नई दिल्ली: ईरान युद्ध का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सप्लाई में रुकावट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के बीच भारत की ऊर्जा कंपनियों को एलएनजी (LNG) खरीदने के लिए स्पॉट मार्केट का रुख करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर गैस की कीमतों पर पड़ा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने सितंबर डिलीवरी के लिए स्पॉट मार्केट से 23 डॉलर प्रति MMBtu से अधिक की कीमत पर LNG कार्गो खरीदे हैं। यह 2022 के बाद भारत द्वारा खरीदी गई सबसे महंगी LNG खेपों में शामिल है।
23 डॉलर से ज्यादा में खरीदी LNG
मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, सरकारी गैस कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड ने सितंबर में डिलीवरी के लिए एक LNG कार्गो की कीमत 23 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) से अधिक चुकाई है।
वहीं, गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (GSPC) ने भी सितंबर डिलीवरी वाले LNG कार्गो के लिए करीब 23 डॉलर प्रति MMBtu के मध्य स्तर पर भुगतान किया है। इन सौदों की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने के कारण लोगों ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
2022 के बाद सबसे महंगी खरीद
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा कीमतें भारत के लिए 2022 के बाद LNG खरीद का सबसे ऊंचा स्तर दर्शाती हैं। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली थी।
अब ईरान युद्ध और उससे जुड़ी सप्लाई बाधाओं ने एक बार फिर LNG बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए इसका असर खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।
कतर से सप्लाई में आई बाधा
भारत आमतौर पर कतर से लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट के तहत LNG खरीदता है। कतर दुनिया के प्रमुख LNG निर्यातकों में शामिल है और भारत के लिए भी एक अहम सप्लायर है।
लेकिन ईरानी हमलों में कतर के एक बड़े LNG एक्सपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचने के बाद सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से LNG की वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की लंबे समय तक बाधा एशिया और यूरोप समेत कई क्षेत्रों में गैस की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
यूरोप से भी करनी पड़ रही है प्रतिस्पर्धा
भारत की मुश्किल इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि LNG के लिए उसे यूरोप के खरीदारों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है। यूरोप में गैस की कीमतें भी कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।
ऐसे में स्पॉट मार्केट में उपलब्ध LNG कार्गो के लिए खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। भारत को अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इस महंगी गैस को खरीदना पड़ रहा है।
उर्वरक सेक्टर के लिए जरूरी है गैस
भारत में प्राकृतिक गैस की मांग का एक बड़ा हिस्सा उर्वरक उद्योग से आता है। यूरिया और अन्य उर्वरकों के उत्पादन में प्राकृतिक गैस महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
सरकार किसानों और उर्वरक क्षेत्र को समर्थन देने की नीति पर जोर देती रही है। ऐसे में महंगी LNG खरीदने के बावजूद गैस की सप्लाई बनाए रखना जरूरी हो जाता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे ऊर्जा कंपनियों के साथ-साथ सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च पर भी दबाव बढ़ सकता है।
BPCL ने भी स्पॉट मार्केट का रुख किया
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) भी इस सप्ताह स्पॉट मार्केट से LNG कार्गो खरीदने पर सहमत हुआ है। हालांकि, इन कार्गो के लिए भुगतान की गई कीमत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह संकेत देता है कि भारतीय ऊर्जा कंपनियां लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट के अलावा तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पॉट मार्केट पर निर्भरता बढ़ा रही हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
LNG की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के लिए कई स्तरों पर चुनौती बन सकती है। महंगी गैस से आयात बिल बढ़ सकता है और गैस आधारित बिजली उत्पादन की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, उर्वरक उद्योग के लिए महंगी गैस का मतलब सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव हो सकता है। यदि सप्लाई बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो एशियाई LNG खरीदारों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल भारत की ऊर्जा कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त LNG उपलब्ध कराना और बढ़ती वैश्विक कीमतों के असर को सीमित रखना है। ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति आने वाले समय में LNG बाजार की दिशा तय करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में शामिल रहेंगे।


