नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जून 2026 में मजबूती के संकेत दिए हैं। सरकार का कहना है कि देश में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों, सेवा क्षेत्र, जीएसटी संग्रह, औद्योगिक उत्पादन, प्रत्यक्ष कर संग्रह और सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) में लगातार सुधार देखने को मिला है। साथ ही कच्चे तेल और उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में गिरावट से भी भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग, सरकारी निवेश और मजबूत कर संग्रह भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।
जून में मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का मजबूत प्रदर्शन
सरकार के अनुसार जून में एचएसबीसी (HSBC) द्वारा जारी मैन्यूफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 54.2 अंक दर्ज किया गया। यह लगातार 37वां महीना है जब मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है। किसी भी देश में 50 से अधिक पीएमआई यह संकेत देता है कि उत्पादन गतिविधियां विस्तार की स्थिति में हैं और उद्योगों में कारोबार बढ़ रहा है।
दूसरी ओर, मई महीने का सर्विस सेक्टर पीएमआई 59.8 अंक रहा, जो सेवा क्षेत्र में मजबूत मांग और कारोबार के विस्तार को दर्शाता है। भारत की जीडीपी में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए इसका मजबूत प्रदर्शन अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
औद्योगिक उत्पादन में पांच महीने की सबसे तेज वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 5.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जो पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक वृद्धि है।
विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि इस प्रकार रही—
- मोटर वाहन निर्माण में 14.5 प्रतिशत की वृद्धि
- इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माण में 20.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी
- बेसिक मेटल सेक्टर में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन और निवेश दोनों में सुधार जारी है।
जीएसटी संग्रह 1.95 लाख करोड़ रुपये के पार
देश की आर्थिक गतिविधियों में तेजी का सबसे बड़ा संकेत वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह से भी मिला।
जून 2026 में जीएसटी संग्रह 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष जून में यह 1.71 लाख करोड़ रुपये था। यानी एक वर्ष में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
उच्च जीएसटी संग्रह यह दर्शाता है कि कारोबार, उपभोग और औपचारिक अर्थव्यवस्था में निरंतर विस्तार हो रहा है।
सरकारी पूंजीगत खर्च में लगातार बढ़ोतरी
सरकार ने बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाने की रणनीति जारी रखी है।
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल और मई महीनों में सरकार ने 2.51 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह खर्च 2.21 लाख करोड़ रुपये था।
रेलवे परियोजनाओं पर अकेले 84 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस राशि का उपयोग कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं—
- रेलवे सुरक्षा व्यवस्था
- आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम
- ट्रेन सुरक्षा प्रणाली
- नई रेलवे लाइनें
- क्षमता विस्तार परियोजनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी कैपेक्स निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करता है और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी दोहरे अंक की वृद्धि
सरकार के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून 2026 तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 5.21 लाख करोड़ रुपये रहा।
यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.64 प्रतिशत अधिक है।
प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि यह संकेत देती है कि कॉरपोरेट आय, व्यक्तिगत आय और आर्थिक गतिविधियों में सुधार जारी है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला बड़ा सहारा
हाल के समय में पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी देखने को मिली है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और उर्वरकों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में कमी से कई फायदे मिल सकते हैं—
- आयात बिल में कमी
- चालू खाते के घाटे पर नियंत्रण
- विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती
- रुपये पर दबाव कम होना
- महंगाई नियंत्रित रखने में सहायता
यह स्थिति सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों के लिए राहत भरी मानी जा रही है।
बिजली की बढ़ती मांग भी आर्थिक गतिविधियों का संकेत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई महीने में बिजली की मांग पिछले वर्ष की तुलना में 11.2 प्रतिशत अधिक रही।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली की बढ़ती खपत आमतौर पर उद्योगों, फैक्ट्रियों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सेवा क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का संकेत होती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उत्पादन और कारोबार में निरंतर विस्तार जारी है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति मजबूत
हालांकि दुनिया के कई देशों में धीमी आर्थिक वृद्धि, महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल घरेलू मांग, सरकारी निवेश और मजबूत कर संग्रह के दम पर अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रही है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य बनी रहती हैं और मानसून भी अनुकूल रहता है, तो आने वाले महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि को और मजबूती मिल सकती है।
निष्कर्ष
जून 2026 के आर्थिक संकेतक बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है। मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र की निरंतर वृद्धि, रिकॉर्ड स्तर का जीएसटी संग्रह, बढ़ता सरकारी पूंजीगत निवेश, प्रत्यक्ष कर संग्रह में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जैसे कारकों ने आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा, लेकिन मौजूदा संकेत भारत की विकास यात्रा के लिए सकारात्मक तस्वीर पेश करते हैं।


