FPI Investment: जुलाई 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार के कई सेक्टर्स में अपनी पोजीशन बदली। Consumer Services, Healthcare और Consumer Durables में विदेशी निवेशकों की खरीदारी सबसे ज्यादा रही, जबकि Capital Goods, Telecommunications और Power सेक्टर में उन्होंने जमकर बिकवाली की। खास बात यह रही कि महीने के दूसरे हिस्से में IT और Consumer Durables में खरीदारी की रफ्तार काफी बढ़ी।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई में भारतीय इक्विटी बाजार में सेक्टर के हिसाब से अपने निवेश का रुख बदला। कुछ सेक्टर्स में विदेशी निवेशकों ने भारी रकम लगाई, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों से उन्होंने अपना पैसा निकाल लिया। आंकड़ों के मुताबिक, Consumer Services सेक्टर जुलाई में FPI निवेश का सबसे बड़ा पसंदीदा क्षेत्र रहा, जबकि Capital Goods और Telecommunications से सबसे ज्यादा निकासी देखने को मिली।
महीने के दौरान FPI की रणनीति में भी बदलाव नजर आया। जुलाई के पहले पखवाड़े में जिन सेक्टर्स में खरीदारी मजबूत थी, उनमें से कुछ में दूसरे पखवाड़े में बिकवाली शुरू हो गई। इसके उलट Information Technology और Consumer Durables में महीने के दूसरे हिस्से में खरीदारी काफी तेज हुई।
Consumer Services में सबसे ज्यादा FPI निवेश
जुलाई में Consumer Services सेक्टर में 10,201 करोड़ रुपये का नेट FPI निवेश आया। यह सभी प्रमुख सेक्टर्स में सबसे ज्यादा रहा।
आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने Consumer Services में 7,361 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसके बाद महीने के दूसरे हिस्से में भी निवेश का सिलसिला जारी रहा और 2,840 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नेट निवेश आया।
इस तरह पूरे जुलाई में Consumer Services में FPI का कुल नेट निवेश 10,201 करोड़ रुपये रहा। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों ने घरेलू खपत और सर्विस आधारित कारोबार से जुड़े शेयरों में अपनी दिलचस्पी बनाए रखी।
Healthcare सेक्टर भी विदेशी निवेशकों की पसंद
Healthcare सेक्टर जुलाई में FPI निवेश के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। इस सेक्टर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुल 7,731 करोड़ रुपये का नेट निवेश किया।
महीने के पहले पखवाड़े में Healthcare सेक्टर में 4,101 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई। वहीं, दूसरे पखवाड़े में भी विदेशी निवेशकों ने अपनी खरीदारी जारी रखी और 3,630 करोड़ रुपये का निवेश किया।
इस तरह Healthcare में जुलाई के दोनों हिस्सों में लगातार खरीदारी देखने को मिली। यह उन चुनिंदा सेक्टर्स में रहा जहां विदेशी निवेशकों का रुख पूरे महीने सकारात्मक बना रहा।
Consumer Durables में दूसरे पखवाड़े में बढ़ी खरीदारी
Consumer Durables सेक्टर में FPI की खरीदारी जुलाई के दूसरे हिस्से में काफी तेज हुई। महीने के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर में 2,384 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
इसके बाद 16 जुलाई से महीने के अंत तक निवेश बढ़कर 4,958 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह जुलाई में Consumer Durables में कुल 7,342 करोड़ रुपये का नेट FPI निवेश दर्ज किया गया।
आंकड़ों से साफ है कि इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों का भरोसा महीने के दूसरे हिस्से में और मजबूत हुआ। पहले पखवाड़े की तुलना में दूसरे हिस्से में निवेश दोगुने से भी ज्यादा रहा।
Metals & Mining में पहले खरीदारी, फिर बिकवाली
Metals & Mining सेक्टर में जुलाई के दौरान FPI की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। महीने के पहले हिस्से में विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर में 5,993 करोड़ रुपये का निवेश किया।
हालांकि, दूसरे पखवाड़े में तस्वीर बदल गई और FPIs ने 1,056 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की। इसके बावजूद पूरे जुलाई में इस सेक्टर में कुल 4,937 करोड़ रुपये का नेट निवेश रहा।
इससे पता चलता है कि महीने के दूसरे हिस्से में विदेशी निवेशकों ने Metals & Mining में अपनी कुछ पोजीशन कम की, लेकिन पूरे महीने के आधार पर सेक्टर में उनका निवेश सकारात्मक रहा।
IT सेक्टर में दूसरे पखवाड़े में जोरदार खरीदारी
Information Technology सेक्टर में भी FPI की गतिविधि जुलाई के दूसरे हिस्से में बदल गई। महीने के पहले पखवाड़े में IT सेक्टर में विदेशी निवेशकों की नेट खरीदारी सिर्फ 60 करोड़ रुपये रही।
लेकिन दूसरे पखवाड़े में खरीदारी अचानक तेज हुई और FPIs ने 3,298 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके चलते जुलाई में IT सेक्टर में कुल नेट FPI निवेश 3,358 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
यानी जुलाई की शुरुआत में IT में विदेशी निवेशकों की गतिविधि काफी सीमित रही, लेकिन महीने के दूसरे हिस्से में इस सेक्टर में उनका भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।
