देशभर में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर की कीमतें हमेशा आम लोगों की जेब से सीधे जुड़ी होती हैं। 16 अप्रैल 2026 को जारी ताज़ा कीमतों के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की स्थिति बनी हुई है, लेकिन इसके पीछे वैश्विक स्तर पर चल रहा बड़ा संकट भी छिपा है—खासतौर पर अमेरिका-ईरान तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर उसका असर।
दिल्ली में आज 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹913 है, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.5 दर्ज की गई है। हालांकि पहली नजर में कीमतें स्थिर लगती हैं, लेकिन इसके पीछे सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताएं और अंतरराष्ट्रीय हालात महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रमुख शहरों में आज LPG सिलेंडर के रेट

देश के अलग-अलग शहरों में LPG की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिलता है, जिसका कारण स्थानीय टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन लागत और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम होता है।
दिल्ली में घरेलू सिलेंडर ₹913 पर बना हुआ है, जबकि मुंबई में यह थोड़ा कम ₹912.5 है। कोलकाता में यह ₹939 तक पहुंच जाता है, जो चारों महानगरों में सबसे ज्यादा है। चेन्नई में ₹928.5 और बेंगलुरु में ₹915.5 का स्तर बना हुआ है।
अगर कमर्शियल सिलेंडर की बात करें तो कोलकाता और चेन्नई में कीमतें सबसे ज्यादा हैं—₹2208.5 और ₹2246.5। वहीं मुंबई में यह ₹2031 है, जो अपेक्षाकृत कम है।
चंडीगढ़ में घरेलू सिलेंडर ₹922.5 और कमर्शियल ₹2099.5 पर मिल रहा है, जबकि देहरादून में यह ₹932 और ₹2131.5 है। उत्तर-पूर्व के शहर अगरतला में कीमतें सबसे ज्यादा हैं, जहां घरेलू सिलेंडर ₹1073.5 तक पहुंच गया है।
कीमतें स्थिर क्यों हैं, जबकि कच्चा तेल महंगा हो रहा है?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में तेजी आई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है।
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित होती है और कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% LPG और बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में यह संकट भारत के लिए सीधा खतरा बन सकता था।
लेकिन सरकार ने समय रहते रणनीति बदलते हुए:
- वैकल्पिक देशों से सप्लाई सुनिश्चित की
- घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी
- कमर्शियल सप्लाई में कटौती की
यही वजह है कि आम लोगों को फिलहाल कीमतों में ज्यादा झटका नहीं लगा है।
कमर्शियल सेक्टर पर क्यों पड़ा असर?
होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान LPG के बड़े उपभोक्ता होते हैं। जब सप्लाई में दबाव आता है, तो सरकार पहले घरेलू जरूरतों को सुरक्षित करती है।
इस बार भी यही हुआ है—कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई को सीमित किया गया ताकि घरों में गैस की कमी न हो।
इसका असर यह हुआ कि:
- कमर्शियल सिलेंडर महंगे बने हुए हैं
- सप्लाई भी सीमित है
- बिजनेस कॉस्ट बढ़ने की संभावना है
आने वाले समय में इसका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी दिख सकता है।
‘जग विक्रम’ LPG जहाज: भारत के लिए बड़ी राहत
इस संकट के बीच एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। भारत का LPG पोत ‘जग विक्रम’ गुजरात के कांडला पोर्ट पर पहुंच चुका है।
इस जहाज की खास बातें:
- इसमें 20,400 टन LPG भरा हुआ है
- यह हालिया संघर्ष के बाद Strait of Hormuz पार करने वाला पहला भारतीय जहाज है
- इससे देश में गैस की उपलब्धता और मजबूत होगी
बताया जा रहा है कि अभी भी लगभग 15 जहाज इस रूट पर फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में ‘जग विक्रम’ का पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या आने वाले समय में LPG सस्ता होगा या महंगा?
यह पूरी तरह दो फैक्टर्स पर निर्भर करेगा:
पहला—अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या नहीं
दूसरा—वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का रुख
अगर तनाव बढ़ता है, तो:
- LPG और पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
- सप्लाई बाधित हो सकती है
अगर स्थिति सामान्य होती है, तो:
- कीमतें स्थिर रह सकती हैं
- कुछ राहत भी मिल सकती है
आम उपभोक्ताओं के लिए क्या संकेत?
फिलहाल स्थिति “नियंत्रण में” है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। सरकार की प्राथमिकता साफ है—घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देना।
इसका मतलब:
- अभी कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है
- लेकिन लंबी अवधि में जोखिम बना हुआ है
निष्कर्ष: राहत भी है, लेकिन जोखिम भी बरकरार
आज के LPG रेट्स को देखकर भले ही राहत महसूस हो रही हो, लेकिन इसके पीछे वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट की बड़ी कहानी छिपी हुई है।
भारत ने फिलहाल स्थिति को संभाल लिया है—लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ते हैं, तो इसका असर आम आदमी की रसोई तक जरूर पहुंचेगा।
इसलिए आने वाले कुछ हफ्ते LPG और ईंधन बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।
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