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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: जुलाई में विदेशी निवेशकों ने Consumer Services, Healthcare और Consumer Durables पर लगाया दांव, इन सेक्टर्स से निकाली रकम
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जुलाई में विदेशी निवेशकों ने Consumer Services, Healthcare और Consumer Durables पर लगाया दांव, इन सेक्टर्स से निकाली रकम

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/18 at 8:48 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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11 Min Read
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FPI Investment: जुलाई 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार के कई सेक्टर्स में अपनी पोजीशन बदली। Consumer Services, Healthcare और Consumer Durables में विदेशी निवेशकों की खरीदारी सबसे ज्यादा रही, जबकि Capital Goods, Telecommunications और Power सेक्टर में उन्होंने जमकर बिकवाली की। खास बात यह रही कि महीने के दूसरे हिस्से में IT और Consumer Durables में खरीदारी की रफ्तार काफी बढ़ी।

Contents
Consumer Services में सबसे ज्यादा FPI निवेशHealthcare सेक्टर भी विदेशी निवेशकों की पसंदConsumer Durables में दूसरे पखवाड़े में बढ़ी खरीदारीMetals & Mining में पहले खरीदारी, फिर बिकवालीIT सेक्टर में दूसरे पखवाड़े में जोरदार खरीदारीConstruction Materials में भी आया निवेशServices सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपये की नेट खरीदारीFinancial Services में हुई 694 करोड़ रुपये की बिकवालीCapital Goods से सबसे ज्यादा FPI निकासीFPI पोर्टफोलियो में Financial और Auto सेक्टर का दबदबाजुलाई में विदेशी निवेशकों की रणनीति से क्या संकेत मिलते हैं?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जुलाई में भारतीय इक्विटी बाजार में सेक्टर के हिसाब से अपने निवेश का रुख बदला। कुछ सेक्टर्स में विदेशी निवेशकों ने भारी रकम लगाई, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों से उन्होंने अपना पैसा निकाल लिया। आंकड़ों के मुताबिक, Consumer Services सेक्टर जुलाई में FPI निवेश का सबसे बड़ा पसंदीदा क्षेत्र रहा, जबकि Capital Goods और Telecommunications से सबसे ज्यादा निकासी देखने को मिली।

महीने के दौरान FPI की रणनीति में भी बदलाव नजर आया। जुलाई के पहले पखवाड़े में जिन सेक्टर्स में खरीदारी मजबूत थी, उनमें से कुछ में दूसरे पखवाड़े में बिकवाली शुरू हो गई। इसके उलट Information Technology और Consumer Durables में महीने के दूसरे हिस्से में खरीदारी काफी तेज हुई।

Consumer Services में सबसे ज्यादा FPI निवेश

जुलाई में Consumer Services सेक्टर में 10,201 करोड़ रुपये का नेट FPI निवेश आया। यह सभी प्रमुख सेक्टर्स में सबसे ज्यादा रहा।

आंकड़ों के अनुसार, 1 से 15 जुलाई के बीच विदेशी निवेशकों ने Consumer Services में 7,361 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसके बाद महीने के दूसरे हिस्से में भी निवेश का सिलसिला जारी रहा और 2,840 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नेट निवेश आया।

इस तरह पूरे जुलाई में Consumer Services में FPI का कुल नेट निवेश 10,201 करोड़ रुपये रहा। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों ने घरेलू खपत और सर्विस आधारित कारोबार से जुड़े शेयरों में अपनी दिलचस्पी बनाए रखी।

Healthcare सेक्टर भी विदेशी निवेशकों की पसंद

Healthcare सेक्टर जुलाई में FPI निवेश के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। इस सेक्टर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुल 7,731 करोड़ रुपये का नेट निवेश किया।

महीने के पहले पखवाड़े में Healthcare सेक्टर में 4,101 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई। वहीं, दूसरे पखवाड़े में भी विदेशी निवेशकों ने अपनी खरीदारी जारी रखी और 3,630 करोड़ रुपये का निवेश किया।

इस तरह Healthcare में जुलाई के दोनों हिस्सों में लगातार खरीदारी देखने को मिली। यह उन चुनिंदा सेक्टर्स में रहा जहां विदेशी निवेशकों का रुख पूरे महीने सकारात्मक बना रहा।

Consumer Durables में दूसरे पखवाड़े में बढ़ी खरीदारी

Consumer Durables सेक्टर में FPI की खरीदारी जुलाई के दूसरे हिस्से में काफी तेज हुई। महीने के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर में 2,384 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

इसके बाद 16 जुलाई से महीने के अंत तक निवेश बढ़कर 4,958 करोड़ रुपये हो गया। इस तरह जुलाई में Consumer Durables में कुल 7,342 करोड़ रुपये का नेट FPI निवेश दर्ज किया गया।

आंकड़ों से साफ है कि इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों का भरोसा महीने के दूसरे हिस्से में और मजबूत हुआ। पहले पखवाड़े की तुलना में दूसरे हिस्से में निवेश दोगुने से भी ज्यादा रहा।

Metals & Mining में पहले खरीदारी, फिर बिकवाली

Metals & Mining सेक्टर में जुलाई के दौरान FPI की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। महीने के पहले हिस्से में विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर में 5,993 करोड़ रुपये का निवेश किया।

हालांकि, दूसरे पखवाड़े में तस्वीर बदल गई और FPIs ने 1,056 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की। इसके बावजूद पूरे जुलाई में इस सेक्टर में कुल 4,937 करोड़ रुपये का नेट निवेश रहा।

इससे पता चलता है कि महीने के दूसरे हिस्से में विदेशी निवेशकों ने Metals & Mining में अपनी कुछ पोजीशन कम की, लेकिन पूरे महीने के आधार पर सेक्टर में उनका निवेश सकारात्मक रहा।

