नई दिल्ली: भारत और जापान अपने द्विपक्षीय व्यापार को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। दोनों देश ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जिसके तहत भविष्य में आपसी व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है। प्रस्तावित लोकल करेंसी सेटलमेंट फ्रेमवर्क के जरिए भारतीय रुपये और जापानी येन में सीधे भुगतान और व्यापारिक लेनदेन संभव होगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत के दौरे पर आने वाली हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तकाइची के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
संयुक्त बयान में मिल सकता है बड़ा संकेत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने का उल्लेख किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह पहली बार होगा जब भारत और जापान अपने शीर्ष स्तर के आधिकारिक दस्तावेज में मुद्रा सहयोग को औपचारिक रूप से शामिल करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत बनाने के साथ-साथ डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
क्या है लोकल करेंसी सेटलमेंट फ्रेमवर्क?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भारत में मौजूद जापानी वित्तीय संस्थानों और गैर-निवासी जापानी संस्थाओं को भारतीय बैंकों में विशेष खाते खोलने की सुविधा मिल सकती है। इसके बाद दोनों देशों के बैंक अमेरिकी डॉलर की बजाय सीधे रुपये और येन में सीमा-पार भुगतान का निपटान कर सकेंगे।
इस व्यवस्था से कई फायदे मिलने की उम्मीद है, जैसे—
- विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत में कमी।
- डॉलर के माध्यम से भुगतान की आवश्यकता कम होना।
- रेमिटेंस शुल्क में कमी।
- तीसरे देशों के कॉरेस्पोंडेंट बैंकों पर निर्भरता घटाना।
- अंतरराष्ट्रीय भुगतान का समय कम होना।
RBI और जापान के वित्त मंत्रालय के बीच हो सकता है समझौता
रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान का वित्त मंत्रालय इस व्यवस्था को लागू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार को संस्थागत रूप देना है।
पहले से चल रही है भारत की रुपया ट्रेड व्यवस्था
भारत पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट (Special Rupee Vostro Account) व्यवस्था शुरू की थी, जिसके जरिए विदेशी व्यापार का भुगतान भारतीय रुपये में किया जा सकता है।
इसके बाद इस व्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ाया गया। विदेशी बैंकों और व्यापारिक साझेदार देशों को इस प्रणाली से जोड़ने के लिए कई भारतीय बैंकों को मंजूरी भी दी गई। RBI का मानना है कि इससे हार्ड करेंसी पर निर्भरता घटेगी और वैश्विक व्यापार में रुपये की स्वीकार्यता बढ़ेगी।
30 से ज्यादा देशों के साथ बढ़ चुका है दायरा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने दर्जनों व्यापारिक साझेदार देशों के लिए स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट की अनुमति दी है। इस व्यवस्था से विदेशी बैंक भारतीय बैंकों के माध्यम से रुपये में लेनदेन कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अधिशेष राशि को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में भी निवेश कर सकते हैं।
भारत अब इसी मॉडल को जापान जैसे बड़े रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के साथ और मजबूत बनाना चाहता है।
अगले दशक की साझेदारी का हिस्सा है यह पहल
स्थानीय मुद्रा में व्यापार का प्रस्ताव दोनों देशों द्वारा अपनाए गए ‘अगले दशक के लिए भारत-जापान संयुक्त विजन’ का हिस्सा माना जा रहा है। इस विजन का उद्देश्य व्यापार, निवेश, तकनीक, डिजिटल भुगतान, सप्लाई चेन और वित्तीय सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रुपये और येन में सीधा व्यापार शुरू होता है तो दोनों देशों की कंपनियों को भुगतान प्रक्रिया अधिक सरल और कम खर्चीली मिलेगी।
भारत-जापान व्यापार लगातार बढ़ रहा
भारत और जापान के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है, जबकि जापानी कंपनियां भारत के विनिर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं।
भारत में लगभग 1,400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं, जिनमें बड़ी संख्या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हुई है। वहीं जापान ने अगले दशक में भारत में निवेश को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।
समिट में इन मुद्दों पर भी रहेगी नजर
भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच केवल व्यापार ही नहीं बल्कि कई रणनीतिक विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इनमें—
- रक्षा सहयोग
- सेमीकंडक्टर निर्माण
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- ऑटोमोबाइल उद्योग
- मजबूत सप्लाई चेन
- मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक
- क्वाड सहयोग
जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
वैश्विक स्तर पर कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे समय में यदि भारत और जापान स्थानीय मुद्रा में व्यापार शुरू करते हैं तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही भुगतान की लागत घटेगी, विदेशी मुद्रा जोखिम कम होगा और भारतीय रुपये के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को भी नई गति मिल सकती है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में भारत अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ भी इसी तरह के स्थानीय मुद्रा व्यापार मॉडल को और विस्तार दे सकता है।


