ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय शुरू हो चुका है और लाखों टैक्सपेयर्स ITR-1 (सहज) फॉर्म के जरिए अपना रिटर्न दाखिल करते हैं। हालांकि, ITR-1 सबसे आसान फॉर्म जरूर है, लेकिन यह सभी के लिए नहीं है। यदि आपने शेयर बाजार में निवेश किया है, बिजनेस या फ्रीलांसिंग से कमाई की है या विदेश से आय प्राप्त होती है, तो आपको ITR-2, ITR-3 या ITR-4 जैसे दूसरे फॉर्म भरने पड़ सकते हैं। गलत ITR फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स विभाग की ओर से Defective Return Notice भी भेजा जा सकता है।
मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना के अनुसार, कुछ खास परिस्थितियों में ITR-1 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में सही ITR फॉर्म का चयन करना बेहद जरूरी है।
किन 10 मामलों में ITR-1 नहीं भर सकते?
1. शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG)
यदि आपने शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचकर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन कमाया है, तो ITR-1 लागू नहीं होगा। सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में ITR-2 भरना होता है। वहीं, यदि आपकी ट्रेडिंग को बिजनेस इनकम माना जाता है, जैसे F&O या नियमित ट्रेडिंग, तो ITR-3 भरना होगा।
2. ₹1.25 लाख से अधिक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG)
यदि सूचीबद्ध शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड की बिक्री पर धारा 112A के तहत आपका लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन 1.25 लाख रुपये से अधिक है, तो आप ITR-1 दाखिल नहीं कर सकते।
3. जमीन, मकान या अन्य संपत्ति की बिक्री
यदि आपने जमीन, मकान, गहने, डेट म्यूचुअल फंड या कोई अन्य कैपिटल एसेट बेचा है और उससे कैपिटल गेन हुआ है, तो इसकी जानकारी ITR-1 में नहीं दी जा सकती।
4. बिजनेस, प्रोफेशन या फ्रीलांसिंग से आय
यदि आपकी आय किसी बिजनेस, प्रोफेशन, फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी या प्रोप्राइटरशिप बिजनेस से होती है, तो ITR-1 मान्य नहीं होगा। ऐसे मामलों में सामान्यतः ITR-3 भरना होता है। यदि आपने प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम चुनी है, तो ITR-4 लागू हो सकता है।
5. F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग
यदि आपने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या इंट्राडे ट्रेडिंग की है, जिसे टैक्स नियमों के अनुसार बिजनेस इनकम माना जाता है, तो ITR-1 नहीं भर सकते।
6. अनलिस्टेड इक्विटी शेयर होल्ड किए हों
यदि पिछले वित्त वर्ष के दौरान किसी भी समय आपके पास अनलिस्टेड इक्विटी शेयर रहे हैं, तो आपको ITR-2 या ITR-3 भरना होगा।
7. किसी कंपनी के डायरेक्टर हों
यदि आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, तो ITR-1 भरने के पात्र नहीं हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-2 या ITR-3 का उपयोग किया जाता है।
8. विदेश में संपत्ति या बैंक खाते का अधिकार
यदि आपके पास विदेश में कोई संपत्ति, निवेश या विदेशी बैंक खाते पर साइन करने का अधिकार है, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में विदेशी संपत्तियों का अलग से खुलासा करना अनिवार्य होता है।
9. विदेश से आय प्राप्त होती हो
यदि आपको विदेश से सैलरी, डिविडेंड, ब्याज, किराया या कैपिटल गेन जैसी आय होती है, तो ITR-1 लागू नहीं होगा। इसके लिए ITR-2 या ITR-3 के साथ आवश्यक शेड्यूल भरने होते हैं।
10. कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक हो
यदि आपकी कुल टैक्सेबल आय 50 लाख रुपये से अधिक है, पिछले वर्षों का नुकसान (Loss) आगे ले जाना है या लॉटरी, घुड़दौड़ जैसी विशेष श्रेणी की आय है, तो भी ITR-1 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
गलत ITR फॉर्म चुनने पर क्या होगा?
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर ITR दाखिल करने के साथ-साथ सही फॉर्म का चयन करना भी उतना ही जरूरी है। यदि कोई टैक्सपेयर गलत ITR फॉर्म भर देता है, तो इनकम टैक्स विभाग Defective Return Notice जारी कर सकता है। इससे रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है और कई मामलों में संशोधित (Revised) रिटर्न दाखिल करना पड़ सकता है।
सही ITR फॉर्म चुनना क्यों जरूरी है?
हर टैक्सपेयर की आय का स्रोत अलग-अलग होता है। ऐसे में ITR फॉर्म भी उसी आधार पर तय किया जाता है। यदि आपकी आय केवल वेतन, पेंशन और सीमित स्रोतों से है, तभी ITR-1 उपयुक्त हो सकता है। लेकिन निवेश, बिजनेस, विदेशी आय या कैपिटल गेन जैसी स्थितियों में सही फॉर्म का चयन करना भविष्य की टैक्स संबंधी परेशानियों से बचा सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। टैक्स, निवेश या किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। NewsJagran किसी भी वित्तीय उत्पाद या सेवा की सिफारिश नहीं करता।


