कम CGPA को अक्सर इंजीनियरिंग छात्रों के करियर में बड़ी रुकावट माना जाता है। कॉलेज प्लेसमेंट के दौरान कई कंपनियां न्यूनतम CGPA की शर्त रखती हैं, जिसकी वजह से कम स्कोर वाले छात्रों के लिए शुरुआती अवसर सीमित हो सकते हैं। हालांकि, JIIT नोएडा के ग्रेजुएट नमन बंसल की कहानी बताती है कि मजबूत तकनीकी कौशल और लगातार मेहनत से करियर की दिशा बदली जा सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के मुताबिक, नमन बंसल ने JIIT नोएडा से B.Tech की पढ़ाई की और उनका CGPA करीब 6 रहा। कम CGPA के कारण वह कॉलेज के दौरान कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने अपनी Programming Skills पर लगातार काम किया और Competitive Programming में भी उपलब्धियां हासिल कीं।
बताया जा रहा है कि नमन ने MakeMyTrip और DE Shaw जैसी कंपनियों में काम किया। इसके बाद उन्हें Adobe में Member of Technical Staff के तौर पर मौका मिला और अब वह Microsoft में SDE-2 के पद पर कार्यरत बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी मौजूदा सालाना Compensation करीब ₹90 लाख बताई गई है। हालांकि, यह आंकड़ा सार्वजनिक सोशल मीडिया दावे पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
कॉलेज में CGPA कम होने के कारण प्लेसमेंट का रास्ता हुआ बंद
Meet Naman Bansal, who completed his https://t.co/Ws1j7hoGgc from JIIT Noida. This guy had a very low CGPA of just 6 overall, which made him unable to sit for a single placement in college. Today, he is an SDE-2 at Microsoft, earning ₹90 LPA 🔥
He was not even able to mention… pic.twitter.com/jqWr75Bjis
— Vikas Alwys (@VikasAlwys) August 11, 2026 X पर Vikas Alwys की ओर से शेयर की गई पोस्ट में नमन की करियर जर्नी का जिक्र किया गया है। पोस्ट के मुताबिक, JIIT नोएडा में पढ़ाई के दौरान उनका CGPA लगभग 6 था। इस वजह से वह कॉलेज के कैंपस प्लेसमेंट में हिस्सा नहीं ले सके।
आमतौर पर इंजीनियरिंग कॉलेजों में कंपनियां अपने भर्ती मानदंड में न्यूनतम CGPA तय करती हैं। ऐसे में कम CGPA वाले छात्रों को कई बार अच्छे अवसरों के लिए कॉलेज के बाहर प्रयास करना पड़ता है। नमन के मामले में भी यही हुआ। उन्होंने अकादमिक स्कोर की सीमा के बजाय अपनी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दिया।
उनकी प्रोफाइल में Programming और Competitive Programming को अहम भूमिका दी गई। बताया जाता है कि उन्होंने Codeforces पर Candidate Master रैंक भी हासिल की थी। इससे उनकी समस्या हल करने की क्षमता और Coding Skills को मजबूत आधार मिला।
Adobe ने Technical Rounds के बाद भी नहीं दिया मौका
नमन की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा Adobe से जुड़ा है। सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, उन्होंने शुरुआत में Adobe में Internship के लिए आवेदन किया था।
बताया गया कि उन्होंने शुरुआती Technical Rounds अच्छे तरीके से पूरे किए। यानी तकनीकी स्तर पर उनका प्रदर्शन कंपनी की प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त था। लेकिन HR Round के दौरान कम CGPA उनके चयन में बाधा बन गया और उन्हें Internship नहीं मिल सकी।
यह घटना उनके लिए निराशाजनक जरूर रही होगी, लेकिन उन्होंने इसे करियर का अंत नहीं माना। इसके बजाय उन्होंने दूसरे रास्तों से अवसर तलाशना जारी रखा।
Referral के जरिए MakeMyTrip में मिली Internship
Adobe से रिजेक्शन के बाद नमन को Referral के जरिए MakeMyTrip में Internship का अवसर मिलने की बात सामने आई है। यह उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
MakeMyTrip में काम करने से उन्हें वास्तविक इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स पर काम करने और Professional Environment में अपने Skills को इस्तेमाल करने का अनुभव मिला। यह अनुभव आगे उनके Resume को मजबूत करने में मददगार रहा।
यही वह चरण था जहां उनकी कहानी केवल कम CGPA वाले छात्र की कहानी नहीं रही, बल्कि एक ऐसे इंजीनियर की Journey बनने लगी, जिसने अपनी Technical Skills के आधार पर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया।
MakeMyTrip के बाद DE Shaw में Full-Time Opportunity
MakeMyTrip का अनुभव हासिल करने के बाद नमन को DE Shaw में Full-Time Opportunity मिलने की बात कही गई है। किसी प्रतिष्ठित टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी में काम करने का अनुभव उनके प्रोफेशनल प्रोफाइल के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
यहां तक पहुंचने के दौरान उनका करियर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। कॉलेज में कैंपस प्लेसमेंट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने बाहरी Opportunities के जरिए अपने लिए रास्ता बनाया। Coding Skills, Competitive Programming और Work Experience उनके लिए धीरे-धीरे नए दरवाजे खोलते गए।
जिस Adobe ने पहले रिजेक्ट किया, उसी में मिली नौकरी
