India-Uzbekistan Trade: भारत और उज्बेकिस्तान ने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए बड़ा रोडमैप तैयार किया है। दोनों देशों ने अगले तीन वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और कई नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस पहल से भारतीय कंपनियों के लिए मध्य एशिया के बाजार में अवसर बढ़ेंगे, वहीं उज्बेकिस्तान को भी सस्ते और गुणवत्तापूर्ण भारतीय उत्पादों का लाभ मिलेगा।
भारत-उज्बेकिस्तान ने बनाया बड़ा व्यापारिक लक्ष्य
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर आयोजित अंतर-सरकारी आयोग (IGC) के 14वें सत्र में दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में यह सहमति बनी कि अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार लगभग 67.25 करोड़ डॉलर रहा। दोनों देशों का मानना है कि मौजूदा क्षमता के मुकाबले यह आंकड़ा काफी कम है और इसे तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
इन सेक्टरों में बढ़ेगा भारत का एक्सपोर्ट
भारत ने कई ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जहां वह उज्बेकिस्तान को अपने निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है। इनमें शामिल हैं:
- फार्मास्यूटिकल्स और वैक्सीन
- मेडिकल डिवाइस
- ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स
- मशीनरी और इंजीनियरिंग उत्पाद
- कृषि उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड
- कृषि मशीनरी
- इलेक्ट्रिकल मशीनरी
- इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन
- टेक्सटाइल और केमिकल्स
- हेल्थकेयर और एजुकेशन सेवाएं
- पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेवाएं
विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है क्योंकि भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का बड़ा उत्पादक है और कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं, वैक्सीन तथा एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) उपलब्ध करा सकता है।
कृषि क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
बैठक में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को भी प्रमुख सहयोग क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया। दोनों देशों ने कृषि निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण, बीज विकास, कृषि अनुसंधान और जलवायु-अनुकूल खेती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत की आधुनिक कृषि तकनीक और मशीनरी उज्बेकिस्तान के कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक बनाने में मदद कर सकती है। वहीं भारतीय कृषि उत्पादों के लिए भी नया बाजार तैयार होगा।
डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर फोकस
भारत और उज्बेकिस्तान ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) और डिजिटल सहयोग को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान, डेटा साझाकरण और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
भारत ने सुझाव दिया कि सुरक्षित और तेज भुगतान व्यवस्था के लिए दोनों देशों के भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए। इसके अलावा कस्टम डेटा एक्सचेंज के जरिए व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना है।
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ेगा सहयोग
बैठक में ऊर्जा क्षेत्र को रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। भारत ने कहा कि उसकी तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विश्वसनीय ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति बेहद जरूरी है।
इसी वजह से दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी चर्चा की। इससे भारत को भविष्य की तकनीकी और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
गैर-टैरिफ बाधाएं हटाने पर रहेगा जोर
भारत ने स्पष्ट किया कि व्यापार बढ़ाने के लिए सिर्फ शुल्क (टैरिफ) कम करना पर्याप्त नहीं है। मंजूरी प्रक्रिया, गुणवत्ता मानक, परीक्षण, प्रमाणन, कस्टम प्रक्रियाओं और बाजार तक पहुंच से जुड़ी गैर-टैरिफ बाधाओं को भी कम करना होगा।
नई दिल्ली का मानना है कि यदि इन अड़चनों को दूर करने के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाती है तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तेजी से सुधार आएगा और व्यापार लक्ष्य हासिल करना आसान होगा।
भारत को कैसे होगा फायदा?
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार बढ़ने से भारतीय निर्यातकों को मध्य एशिया में बड़ा बाजार मिलेगा। फार्मा, स्मार्टफोन, मशीनरी और कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सहयोग से भारत की औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश तय रोडमैप पर तेजी से काम करते हैं तो अगले कुछ वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।