IT सेक्टर में दूसरे पखवाड़े में जोरदार खरीदारी

Information Technology सेक्टर में भी FPI की गतिविधि जुलाई के दूसरे हिस्से में बदल गई। महीने के पहले पखवाड़े में IT सेक्टर में विदेशी निवेशकों की नेट खरीदारी सिर्फ 60 करोड़ रुपये रही।

लेकिन दूसरे पखवाड़े में खरीदारी अचानक तेज हुई और FPIs ने 3,298 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके चलते जुलाई में IT सेक्टर में कुल नेट FPI निवेश 3,358 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

यानी जुलाई की शुरुआत में IT में विदेशी निवेशकों की गतिविधि काफी सीमित रही, लेकिन महीने के दूसरे हिस्से में इस सेक्टर में उनका भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।

Construction Materials में भी आया निवेश

Construction Materials सेक्टर में जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों ने 2,445 करोड़ रुपये का नेट निवेश किया।

इसमें से 1,574 करोड़ रुपये का निवेश महीने के पहले पखवाड़े में आया, जबकि दूसरे पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने 871 करोड़ रुपये लगाए।

इस तरह Construction Materials भी उन सेक्टर्स में शामिल रहा, जहां जुलाई में FPI की कुल खरीदारी सकारात्मक रही।

Services सेक्टर में 2,323 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी

Services सेक्टर में भी जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की। इस सेक्टर में पूरे महीने 2,323 करोड़ रुपये का नेट FPI निवेश आया।

पहले पखवाड़े में FPIs ने Services सेक्टर में 2,353 करोड़ रुपये का निवेश किया। हालांकि, दूसरे पखवाड़े में इस सेक्टर में 30 करोड़ रुपये की मामूली नेट बिकवाली हुई।

इसके बावजूद पहले हिस्से में हुई मजबूत खरीदारी के कारण पूरे जुलाई में Services सेक्टर का नेट निवेश सकारात्मक बना रहा।

Financial Services में हुई 694 करोड़ रुपये की बिकवाली

Asset Under Custody यानी AUC के आधार पर Financial Services FPI पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा सेक्टर है। हालांकि, जुलाई में इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों का रुख कमजोर रहा।

पूरे महीने Financial Services में 694 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली हुई। जुलाई के पहले पखवाड़े में FPIs ने इस सेक्टर के शेयरों में 1,975 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। लेकिन दूसरे पखवाड़े में उन्होंने 2,669 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।

जुलाई के अंत में Financial Services सेक्टर का FPI AUC करीब 21.13 लाख करोड़ रुपये रहा। 15 जुलाई को यह आंकड़ा करीब 21.39 लाख करोड़ रुपये था।

यानी महीने के अंत तक AUC में कुछ कमी आई, लेकिन इसके बावजूद Financial Services FPI पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा सेक्टर बना रहा।

Capital Goods से सबसे ज्यादा FPI निकासी

जुलाई में Capital Goods सेक्टर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का सबसे बड़ा शिकार रहा। इस सेक्टर से 6,275 करोड़ रुपये की नेट FPI निकासी दर्ज की गई।

इसके बाद Telecommunications सेक्टर रहा, जहां FPIs ने 5,725 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की।

Power सेक्टर में भी विदेशी निवेशकों का रुख कमजोर रहा। जुलाई में Power से 2,863 करोड़ रुपये की नेट निकासी देखने को मिली।

इससे संकेत मिलता है कि जुलाई में विदेशी निवेशकों ने कुछ चुनिंदा सेक्टर्स में आक्रामक खरीदारी करने के साथ-साथ Capital Goods, Telecom और Power जैसे क्षेत्रों में अपनी पोजीशन कम की।

FPI पोर्टफोलियो में Financial और Auto सेक्टर का दबदबा

AUC के आधार पर देखा जाए तो Financial Services के बाद Automobile और Auto Components सेक्टर का FPI पोर्टफोलियो में बड़ा हिस्सा है। जुलाई के अंत में इस सेक्टर का AUC करीब 5.40 लाख करोड़ रुपये रहा।

इसके बाद Healthcare सेक्टर का नंबर रहा, जिसका FPI AUC करीब 5.33 लाख करोड़ रुपये था।

Capital Goods सेक्टर का FPI AUC करीब 4.89 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, Information Technology का इक्विटी AUC जुलाई के अंत में लगभग 3.93 लाख करोड़ रुपये था।

Consumer Durables सेक्टर का AUC करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि Realty सेक्टर में FPI AUC लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

जुलाई में विदेशी निवेशकों की रणनीति से क्या संकेत मिलते हैं?

जुलाई के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में एक समान रणनीति नहीं अपनाई। उन्होंने Consumer Services, Healthcare और Consumer Durables जैसे सेक्टर्स में बड़ी मात्रा में पूंजी लगाई, जबकि Capital Goods, Telecom और Power में बिकवाली की।

इसके अलावा, महीने के दूसरे हिस्से में IT और Consumer Durables में खरीदारी का बढ़ना भी महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ Metals & Mining में पहले पखवाड़े की खरीदारी के बाद दूसरे हिस्से में बिकवाली देखने को मिली।

कुल मिलाकर, जुलाई के FPI आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशक सेक्टर आधारित रणनीति के साथ बाजार में अपनी पोजीशन बदल रहे थे। ऐसे में आगे भी FPI की खरीद-बिक्री का रुझान भारतीय शेयर बाजार और अलग-अलग सेक्टर के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बना रह सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध FPI निवेश आंकड़ों पर आधारित है। किसी भी शेयर या सेक्टर में निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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