नमन की कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब उन्हें बाद में Adobe में काम करने का मौका मिला।
जिस कंपनी ने कथित तौर पर कम CGPA के कारण उनके Internship Application को आगे नहीं बढ़ाया था, उसी Adobe में बाद में उन्हें Member of Technical Staff के पद पर नियुक्त किया गया। यह बदलाव दिखाता है कि शुरुआती भर्ती में किसी एक Eligibility Criteria के कारण मिला रिजेक्शन हमेशा के लिए करियर का फैसला नहीं होता।
Work Experience और मजबूत Technical Profile बनने के बाद वही उम्मीदवार कंपनी के लिए अलग तरीके से मूल्यवान हो सकता है।
Adobe के बाद Microsoft में SDE-2 बनने का दावा
सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, Adobe में करीब दो साल काम करने के बाद नमन ने Microsoft का रुख किया। उन्हें Microsoft में SDE-2 के तौर पर काम करते हुए बताया गया है।
SDE-2 यानी Software Development Engineer स्तर की भूमिका में आम तौर पर Software Development, Problem Solving और बड़े Technical Projects पर काम करने की जिम्मेदारी होती है। इस स्तर तक पहुंचना किसी भी Software Engineer के लिए महत्वपूर्ण करियर उपलब्धि मानी जाती है।
पोस्ट में नमन की सालाना Compensation करीब ₹90 लाख बताई गई है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर किए गए दावे से लिया गया है। इसमें Base Salary, Bonus और Stock Components शामिल हैं या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए ₹90 लाख को आधिकारिक रूप से सत्यापित Salary Package के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नमन की कहानी से क्या सीख मिलती है?
नमन बंसल की कथित Career Journey की सबसे बड़ी सीख यह है कि CGPA महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह किसी इंजीनियर की पूरी क्षमता का अकेला पैमाना नहीं है।
कम CGPA की वजह से शुरुआती अवसरों में दिक्कत आ सकती है। कई कंपनियां Eligibility Criteria में CGPA को शामिल करती हैं और इस कारण कुछ उम्मीदवार आवेदन या Campus Recruitment के स्तर पर ही बाहर हो जाते हैं। लेकिन इसके बाद उम्मीदवार के पास अपनी Skills और Experience को मजबूत करने के कई रास्ते होते हैं।
Programming Skills, Data Structures and Algorithms, Competitive Programming, Projects, Internships और वास्तविक काम का अनुभव ऐसे क्षेत्र हैं जो टेक इंडस्ट्री में करियर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नमन के मामले में भी सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, Coding उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। उन्होंने कम CGPA की सीमा के बावजूद अपनी Technical Profile को इतना मजबूत किया कि उन्हें एक के बाद एक बड़ी कंपनियों में अवसर मिलते गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी
नमन की कहानी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि कॉलेज का CGPA करियर की शुरुआत में कुछ दरवाजे बंद कर सकता है, लेकिन यह किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता को परिभाषित नहीं करता।
एक प्रतिक्रिया में उनकी स्थिति को इस तरह समझाया गया कि CGPA उनकी कमजोरी रहा, जबकि Coding उनकी ताकत बन गई। कई यूजर्स ने उनके लगातार प्रयास और Technical Skills की सराहना की।
इस कहानी का सकारात्मक पहलू यही है कि रिजेक्शन के बाद भी प्रयास जारी रखने से नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, छात्रों को यह भी समझना चाहिए कि केवल CGPA को नजरअंदाज करना सही रणनीति नहीं है। जहां संभव हो, वहां Academic Performance और Technical Skills दोनों पर काम करना बेहतर विकल्प है।
कम CGPA वाले इंजीनियरिंग छात्रों के लिए क्या मायने रखती है यह कहानी?
नमन की Journey उन छात्रों के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक हो सकती है जो कम CGPA के कारण नौकरी को लेकर चिंतित हैं। उनका उदाहरण यह संकेत देता है कि यदि Campus Placement का रास्ता सीमित हो जाए, तो Off-Campus Applications, Referrals, Internships और Technical Competitions के जरिए अवसर तलाशे जा सकते हैं।
हालांकि, हर छात्र का Career अलग होता है और केवल किसी एक वायरल कहानी के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि CGPA का कोई महत्व नहीं है। कई कंपनियां आज भी इसे Screening Criteria के तौर पर इस्तेमाल करती हैं।
इसलिए बेहतर रणनीति यह हो सकती है कि छात्र अपने उपलब्ध समय में Coding और Problem Solving Skills के साथ-साथ Projects, Internships, Resume Building और Networking पर भी ध्यान दें।
नमन बंसल की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि एक रिजेक्शन या कम CGPA करियर की अंतिम मंजिल तय नहीं करता। सही Skills विकसित करने, लगातार सीखने और नए अवसरों के लिए प्रयास करते रहने से करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही, उनकी ₹90 लाख Compensation और Microsoft में मौजूदा पद से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित आधिकारिक स्रोत इसकी पुष्टि न करें।


