Asian Markets: एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। दक्षिण कोरियाई बाजारों में मजबूत तेजी रही, जबकि जापान का निक्केई 225 शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया। दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.7% के ऊपर बनी हुई है। इससे भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भी कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स करीब 0.3% ऊपर कारोबार करता नजर आया। दक्षिण कोरिया के बाजारों में करीब 3% की तेजी रही। छुट्टी के बाद बाजार खुलने से वहां खरीदारी का माहौल मजबूत रहा।
इसके विपरीत, जापान का Nikkei 225 शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ नजर आया। हालांकि, इंडेक्स अपने शुरुआती निचले स्तरों से कुछ हद तक रिकवर करने में सफल रहा। टोक्यो का TOPIX इंडेक्स भी कमजोर शुरुआत के बाद पॉजिटिव जोन में लौट आया।
भारतीय बाजार के लिए भी शुरुआती संकेत कमजोर हैं। प्री-मार्केट कारोबार में निफ्टी फ्यूचर्स की चाल से मंगलवार को Nifty 50 में कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी बाजारों में भी दबाव
सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला।
Dow Jones Industrial Average करीब 300 अंक फिसल गया। इसके अलावा S&P 500 और Nasdaq में भी कमजोरी रही।
मंगलवार के शुरुआती अमेरिकी फ्यूचर्स कारोबार में भी ज्यादा मजबूती नहीं दिखी। डाओ जोन्स फ्यूचर्स करीब 25 अंक नीचे रहे, जबकि S&P 500 और Nasdaq-100 फ्यूचर्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
क्रूड ऑयल 91 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशक संभावित सप्लाई बाधित होने की आशंका से चिंतित हैं।
मंगलवार को Brent crude futures 27 सेंट यानी करीब 0.3% बढ़कर 91.14 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले के कारोबारी सत्र में भी ब्रेंट में 2% से अधिक की तेजी आई थी।
वहीं, WTI crude 42 सेंट बढ़कर 85.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले सत्र में WTI की कीमत 85.37 डॉलर तक गई थी, जो 31 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर था।
क्रूड में तेजी का सीधा असर उन अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है जो बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करती हैं। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े स्तर पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकती हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों को हालिया घटनाक्रम से झटका लगा है। युद्धविराम को आगे बढ़ाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और दोनों देशों के बीच बातचीत में भी रुकावट की खबरें सामने आई हैं।
सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह की बड़ी बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है और तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो क्रूड की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इससे दुनियाभर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला मुश्किल हो सकता है।
बॉन्ड यील्ड 4.7% के डेंजर जोन के ऊपर
अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में भी तनाव का असर दिखाई दे रहा है। सोमवार को 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 3 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.72% हो गई।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी बढ़त देखने को मिली। जापान की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड भी पिछले सत्र में कई दशकों के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद मजबूत बनी हुई है।
बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। अगर अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न लगातार बढ़ता है, तो निवेशकों के लिए जोखिम वाली परिसंपत्तियों की तुलना में अमेरिकी सरकारी बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी
दूसरी ओर, सोने की कीमतों में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। निवेशकों को अमेरिका में अगले महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका अब पहले की तुलना में कम नजर आ रही है।
बाजार की नजर अब फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के मिनट्स पर है। निवेशक इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत तलाशेंगे।
मंगलवार को स्पॉट गोल्ड 0.4% बढ़कर 4,431.09 डॉलर प्रति औंस हो गया। वहीं, दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.3% बढ़कर 4,487.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
सोने की कीमतों में हालिया मजबूती के पीछे निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग के साथ केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी एक अहम वजह रही है। खासकर चीन समेत कुछ केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी ने पीली धातु को सपोर्ट दिया है।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, अमेरिकी बाजारों की कमजोरी, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और 91 डॉलर के पार पहुंचा क्रूड भारतीय बाजार के लिए भी चिंता का कारण है।
भारत एक बड़ा कच्चा तेल आयातक है। ऐसे में लंबे समय तक क्रूड महंगा रहने से महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की तुलना में अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं।
ऐसे माहौल में मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों की नजर खास तौर पर क्रूड ऑयल, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और ग्लोबल मार्केट संकेतों पर रहेगी।
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