Construction Materials में भी आया निवेश
Construction Materials सेक्टर में जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों ने 2,445 करोड़ रुपये का नेट निवेश किया।
इसमें से 1,574 करोड़ रुपये का निवेश महीने के पहले पखवाड़े में आया, जबकि दूसरे पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने 871 करोड़ रुपये लगाए।
इस तरह Construction Materials भी उन सेक्टर्स में शामिल रहा, जहां जुलाई में FPI की कुल खरीदारी सकारात्मक रही।
Services सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी
Services सेक्टर में भी जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की। इस सेक्टर में पूरे महीने 2,323 करोड़ रुपये का नेट FPI निवेश आया।
पहले पखवाड़े में FPIs ने Services सेक्टर में 2,353 करोड़ रुपये का निवेश किया। हालांकि, दूसरे पखवाड़े में इस सेक्टर में 30 करोड़ रुपये की मामूली नेट बिकवाली हुई।
इसके बावजूद पहले हिस्से में हुई मजबूत खरीदारी के कारण पूरे जुलाई में Services सेक्टर का नेट निवेश सकारात्मक बना रहा।
Financial Services में हुई 694 करोड़ रुपये की बिकवाली
Asset Under Custody यानी AUC के आधार पर Financial Services FPI पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा सेक्टर है। हालांकि, जुलाई में इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों का रुख कमजोर रहा।
पूरे महीने Financial Services में 694 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली हुई। जुलाई के पहले पखवाड़े में FPIs ने इस सेक्टर के शेयरों में 1,975 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। लेकिन दूसरे पखवाड़े में उन्होंने 2,669 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
जुलाई के अंत में Financial Services सेक्टर का FPI AUC करीब 21.13 लाख करोड़ रुपये रहा। 15 जुलाई को यह आंकड़ा करीब 21.39 लाख करोड़ रुपये था।
यानी महीने के अंत तक AUC में कुछ कमी आई, लेकिन इसके बावजूद Financial Services FPI पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा सेक्टर बना रहा।
Capital Goods से सबसे ज्यादा FPI निकासी
जुलाई में Capital Goods सेक्टर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सबसे बड़ा शिकार रहा। इस सेक्टर से 6,275 करोड़ रुपये की नेट FPI निकासी दर्ज की गई।
इसके बाद Telecommunications सेक्टर रहा, जहां FPIs ने 5,725 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की।
Power सेक्टर में भी विदेशी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। जुलाई में Power से 2,863 करोड़ रुपये की नेट निकासी देखने को मिली।
इससे संकेत मिलता है कि जुलाई में विदेशी निवेशकों ने कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में आक्रामक खरीदारी करने के साथ-साथ Capital Goods, Telecom और Power जैसे क्षेत्रों में अपनी पोजीशन कम की।
FPI पोर्टफोलियो में Financial और Auto सेक्टर का दबदबा
AUC के आधार पर देखा जाए तो Financial Services के बाद Automobile और Auto Components सेक्टर का FPI पोर्टफोलियो में बड़ा हिस्सा है। जुलाई के अंत में इस सेक्टर का AUC करीब 5.40 लाख करोड़ रुपये रहा।
इसके बाद Healthcare सेक्टर का नंबर रहा, जिसका FPI AUC करीब 5.33 लाख करोड़ रुपये था।
Capital Goods सेक्टर का FPI AUC करीब 4.89 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, Information Technology का इक्विटी AUC जुलाई के अंत में लगभग 3.93 लाख करोड़ रुपये था।
Consumer Durables सेक्टर का AUC करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि Realty सेक्टर में FPI AUC लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
जुलाई में विदेशी निवेशकों की रणनीति से क्या संकेत मिलते हैं?
जुलाई के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में एक समान रणनीति नहीं अपनाई। उन्होंने Consumer Services, Healthcare और Consumer Durables जैसे सेक्टर्स में बड़ी मात्रा में पूंजी लगाई, जबकि Capital Goods, Telecom और Power में बिकवाली की।
इसके अलावा, महीने के दूसरे हिस्से में IT और Consumer Durables में खरीदारी का बढ़ना भी महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ Metals & Mining में पहले पखवाड़े की खरीदारी के बाद दूसरे हिस्से में बिकवाली देखने को मिली।
कुल मिलाकर, जुलाई के FPI आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशक सेक्टर आधारित रणनीति के साथ बाजार में अपनी पोजीशन बदल रहे थे। ऐसे में आगे भी FPI की खरीद-बिक्री का रुझान भारतीय शेयर बाजार और अलग-अलग सेक्टर के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बना रह सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध FPI निवेश आंकड़ों पर आधारित है। किसी भी शेयर या सेक्टर में निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


