Kashmiri Pandit: कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कथित तौर पर ऑनलाइन जारी एक धमकी भरे पत्र के बाद सतर्क रहने की सलाह दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों को फिलहाल घर पर रहने और सुरक्षित स्थान पर रहने के लिए कहा गया है। धमकी भरे पत्र में कर्मचारियों को अपनी कार्यप्रणाली बदलने की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी सार्वजनिक किए जाने की बात सामने आई है।
मामले के सामने आने के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ऑनलाइन सामने आए इस पत्र की सत्यता और इसे जारी करने वाले संगठन के बारे में जांच कर रही हैं।
धमकी भरे पत्र के बाद बढ़ी सतर्कता
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में कुछ सरकारी विभागों को कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर मौखिक तौर पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खासकर राजस्व विभाग और स्कूल शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों को सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घर पर रहने की अनुमति देने की बात कही गई।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी औपचारिक सरकारी आदेश की पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि कर्मचारियों को दिए गए निर्देशों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
स्कूल शिक्षा निदेशक नसीर अहमद वानी ने किसी भी कर्मचारी को घर से काम करने या छुट्टी पर जाने का निर्देश दिए जाने से इनकार किया है। उनके मुताबिक, कर्मचारी नियमित रूप से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को लेकर आधिकारिक तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
पत्र में छह कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम होने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, कथित धमकी भरे पत्र में छह कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। बताया गया है कि ये सभी कर्मचारी राजस्व विभाग से जुड़े हुए हैं।
पत्र में इन कर्मचारियों के काम को आतंकवादियों से जुड़ी कथित संपत्तियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों की निजी जानकारी, जिसमें फोन नंबर शामिल हैं, सार्वजनिक किए जाने की बात भी सामने आई है।
यदि निजी जानकारी वास्तव में सार्वजनिक की गई है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह भी जांच का विषय है कि संबंधित कर्मचारियों का व्यक्तिगत डेटा किस माध्यम से हासिल किया गया।
पुलिस कर रही है पत्र की जांच
पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। ऑनलाइन सामने आए पत्र को ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ नाम के संगठन से जोड़कर देखा जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों को आशंका है कि यह किसी बड़े आतंकी संगठन का कथित मुखौटा या छद्म संगठन हो सकता है।
एक पुलिस अधिकारी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बातचीत में दावा किया कि यह समूह पहली बार जुलाई में सामने आया था। उस समय कथित तौर पर इस संगठन की ओर से आतंकी बुरहान वानी की पुण्यतिथि पर एक पोस्टर जारी किया गया था।
अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि संगठन का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से हो सकता है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और पुलिस की ओर से संगठन की पहचान तथा उसके आतंकी नेटवर्क से संबंध की अंतिम पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।
20 अगस्त तक काम पर नहीं आने की सलाह की खबर
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित धमकी पत्र में नाम आने वाले कर्मचारियों को विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कुछ कर्मचारियों को 20 अगस्त तक काम पर नहीं आने के लिए कहे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
हालांकि, इस संबंध में कोई औपचारिक सरकारी आदेश सामने नहीं आया है। इसलिए कर्मचारियों को दिए गए कथित मौखिक निर्देशों और आधिकारिक प्रशासनिक स्थिति के बीच अंतर बना हुआ है।
प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की भी खबर है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
घाटी में करीब 9,000 प्रवासी कर्मचारी
‘ऑल प्राइम मिनिस्टर्स पैकेज एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के अध्यक्ष सनी रैना के मुताबिक, कश्मीर घाटी में इस समय करीब 9,000 प्रवासी कर्मचारी काम कर रहे हैं।
इनमें प्रधानमंत्री के पैकेज के तहत घाटी में नियुक्त किए गए कर्मचारी भी शामिल हैं। ऐसे में किसी भी धमकी या सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम का असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की सुरक्षा और कामकाज पर पड़ सकता है।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रही है। घाटी में नियुक्त कर्मचारियों की ओर से समय-समय पर सुरक्षित माहौल और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग उठती रही है।
कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों की हत्या के बाद सामने आया मामला
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले महीने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में एक ईंट भट्ठे पर दो प्रवासी मजदूरों की हत्या की घटना हुई थी। उस घटना के करीब एक सप्ताह बाद कथित धमकी पत्र सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां मौजूदा मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी पत्र के पीछे कौन लोग हैं।
कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उठी चिंता
कथित धमकी पत्र में कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर सार्वजनिक किए जाने की खबर ने सुरक्षा संबंधी चिंता को और बढ़ा दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती भी है कि कर्मचारियों की निजी जानकारी तक किस तरह पहुंच बनाई गई।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या यह केवल डर पैदा करने की कोशिश है या इसके पीछे कोई संगठित आतंकी नेटवर्क काम कर रहा है। पुलिस ऑनलाइन गतिविधियों और पत्र जारी करने वाले कथित संगठन की भूमिका की जांच कर रही है।
फिलहाल, मामले में पुलिस की जांच जारी है और धमकी पत्र की वास्तविकता तथा इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान की पुष्टि का इंतजार है। वहीं, घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित और अन्य प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।


