नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM 2026) में चेयरमैन Mukesh Ambani ने भविष्य की तकनीकों को लेकर कई बड़े ऐलान किए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट इंटरनेट और ग्रीन एनर्जी को कंपनी के अगले विकास चरण का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत को केवल AI का उपभोक्ता नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर AI का निर्माता बनना होगा।
रिलायंस ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में कंपनी का फोकस डिजिटल कनेक्टिविटी, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा पर रहेगा। AGM में आकाश अंबानी और अनंत अंबानी ने भी कंपनी की भविष्य की रणनीति का रोडमैप शेयरधारकों के सामने रखा।
भारत में बनेगा सबसे बड़ा AI बैकबोन
जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी Akash Ambani ने बताया कि गुजरात के जामनगर में भारत का “सॉवरेन AI बैकबोन” विकसित किया जा रहा है। यह एक विशाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, जो डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर और AI सेवाओं के लिए आधार तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना को रिलायंस की अपनी सौर ऊर्जा से संचालित किया जाएगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन AI इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकता है।
आकाश अंबानी के अनुसार, रिलायंस का उद्देश्य केवल AI मॉडल बनाना नहीं बल्कि पूरे देश के लिए AI इकोसिस्टम तैयार करना है, जिससे सरकार, उद्योग, स्टार्टअप और आम नागरिक लाभ उठा सकें।
जियो लाएगा अपना सैटेलाइट इंटरनेट
AGM की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक जियो की सैटेलाइट कम्युनिकेशन योजना रही। आकाश अंबानी ने कहा कि जियो अब सैटेलाइट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी प्रवेश करेगा।
उन्होंने कहा,
“जियो ने भारत को जमीन पर जोड़ा है, अब हमें भारत को आसमान से जोड़ना है।”
जियो देश के दूरदराज गांवों, द्वीपों और सीमा क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए स्वदेशी लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार कर रही है। जियो का लक्ष्य भारत के लिए स्वदेशी और किफायती सैटेलाइट इंटरनेट समाधान तैयार करना है।
भारतीय भाषाओं में बात करेगा AI
आकाश अंबानी ने कहा कि दुनिया के अधिकांश AI प्लेटफॉर्म पहले अंग्रेजी में विकसित किए जाते हैं और बाद में उनका अनुवाद किया जाता है। लेकिन रिलायंस का मॉडल पूरी तरह अलग होगा।
उन्होंने कहा कि भारत का AI भारतीय भाषाओं में विकसित किया जाएगा ताकि देश के करोड़ों लोग अपनी भाषा में AI सेवाओं का लाभ उठा सकें।
रिलायंस इंटेलिजेंस 22 भारतीय भाषाओं में AI सेवाएं उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है।
कंपनी जिन प्रमुख सेवाओं पर काम कर रही है उनमें शामिल हैं:
- JioBharat AIQ
- JioHealth AIQ
- JioLearn AIQ
- JioKrishi AIQ
- AI Vyapar
इन सेवाओं का उद्देश्य किसानों, छात्रों, छोटे व्यापारियों और आम परिवारों तक AI तकनीक को पहुंचाना है।
उत्तराधिकार योजना लगभग पूरी
मुकेश अंबानी ने AGM के दौरान यह भी संकेत दिया कि रिलायंस की उत्तराधिकार (Succession) योजना लगभग पूरी हो चुकी है।
पिछले कुछ वर्षों में आकाश अंबानी, अनंत अंबानी और ईशा अंबानी को रिलायंस के विभिन्न व्यवसायों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। AGM में तीनों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि कंपनी का अगला नेतृत्व नई पीढ़ी के हाथों में मजबूत रूप से स्थापित हो रहा है।
ग्रीन एनर्जी बनेगी नया ग्रोथ इंजन
रिलायंस के न्यू एनर्जी बिजनेस का नेतृत्व कर रहे Anant Ambani ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा कारोबार कंपनी की अगली बड़ी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।
उन्होंने बताया कि:
- सोलर मॉड्यूल उत्पादन से इस वित्त वर्ष में राजस्व शुरू होगा।
- बैटरी निर्माण संयंत्र भी इसी वर्ष चालू होने वाला है।
- ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया पर बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है।
रिलायंस ने Samsung C&T के साथ 3 अरब डॉलर का दीर्घकालिक ग्रीन अमोनिया आपूर्ति समझौता भी किया है। कंपनी के मुताबिक यह दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन अमोनिया ऑफटेक समझौतों में से एक है।
AGM 2026 की 5 सबसे बड़ी बातें
- जामनगर में देश का सबसे बड़ा AI बैकबोन विकसित होगा।
- जियो स्वदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की तैयारी कर रहा है।
- AI सेवाएं 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएंगी।
- उत्तराधिकार योजना लगभग पूरी होने का संकेत।
- ग्रीन एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन रिलायंस का नया ग्रोथ इंजन बनेंगे।
निष्कर्ष
रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM ने साफ कर दिया है कि कंपनी अब केवल तेल, टेलीकॉम और रिटेल तक सीमित नहीं रहना चाहती। AI, सैटेलाइट इंटरनेट और ग्रीन एनर्जी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश के जरिए रिलायंस भारत की डिजिटल और ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व करने की तैयारी में है। यदि जियो का सैटेलाइट नेटवर्क और भारतीय भाषाओं वाला AI सफल होता है, तो इसका असर देश के करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है।


