरतमंद लोगों तक तत्काल राहत पहुंचाना है।
विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया इमरजेंसी कंट्रोल रूम
बाढ़ में कई विदेशी नागरिकों के प्रभावित होने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने उनके लिए विशेष इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
यह कंट्रोल रूम विदेशी नागरिकों के परिवारों और संबंधित अधिकारियों के बीच संपर्क स्थापित करने, पहचान संबंधी प्रक्रिया में सहायता करने और जरूरत पड़ने पर स्वदेश वापसी की प्रक्रिया में सहयोग करने का काम करेगा।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों की स्थिति का पता लगाने के लिए भी अधिकारियों के स्तर पर समन्वय किया जा रहा है।
पुल, सड़क और पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान
नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। फिलहाल प्राथमिकता उन बुनियादी ढांचों की स्थिति जानने पर है, जो राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बेहद जरूरी हैं।
इस आकलन में सड़क, पुल और पनबिजली परियोजनाओं समेत कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को शामिल किया गया है। जिन क्षेत्रों में संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।
सरकार का मानना है कि तत्काल राहत अभियान के बाद क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।
विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को नेपाल ने बताया गलत
नेपाल सरकार ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है जिनमें दावा किया गया था कि उसने आपदा के बाद विदेशी सहायता लेने से इनकार कर दिया है।
सरकार का कहना है कि बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है। साथ ही अधिकारियों ने आम लोगों और मीडिया से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक तौर पर पुष्टि किए गए आंकड़ों और सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
सरकार ने बिना पुष्टि वाली जानकारी और आंकड़ों को साझा या प्रसारित करने से भी बचने की सलाह दी है, ताकि आपदा के दौरान भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
नेपाल पर्यटकों के लिए खुला
भयंकर बाढ़ और तबाही के बावजूद नेपाल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि देश विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है। जिन इलाकों में बाढ़ का ज्यादा असर नहीं हुआ है, वहां सामान्य गतिविधियां जारी हैं।
हालांकि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा को लेकर स्थानीय प्रशासन की सलाह और सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। प्रभावित इलाकों में फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस लापता लोगों की तलाश, बचाव अभियान, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और राहत सामग्री पहुंचाने पर है।
पुनर्निर्माण के लिए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
नेपाल के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ हजारों लापता लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करना भी बड़ी चुनौती है।
ऐसे में भारत, चीन और अन्य देशों से मिल रही सहायता तत्काल राहत के साथ-साथ आने वाले समय में पुनर्निर्माण के प्रयासों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। नेपाल सरकार नुकसान का आकलन पूरा करने के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में आगे की योजना तैयार करेगी।


