Subhash Chandra Repayment Plan: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के पर्सनल इनसॉल्वेंसी मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की मंजूरी के बाद विवाद और बढ़ गया है। LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India ने रिपेमेंट प्लान का विरोध करते हुए इसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) में चुनौती देने का फैसला किया है। तीनों वित्तीय संस्थानों का कहना है कि उन्होंने NCLT के सामने भी इस प्लान का विरोध किया था, लेकिन पर्याप्त वोटिंग शेयर नहीं होने के कारण उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।
तीनों बैंकों के पास कुल 8.45% वोटिंग शेयर
LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India ने बताया कि सुभाष चंद्रा की इनसॉल्वेंसी कार्यवाही में तीनों की कुल वोटिंग हिस्सेदारी 8.45 फीसदी है। इनमें LIC Housing Finance की हिस्सेदारी 6.09 फीसदी, Canara Bank की 1.60 फीसदी और Union Bank of India की 0.76 फीसदी है।
तीनों संस्थानों ने चंद्रा की ओर से पेश किए गए करीब 6.25 करोड़ रुपये के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ मतदान किया था। इसके बावजूद दूसरे वित्तीय लेनदारों के समर्थन के चलते इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।
LIC Housing Finance की ओर से जारी बयान के मुताबिक, रिपेमेंट प्लान को मंजूरी इसलिए मिली क्योंकि अन्य वित्तीय क्रेडिटर्स की ओर से प्रस्ताव के पक्ष में कुल 80.81 फीसदी वोट पड़े।
NCLT के फैसले को NCLAT में चुनौती देने की तैयारी
LIC Housing Finance ने कहा है कि वह जल्द NCLAT में अपील दायर करेगा। इस अपील में अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों के भी शामिल होने की उम्मीद है।
Canara Bank ने भी स्पष्ट किया है कि उसने सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था। बैंक अब NCLT के आदेश को NCLAT में चुनौती देगा। वहीं Union Bank of India ने भी कहा है कि उसने रिजॉल्यूशन प्लान के खिलाफ मतदान किया था और NCLT के समक्ष भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
इस तरह NCLT से मंजूरी मिलने के बावजूद रिपेमेंट प्लान की कानूनी चुनौती का रास्ता खुल गया है।
फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी उठी थी
Canara Bank ने इस मामले में फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की थी। बैंक के अनुसार, उसके पास माइनॉरिटी वोटिंग शेयर होने के कारण यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका।
बैंक का कहना है कि मामले की वित्तीय स्थिति और लेनदेन की गहराई से जांच जरूरी है। अब NCLT के आदेश को NCLAT में चुनौती देकर वह अपनी आपत्तियों को आगे बढ़ाएगा।
NCLT ने किस आधार पर मंजूर किया रिपेमेंट प्लान?
सुभाष चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत इनसॉल्वेंसी कार्यवाही में यह रिपेमेंट प्लान इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की ओर से शुरू किए गए इनसॉल्वेंसी मामले के संदर्भ में सामने आया था।
NCLT ने लेनदारों की ओर से किए गए 22,000 करोड़ रुपये से अधिक के दावों के निपटारे के लिए चंद्रा की ओर से करीब 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान वाले प्लान को मंजूरी दी है।
यही अंतर इस मामले को खास बनाता है। एक तरफ लेनदारों के दावे 22,000 करोड़ रुपये से अधिक बताए गए हैं, जबकि मंजूर किए गए रिपेमेंट प्लान में भुगतान की राशि करीब 6.5 करोड़ रुपये है। इसी वजह से कुछ वित्तीय संस्थानों ने प्लान पर गंभीर आपत्ति जताई है।
HDFC Bank भी कर सकता है अपील
इस विवाद में अब एक और बड़ा बैंक शामिल हो सकता है। दिग्गज निजी बैंक HDFC Bank ने भी रिपेमेंट प्लान का विरोध किया था। बैंक ने 27 अगस्त को बताया था कि उसने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था।
HDFC Bank भी NCLT के फैसले के खिलाफ अपील करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। यदि बैंक NCLAT का रुख करता है, तो सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान के खिलाफ चुनौती और मजबूत हो सकती है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में NCLAT की भूमिका अहम होगी। LIC Housing Finance, Canara Bank और Union Bank of India की संभावित अपील के बाद अपीलीय ट्राइब्यूनल यह देखेगा कि NCLT ने रिपेमेंट प्लान को मंजूरी देते समय कानूनी और प्रक्रियात्मक नियमों का सही तरीके से पालन किया या नहीं।
अगर HDFC Bank भी अपील करता है, तो मामले में और क्रेडिटर्स की आपत्तियां सामने आ सकती हैं। ऐसे में सुभाष चंद्रा के रिपेमेंट प्लान पर अंतिम स्थिति तय होने में अभी और समय लग सकता है।
ध्यान दें: इस मामले में NCLT की मंजूरी के बावजूद संबंधित वित्तीय संस्थानों की ओर से NCLAT में चुनौती दिए जाने की तैयारी की जा रही है। इसलिए रिपेमेंट प्लान को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति आगे की अपीलीय कार्यवाही पर निर्भर करेगी।


