नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बीच भारत के लिए राहत और अवसर दोनों की खबर सामने आई है। एक ओर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, जिससे भारत के लिए कच्चा तेल और एलएनजी लेकर आने वाले अधिकांश जहाज सुरक्षित आगे बढ़ चुके हैं। दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दिए जाने के बाद तेहरान ने भारत को फिर से रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचने का प्रस्ताव दिया है।
HighLights
- ईरान ने भारत को 3-4 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट पर कच्चा तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया
- होर्मुज जलडमरूमध्य से अधिकांश भारतीय जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं
- अमेरिका की अस्थायी छूट के बाद भारत प्रस्ताव का सावधानी से कर रहा है मूल्यांकन
ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह घटनाक्रम भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो भारत को सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिलने से आयात लागत कम हो सकती है और घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
भारत को सस्ते कच्चे तेल का ऑफर
जानकारी के मुताबिक, ईरानी तेल कंपनियों और उनके ट्रेडिंग पार्टनर्स ने भारतीय रिफाइनरियों को क्षेत्रीय बाजार भाव की तुलना में 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल तक की छूट देने की पेशकश की है। यह ऑफर ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव अमल में आता है तो भारतीय रिफाइनरियों की कच्चे तेल की खरीद लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
होर्मुज में सामान्य होने लगे हालात
पिछले दिनों ईरान-इजरायल तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई तेल और गैस टैंकर प्रभावित हुए थे। भारत आने वाले 30 से अधिक जहाज इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर फंस गए थे।
अब राहत की बात यह है कि अधिकांश जहाज पिछले तीन दिनों के दौरान इस चोकपॉइंट को पार कर चुके हैं। केवल कुछ जहाज ही अभी दूसरी ओर मौजूद हैं, जिनके भी जल्द सुरक्षित निकलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा बड़ा खतरा काफी हद तक कम हुआ है।
ब्रिक्स बैठक में तेज हुई बातचीत
हाल ही में आयोजित ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान ने भारत के साथ कच्चे तेल का व्यापार फिर से शुरू करने की इच्छा जताई।
बैठक के दौरान ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद और भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच इस विषय पर चर्चा हुई। इसके अलावा, ईरान ने आधिकारिक राजनयिक माध्यमों से भी भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
भारत अभी बरत रहा है सावधानी
हालांकि ईरान की ओर से आकर्षक ऑफर दिया गया है, लेकिन भारत फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। अमेरिका द्वारा दी गई 60 दिनों की अस्थायी छूट और उससे जुड़े कानूनी व रणनीतिक पहलुओं का सरकार सावधानीपूर्वक अध्ययन कर रही है।
भारत की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखना भी है। इसलिए अंतिम फैसला सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
चीन की निर्भरता कम करना चाहता है ईरान
अमेरिकी प्रतिबंधों के दौरान चीन लंबे समय से ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ था। इसका फायदा उठाकर चीन बेहतर कीमतों पर तेल खरीदने में सफल रहा।
अब ईरान चाहता है कि भारत जैसे बड़े उपभोक्ता दोबारा उसके ग्राहक बनें, ताकि वह अपने निर्यात बाजार में विविधता ला सके और कीमतों पर केवल एक खरीदार की निर्भरता कम हो।
भारत के लिए क्या हो सकता है फायदा?
यदि भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल का व्यापार फिर से शुरू होता है, तो इसके कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
- भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- रिफाइनरियों की आयात लागत कम हो सकती है।
- ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत अधिक विविध होंगे।
- वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत होगी।
हालांकि अंतिम फैसला भू-राजनीतिक परिस्थितियों, अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थिति और दोनों देशों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा। फिलहाल ईरान का यह प्रस्ताव भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।


