Nepal-China Border Floods Update: नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक करीब 160 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई बाढ़ से कई पुल बह गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और दर्जनों हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार, 27 अगस्त की सुबह अचानक आई बाढ़ ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज बहाव अपने साथ मलबा, चट्टानें और कीचड़ लेकर आया, जिससे रास्ते में आने वाली इमारतों, वाहनों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा। प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है।
भूकंप के कुछ मिनट बाद आई बाढ़
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके लगभग तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की सूचना मिली। अधिकारियों को आशंका है कि भूकंप के झटकों के कारण हिमनद या उससे जुड़ा कोई जल स्रोत प्रभावित हुआ होगा, जिसके बाद अचानक पानी का तेज बहाव नीचे की ओर आया।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और धादिंग जिलों में देखने को मिला। भोटे कोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने से सीमावर्ती इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र में लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के बाद भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भी भारी बाढ़ आ गई।
इसके बाद बाढ़ का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व समेत कई जिलों तक पहुंच गया। प्रभावित इलाके राजधानी काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर की दूरी तक फैले हुए बताए जा रहे हैं।
नेपाल और चीन में सैकड़ों लोग लापता
नेपाल सरकार के अनुसार, करीब 500 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं चीन के सरकारी सीजीटीएन के मुताबिक, चीन के हिस्से में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता हैं।
इस तरह नेपाल और चीन के प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की संख्या 750 से अधिक बताई जा रही है। हालांकि, बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
आपदा के बाद सामने आए वीडियो में बाढ़ की भयावहता साफ दिखाई दे रही है। तेज रफ्तार से बहता पानी अपने साथ भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें लेकर आगे बढ़ता नजर आया। कई जगहों पर लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए।
चार मंजिला इमारत और कई पुल पानी में बहे
सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में बाढ़ से हुई तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिला। एक वीडियो में चार मंजिला इमारत तेज बहाव के बीच ढहकर बहती हुई दिखाई दी। वहीं रसुवा में एक कार भी बाढ़ के पानी में बह गई।
एक अन्य वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव के कारण एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। धादिंग जिले में भी बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद पुल ढहकर नदी में बह गया।
नेपाल सरकार के अनुसार, बुधवार को आई अचानक बाढ़ में कम से कम 19 पुल बह गए। इससे प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत कार्य दोनों चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
133 भारतीय नागरिक भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबर ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार, लापता करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय यानी NRI शामिल हैं।
लापता भारतीयों में कम से कम 50 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री बताए जा रहे हैं। इसके अलावा ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य भी लापता हैं। संस्था के अनुसार, उसके 495 सदस्य सुरक्षित लौट चुके हैं।
तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। इसके अलावा नेपाल में फंसे या लापता लोगों में अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड समेत कई देशों के नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री ने बताया कि अलग-अलग स्थानों पर करीब 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान शामिल बताए गए हैं।
करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बचाव दलों ने प्रभावित इलाकों से करीब 100 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। इनमें से लगभग 30 लोगों का इलाज काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है।
हालात को देखते हुए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है। दुर्गम इलाकों तक पहुंचने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
नेपाल सेना ने 12 हेलीकॉप्टर लगाए
नेपाल सेना ने खोज और बचाव अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं। सेना के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को सुरक्षित बचाया गया।
आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली जिला अस्पताल की ओर भी भेजा गया है, ताकि जरूरतमंद लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
बाढ़ से सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत और बचाव अभियान को तेज करने की कोशिश की जा रही है।
भारत ने नेपाल को मदद का भरोसा दिया
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया।
भारत की ओर से नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी गई है। भारतीय दूतावास लगातार नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नागरिकों के बचाव के लिए समन्वय किया जा रहा है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। प्रभावित या अपने परिजनों से संपर्क न कर पा रहे लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
पर्यटकों के लिए भी हेल्पलाइन जारी
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी आपात स्थिति में सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। पर्यटकों के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया गया है।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिकों के लिए 0086 185 1428 4905 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इस नंबर पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश और केरल समेत भारत के कई राज्यों ने भी अपने स्तर पर हेल्पलाइन जारी की हैं। राज्यों को आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके निवासी भी शामिल हो सकते हैं।
42 किलोमीटर की सड़क को भी भारी नुकसान
‘काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के कारण नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क भी बह गई है।
सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर राहत टीमों को पहुंचने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा बाढ़ से करीब एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की खबर है। नेपाल में बिजली उत्पादन के लिए नदियों पर निर्भरता अधिक होने के कारण इन परियोजनाओं को हुआ नुकसान स्थानीय बुनियादी ढांचे और बिजली आपूर्ति के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुलाई आपात बैठक
आपदा के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में आपात बैठक हुई। बैठक में प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए।
प्रधानमंत्री शाह ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश तेज करने के निर्देश दिए।
बाद में प्रधानमंत्री शाह ने भारत की ओर से सहायता और एकजुटता जताने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया।
बचाव अभियान जारी, लापता लोगों की तलाश चुनौतीपूर्ण
नेपाल-तिब्बत सीमा के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में अचानक आई बाढ़ ने राहत और बचाव एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। कई सड़कें और पुल बह जाने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
फिलहाल नेपाल सेना, पुलिस और अन्य राहत एजेंसियां हेलीकॉप्टरों और जमीनी टीमों की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना, घायलों को चिकित्सा सुविधा देना और प्रभावित इलाकों में जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।
आपदा के बाद मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। ऐसे में बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।


