भारत में जनगणना की प्रक्रिया अब एक बड़े बदलाव के साथ शुरू होने जा रही है। Registrar General of India ने घोषणा की है कि Census 2027 की शुरुआत 1 अप्रैल से होगी, जिसमें पहली बार डिजिटल सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self Enumeration) की सुविधा दी जा रही है।
यह कदम देश में डेटा कलेक्शन को तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
पहली बार डिजिटल Self-Enumeration की सुविधा
इस बार जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि:
- नागरिक खुद ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी भर सकेंगे
- डेटा भरने के बाद एक Self-Enumeration ID जनरेट होगी
- इस ID को बाद में Census Enumerator को देना होगा
यह प्रक्रिया फील्ड विजिट से पहले 15 दिनों की विंडो में पूरी की जा सकेगी।
किन राज्यों में कब होगी शुरुआत?
Registrar General of India के अनुसार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग शेड्यूल तय किया गया है:
1 अप्रैल – 15 अप्रैल
- दिल्ली
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- गोवा
- कर्नाटक
- सिक्किम
- ओडिशा
- लक्षद्वीप
- मिजोरम
5 अप्रैल – 19 अप्रैल
- गुजरात
- दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
16 अप्रैल – 30 अप्रैल
- मध्य प्रदेश
- आंध्र प्रदेश
- अरुणाचल प्रदेश
- चंडीगढ़
- छत्तीसगढ़
- हरियाणा
दिल्ली (MCD क्षेत्र)
- Self Enumeration: 1 मई – 15 मई
- House Listing: 16 मई – 14 जून
House Listing Census क्या है?
जनगणना का पहला चरण Houselisting and Housing Census होता है:
- अवधि: 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक
- इसमें घर, सुविधाएं और संपत्ति से जुड़ी जानकारी ली जाती है
इसके बाद दूसरा चरण 2027 में होगा, जिसमें:
- जनसंख्या गणना
- जाति, सामाजिक और आर्थिक जानकारी
- प्रत्येक व्यक्ति का विवरण
डिजिटल जनगणना से क्या बदलेगा?
पहले जनगणना पूरी तरह कागज पर होती थी, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में काफी समय लगता था।
अब:
- डेटा शुरुआत से ही डिजिटल होगा
- रिजल्ट जल्दी जारी किए जा सकेंगे
- 2027 में ही कई आंकड़े जारी होने की संभावना
डेटा की गोपनीयता पर क्या कहा गया?
Mrityunjay Kumar Narayan (Census Commissioner) ने स्पष्ट किया:
- सभी व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी
- Census Act 1948 के तहत डेटा सुरक्षित रहेगा
- इसका उपयोग किसी सरकारी योजना का लाभ देने के लिए नहीं किया जाएगा
जाति जनगणना पर क्या अपडेट?
- जाति से जुड़े सवाल दूसरे चरण में पूछे जाएंगे
- प्रश्नों को अंतिम रूप व्यापक चर्चा के बाद दिया जाएगा
ध्यान देने वाली बात यह है कि:
- आजादी के बाद नियमित जनगणना में जाति को शामिल नहीं किया गया था
- 1881 से 1931 के बीच आखिरी बार व्यापक जाति आधारित गणना हुई थी
नागरिकों के लिए क्या जरूरी?
- सही और सटीक जानकारी देना
- समय पर Self-Enumeration पूरा करना
- Enumerator को ID दिखाना
निष्कर्ष

भारत की जनगणना अब डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। Registrar General of India की यह पहल न केवल प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि देश को तेजी से और सटीक डेटा उपलब्ध कराने में भी मदद करेगी।
यह बदलाव आने वाले समय में नीति निर्माण और विकास योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
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