मुंबई, 22 अप्रैल 2026: भारत के प्राथमिक बाजार (Primary Market) ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। National Stock Exchange (NSE) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान कंपनियों ने IPO के जरिए कुल 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए—जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक फंडरेजिंग आंकड़ा है। दिलचस्प बात यह है कि जहां मेनबोर्ड IPO में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, वहीं SME सेगमेंट में सुस्ती के संकेत भी सामने आए।
यह ट्रेंड केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भारत के कैपिटल मार्केट के बदलते ढांचे और निवेशकों की प्राथमिकताओं में आए बदलाव की कहानी भी कहता है।
219 कंपनियों की लिस्टिंग: निवेशकों का भरोसा बरकरार
NSE के आंकड़ों के मुताबिक FY26 में कुल 219 कंपनियां लिस्ट हुईं, जो किसी भी एक वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा है। इन कंपनियों ने मिलकर 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो यह दर्शाता है कि घरेलू और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।
यह भरोसा खास तौर पर मेनबोर्ड कंपनियों के प्रति अधिक दिखाई दिया। बड़े और स्थापित बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों में निवेशकों ने ज्यादा दिलचस्पी दिखाई, जिससे IPO का औसत आकार भी बढ़ा।
मेनबोर्ड IPO का दबदबा: रिकॉर्ड इश्यू और फंडरेजिंग
FY26 में मेनबोर्ड सेगमेंट ने IPO बाजार की दिशा तय की। कुल 108 मेनबोर्ड IPOs के जरिए करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए, जो इस सेगमेंट के लिए भी रिकॉर्ड है।
यह संकेत देता है कि बड़े कॉर्पोरेट और ग्रोथ-स्टेज कंपनियां अब सार्वजनिक बाजार से पूंजी जुटाने को लेकर अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। साथ ही, संस्थागत निवेशकों (institutional investors) की भागीदारी ने भी इन इश्यूज को मजबूती दी।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन ने मेनबोर्ड IPO को निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है।
SME IPO में गिरावट: क्या बदल रहा है निवेशकों का नजरिया?
जहां एक ओर मेनबोर्ड में तेजी रही, वहीं SME सेगमेंट में सुस्ती साफ दिखाई दी। FY26 में 111 SME IPOs लिस्ट हुए, जिनसे करीब 5,363 करोड़ रुपये जुटाए गए।
यह आंकड़े पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर हैं—
इश्यू की संख्या में 32% की गिरावट,
और जुटाई गई राशि में 25% की कमी दर्ज की गई।
इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। निवेशकों का झुकाव बड़े और अपेक्षाकृत सुरक्षित इश्यूज की ओर बढ़ा है। साथ ही, छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बाजार की अस्थिरता और वैल्यूएशन से जुड़े मुद्दे भी चुनौती बने हुए हैं।
IPO के बाद कंपनियों का असर: मार्केट कैप में बड़ा इजाफा
FY26 में लिस्ट हुई कंपनियों ने बाजार की कुल वैल्यू (market capitalisation) में भी बड़ा योगदान दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने मिलकर करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप जोड़ा।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि IPO केवल फंड जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि पूरे शेयर बाजार के विस्तार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
IPO से आगे: इक्विटी फंडरेजिंग के अन्य रास्ते भी सक्रिय
IPO के अलावा, कंपनियों ने अन्य तरीकों से भी पूंजी जुटाई। FY26 में कुल 2.4 लाख करोड़ रुपये इक्विटी फंडरेजिंग के जरिए जुटाए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 6% अधिक है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा Preferential Allotments का रहा, जो कुल का 54% था। इसके बाद Qualified Institutional Placements (QIP) और Rights Issues का योगदान रहा।
दिलचस्प बात यह है कि Preferential Allotments में 105% की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि Rights Issues में 172% का उछाल आया। इसके विपरीत QIP में 47% की गिरावट देखने को मिली, जो बाजार की बदलती रणनीतियों की ओर इशारा करता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती
FY26 के दौरान वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां सामने आईं—खासतौर पर पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता। इसके बावजूद भारत का IPO बाजार मजबूत बना रहा।
मार्च 2026 के आंकड़े इस मजबूती को और स्पष्ट करते हैं। केवल एक महीने में 9 मेनबोर्ड IPOs ने 8,056 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि 6 SME IPOs ने 242 करोड़ रुपये का फंडरेजिंग किया।
कुल मिलाकर मार्च 2026 में 8,297 करोड़ रुपये का IPO फंडरेजिंग हुआ, जो पिछले 6 वर्षों में मार्च महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
बड़ा ट्रेंड: निवेशकों का झुकाव कहां जा रहा है?
अगर पूरे डेटा को एक साथ देखा जाए, तो एक स्पष्ट ट्रेंड सामने आता है—निवेशक अब ज्यादा भरोसेमंद और बड़े इश्यूज की ओर झुक रहे हैं।
यह बदलाव कई कारणों से प्रेरित है:
- जोखिम से बचाव की मानसिकता (risk aversion)
- बेहतर रिटर्न की उम्मीद बड़े इश्यूज में
- संस्थागत निवेशकों की बढ़ती भूमिका
इसका मतलब यह नहीं कि SME सेगमेंट खत्म हो रहा है, बल्कि यह एक “रीसेट फेज” में हो सकता है, जहां गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
भारत के कैपिटल मार्केट के लिए क्या संकेत?
FY26 का यह रिकॉर्ड फंडरेजिंग भारत के कैपिटल मार्केट की गहराई और परिपक्वता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि भारतीय कंपनियां अब विकास के लिए घरेलू बाजार पर अधिक भरोसा कर रही हैं।
साथ ही, यह विदेशी निवेशकों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है कि भारत एक स्थिर और आकर्षक निवेश गंतव्य बना हुआ है।
निष्कर्ष: रिकॉर्ड के पीछे बदलती कहानी
1.8 लाख करोड़ रुपये का IPO फंडरेजिंग एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी और भी महत्वपूर्ण है। यह कहानी है—बदलते निवेश पैटर्न, मजबूत मेनबोर्ड कंपनियों के उभार और SME सेक्टर के पुनर्संतुलन की।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या SME सेगमेंट फिर से गति पकड़ता है या बाजार का फोकस बड़े इश्यूज पर ही केंद्रित रहता है।
फिलहाल इतना साफ है कि भारत का IPO बाजार केवल आकार में ही नहीं, बल्कि संरचना और परिपक्वता में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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