भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar ने बिहार के Rajgir में आयोजित Nalanda University Convocation Ceremony के दौरान वैश्विक व्यवस्था पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया तेजी से multi-polar (बहुध्रुवीय) बन रही है, जहां अलग-अलग संस्कृतियां और समाज अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि Nalanda की परंपरा इस बदलती वैश्विक व्यवस्था को संतुलित और लोकतांत्रिक बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
Nalanda की विरासत और आधुनिक पहचान
Nalanda University भारत की प्राचीन बौद्धिक परंपरा का प्रतीक रहा है। इसका ऐतिहासिक परिसर, जो आज UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, कभी दुनिया के सबसे बड़े शिक्षा केंद्रों में से एक था।
नई Nalanda University:
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग (EAS देशों) से स्थापित
- आधुनिक शिक्षा और शोध का केंद्र
- वैश्विक छात्रों का हब
- परंपरा और आधुनिकता का संगम
Multi-Polar World: क्या है इसका मतलब?

विदेश मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में:
- एक ही देश का वर्चस्व नहीं है
- अलग-अलग देश और संस्कृतियां अपनी पहचान बना रहे हैं
- वैश्विक निर्णय प्रक्रिया अधिक लोकतांत्रिक बन रही है
यह बदलाव “global democratisation” की ओर इशारा करता है, जहां हर समाज की भूमिका बढ़ रही है।
Viksit Bharat और Global Readiness
Narendra Modi द्वारा 2024 में नए कैंपस का उद्घाटन किए जाने के बाद, Nalanda University भारत के Viksit Bharat Vision का हिस्सा बन चुका है।
Jaishankar के अनुसार:
- भारत को दुनिया के लिए तैयार होना होगा
- और दुनिया को भारत को समझने के लिए तैयार होना होगा
- नई पीढ़ी को global awareness और cultural sensitivity अपनानी होगी
International Students की भूमिका
Nalanda University में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को लेकर Jaishankar ने कहा:
- वे अपने देशों में भारत के “cultural ambassadors” बन सकते हैं
- भारत की संस्कृति और सोच को वैश्विक स्तर पर ले जा सकते हैं
- शिक्षा के माध्यम से global connection मजबूत होगा
Technology vs Tradition: संतुलन जरूरी
Jaishankar ने एक महत्वपूर्ण बात कही:
- दुनिया में विकास की बहस अब technology पर केंद्रित है
- लेकिन “मानवता और परंपरा” को नहीं भूलना चाहिए
उनके शब्दों में:
“Vikas bhi, Virasat bhi — दोनों साथ चलने चाहिए।”
Nalanda Spirit क्यों है खास?
Nalanda की परंपरा हमें सिखाती है:
- ज्ञान का वैश्विक आदान-प्रदान
- विविधता का सम्मान
- संवाद और विचारों की स्वतंत्रता
यही कारण है कि इसे आज के multi-polar world में एक मार्गदर्शक के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
Nalanda University का यह दीक्षांत समारोह सिर्फ एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका और सोच का प्रतीक बनकर उभरा।
S Jaishankar के अनुसार, बदलती दुनिया में भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक दृष्टिकोण मिलकर एक नई वैश्विक व्यवस्था को आकार दे सकते हैं।
आने वाले समय में Nalanda University न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि वैश्विक संवाद और सहयोग का भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
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