HighLights
- केंद्र सरकार ने 40 प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क में छूट 15 जुलाई तक बढ़ाई।
- पहले यह राहत 30 जून 2026 को समाप्त होने वाली थी।
- प्लास्टिक, टेक्सटाइल, फार्मा और ऑटो सेक्टर को मिलेगा सीधा फायदा।
- पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई चेन जोखिम के बीच लिया गया फैसला।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए करीब 40 प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क (Import Duty) में दी गई छूट को 15 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह राहत पहले 30 जून 2026 तक ही लागू थी, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए सरकार ने इसे 15 दिन और बढ़ा दिया।
इस फैसले से उन उद्योगों को राहत मिलेगी जो कच्चे माल के लिए आयातित पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर निर्भर हैं। इनमें प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल और कई अन्य विनिर्माण उद्योग शामिल हैं।
सरकार ने किन उत्पादों पर बढ़ाई राहत?
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, करीब 40 महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट उत्पादों पर ड्यूटी राहत जारी रहेगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- एनहाइड्रस अमोनिया
- मेथनॉल
- टोल्यूनि (Toluene)
- स्टाइरीन
- विनाइल क्लोराइड मोनोमर (VCM)
- डाइक्लोरोमीथेन
- पॉलीब्यूटाडाइन
- स्टाइरीन ब्यूटाडाइन
- अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर रेजिन
इनका उपयोग प्लास्टिक उत्पाद, पैकेजिंग सामग्री, सिंथेटिक फाइबर, दवाइयां, पेंट, रबर, ऑटो पार्ट्स और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
30 जून को खत्म हो रही थी राहत
सरकार ने यह ड्यूटी छूट पहली बार 2 अप्रैल 2026 को अस्थायी राहत के रूप में लागू की थी। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर उसके असर को देखते हुए यह कदम उठाया गया था।
इसकी वैधता 30 जून को समाप्त हो रही थी, लेकिन सरकार ने मौजूदा हालात को देखते हुए इसे अब 15 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का फैसला किया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा और रसायन परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह की बाधा का असर कच्चे तेल, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ सकता है।
इसी वजह से सरकार ने उद्योगों को अतिरिक्त लागत से बचाने और उत्पादन गतिविधियों को प्रभावित होने से रोकने के लिए ड्यूटी राहत जारी रखने का निर्णय लिया है।
किन उद्योगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
आयात शुल्क में छूट बढ़ने से कई उद्योगों की लागत नियंत्रित रहेगी। इससे विशेष रूप से इन सेक्टरों को फायदा होगा—
- प्लास्टिक एवं पॉलिमर उद्योग
- पैकेजिंग उद्योग
- टेक्सटाइल और सिंथेटिक फाइबर उद्योग
- फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर
- स्पेशलिटी केमिकल्स
- ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स
- रबर और इंजीनियरिंग उत्पाद निर्माता
इन उद्योगों के लिए आयातित कच्चा माल सस्ता रहेगा, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने का खतरा कम होगा।
होर्मुज संकट का क्या असर पड़ा?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े सुरक्षा जोखिमों के कारण वैश्विक शिपिंग लागत में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
इसके चलते—
- कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बनी।
- उर्वरक और पेट्रोकेमिकल आयात महंगे हुए।
- कई औद्योगिक कच्चे माल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा।
- वैश्विक लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि हुई।
सरकार का मानना है कि ड्यूटी राहत जारी रखने से इन अतिरिक्त लागतों का असर घरेलू उद्योगों पर कम पड़ेगा।
सरकार के राजस्व लक्ष्य पर भी रहेगी नजर
हालांकि सरकार ने उद्योगों को राहत दी है, लेकिन कस्टम ड्यूटी से होने वाले राजस्व पर भी उसकी नजर बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र ने 2.71 ट्रिलियन रुपये का कस्टम राजस्व संग्रह लक्ष्य रखा है। पिछले वित्त वर्ष में यह संग्रह लगभग 2.64 ट्रिलियन रुपये रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो सरकार आगे ड्यूटी राहत की समीक्षा कर सकती है। फिलहाल प्राथमिकता घरेलू उद्योगों को कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है।


