प्रधानमंत्री Narendra Modi इन दिनों इटली दौरे पर हैं और इसी दौरे से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को मशहूर ‘मेलोडी’ चॉकलेट गिफ्ट करते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिर से #Melodi ट्रेंड करने लगा और लोग पूछने लगे — “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?”
यह वही लाइन है जिसने 90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर में करोड़ों भारतीयों के दिलों में जगह बनाई थी। “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ” वाला विज्ञापन आज भी लोगों को याद है। लेकिन इस वायरल वीडियो के बाद अब लोगों की दिलचस्पी सिर्फ टॉफी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे बनाने वाली कंपनी के कारोबार और इतिहास में भी बढ़ गई है।
मोदी-मेलोनी वीडियो के बाद फिर चर्चा में आई मेलोडी
Thank you for the gift pic.twitter.com/7ePxbJwPbA
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) May 20, 2026 सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पीएम मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी चॉकलेट का पैक गिफ्ट करते दिखाई दिए। मेलोनी ने खुद इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “Thanks for the gift.”
भारत और इटली के नेताओं के बीच पहले भी “Melodi” शब्द को लेकर सोशल मीडिया पर कई मीम्स और हैशटैग वायरल हो चुके हैं। ऐसे में जब पीएम मोदी ने मेलोनी को “Melody” गिफ्ट की, तो यह पल इंटरनेट पर तुरंत वायरल हो गया। यही वजह है कि अब लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर इस छोटी सी टॉफी के पीछे कितनी बड़ी कंपनी खड़ी है।
कौन बनाता है Melody Chocolate?
मेलोडी कैंडी बनाने वाली कंपनी है Parle Products। यह भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी बिस्कुट और कन्फेक्शनरी कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी की शुरुआत साल 1929 में हुई थी। इसे मोहनलाल दयाल चौहान ने मुंबई के विले पार्ले इलाके में शुरू किया था। शुरुआत में कंपनी कैंडी और मिठाइयां बनाती थी। बाद में 1939 में इसने बिस्कुट कारोबार में एंट्री की और फिर ‘पारले-जी’ जैसा ब्रांड देशभर में मशहूर हो गया।
मेलोडी कैंडी को कंपनी ने 1983 में लॉन्च किया था। उस दौर में बाजार में सामान्य टॉफियां ज्यादा थीं, लेकिन मेलोडी ने कैरामल और चॉकलेट का ऐसा कॉम्बिनेशन दिया जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आया।
आखिर Melody इतनी अलग क्यों बनी?
मेलोडी की सबसे बड़ी खासियत इसका ड्यूल फ्लेवर था। बाहर से यह कैरामल टॉफी लगती थी लेकिन अंदर गाढ़ा चॉकलेट फिलिंग होता था। उस समय भारतीय बाजार में इस तरह की कैंडी बहुत कम थीं।
इसके अलावा इसकी कीमत भी आम लोगों की पहुंच में थी। छोटी दुकानों से लेकर स्कूल कैंटीन तक मेलोडी आसानी से मिल जाती थी। यही वजह रही कि यह सिर्फ एक कैंडी नहीं बल्कि एक “nostalgia brand” बन गई।
आज भी भारत के छोटे शहरों और गांवों में मेलोडी की मजबूत पकड़ बनी हुई है।
“मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?” विज्ञापन बना गेमचेंजर
ब्रांड एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मेलोडी की सफलता में इसके विज्ञापन अभियान की बहुत बड़ी भूमिका रही।
इसकी मशहूर टैगलाइन:
“मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?”
और जवाब:
“मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।”
उस दौर में टीवी विज्ञापनों का प्रभाव बहुत ज्यादा था। पारले ने इस टैगलाइन को इतने मजबूत तरीके से लोगों तक पहुंचाया कि यह पॉप कल्चर का हिस्सा बन गई।
आज भी सोशल मीडिया पर यह लाइन मीम्स और मजाक में इस्तेमाल होती रहती है। यही किसी भी ब्रांड की सबसे बड़ी सफलता मानी जाती है।
कितना बड़ा है Parle Products का कारोबार?
पारले प्रोडक्ट्स आज सिर्फ मेलोडी तक सीमित नहीं है। कंपनी: Parle-G, Monaco, Krackjack, Hide & Seek, Melody जैसे कई बड़े ब्रांड बनाती है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू लगभग ₹15,568.49 करोड़ रहा। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 8.5% ज्यादा था। इसी दौरान कंपनी का मुनाफा करीब ₹979.53 करोड़ दर्ज किया गया।
भारत के कन्फेक्शनरी मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 15% मानी जाती है। उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, कंपनी की वैल्यू 8 से 10 अरब डॉलर के बीच आंकी जाती है।
हालांकि कंपनी अलग-अलग कैंडी ब्रांड्स की कमाई सार्वजनिक नहीं करती, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि उसकी कन्फेक्शनरी कैटेगरी में मेलोडी सबसे मजबूत ब्रांड्स में शामिल है।
Parle-G से लेकर Melody तक, कैसे बना ब्रांड साम्राज्य?
भारत में पारले का नाम सबसे ज्यादा Parle-G बिस्कुट से जुड़ा है। लेकिन कंपनी ने सिर्फ बिस्कुट नहीं बल्कि कैंडी, चॉकलेट, नमकीन और स्नैक्स सेगमेंट में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई। 1940 और 1950 के दशक में जब विदेशी ब्रांड भारतीय बाजार में सीमित थे, तब पारले ने “Made in India” ब्रांड के तौर पर खुद को स्थापित किया।
आज भी ग्रामीण भारत में पारले के उत्पादों की पहुंच बेहद मजबूत मानी जाती है। छोटे पैक और कम कीमत वाली रणनीति ने कंपनी को करोड़ों ग्राहकों तक पहुंचाया।
आज कौन संभाल रहा है Parle Products?
फिलहाल पारले प्रोडक्ट्स का संचालन चौहान परिवार के सदस्य: विजय चौहान, शरद चौहान, राज चौहान कर रहे हैं। Forbes की रिपोर्ट्स के मुताबिक विजय चौहान और उनके परिवार की नेटवर्थ करीब 8.6 अरब डॉलर बताई जाती है।
हालांकि समय के साथ पारले ग्रुप कई हिस्सों में बंट गया, लेकिन मेलोडी और पारले-जी जैसे बड़े ब्रांड्स आज भी पारले प्रोडक्ट्स के पास ही हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों छा गई Melody?
मार्केटिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी ब्रांड के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह होती है कि वह पीढ़ियों तक लोगों की याद में बना रहे। मेलोडी के साथ यही हुआ है।
90 के दशक के बच्चे आज बड़े हो चुके हैं, लेकिन मेलोडी का नाम सुनते ही उन्हें बचपन याद आ जाता है। अब पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के वायरल वीडियो ने इस ब्रांड को नई पीढ़ी के बीच भी फिर से चर्चा में ला दिया है।
यानी करीब 43 साल पुरानी यह कैंडी आज भी भारतीय बाजार में अपनी पहचान बनाए हुए है — और शायद इसी वजह से लोग आज भी पूछते हैं, “मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?”
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