भारत में तेजी से बढ़ रही अमीरों की आबादी
भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है और इसका असर देश के संपन्न वर्ग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गुरुवार को जारी कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों (High Net Worth Individuals-HNWI) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
Highlights
- भारत में हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (HNWI) की संख्या 2025 में 3% बढ़कर करीब 3.9 लाख हुई
- कुल वित्तीय संपत्ति 4.6% बढ़कर 1.64 ट्रिलियन डॉलर पहुंची
- निवेशकों का झुकाव AI आधारित वेल्थ मैनेजमेंट और वैकल्पिक निवेशों की ओर बढ़ा
- वैश्विक HNWI संपत्ति 98.3 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
- मजबूत शेयर बाजार और तकनीकी कंपनियों की तेजी से करोड़पतियों की संख्या में बड़ा इजाफा
रिपोर्ट बताती है कि भारत में HNWI आबादी सालाना आधार पर लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 3.9 लाख के करीब पहुंच गई। वहीं इन लोगों की कुल वित्तीय संपत्ति 4.6 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.64 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में संपत्ति निर्माण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि, कॉर्पोरेट मुनाफे में सुधार, बढ़ते शेयर बाजार और तकनीकी क्षेत्र में निवेश ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
HNWI कौन होते हैं?
हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (HNWI) उन व्यक्तियों को कहा जाता है जिनके पास मुख्य निवास संपत्ति को छोड़कर निवेश योग्य परिसंपत्तियों का मूल्य कम से कम 10 लाख डॉलर (लगभग 8.5 करोड़ रुपये) या उससे अधिक होता है।
इस वर्ग में बड़े उद्योगपति, सफल उद्यमी, निवेशक, पेशेवर और कॉर्पोरेट जगत के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।
निवेश के तरीके तेजी से बदल रहे हैं
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि भारत के अमीर निवेशकों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। पारंपरिक निवेश विकल्पों के अलावा अब वे व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार निवेश रणनीति तैयार कर रहे हैं।
पहले जहां निवेशकों का बड़ा हिस्सा केवल रियल एस्टेट, सोना या पारंपरिक शेयरों पर निर्भर रहता था, वहीं अब वे नई तकनीकों और आधुनिक वित्तीय समाधानों की ओर बढ़ रहे हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- AI आधारित वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म
- प्राइवेट इक्विटी फंड
- वैकल्पिक निवेश फंड (AIF)
- ग्लोबल इक्विटी निवेश
- फैमिली ऑफिस संरचनाएं
- टेक्नोलॉजी आधारित पोर्टफोलियो प्रबंधन
विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निवेश सलाह और डेटा एनालिटिक्स निवेशकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रहे हैं।
भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि का असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दरों में शामिल है।
इस वृद्धि को मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों ने समर्थन दिया:
- विनिर्माण (Manufacturing)
- सेवा क्षेत्र (Services)
- डिजिटल अर्थव्यवस्था
- बुनियादी ढांचा निवेश
- वित्तीय सेवाएं
जब अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो कॉर्पोरेट कंपनियों का मुनाफा बढ़ता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और शेयर बाजार को भी फायदा मिलता है। यही कारण है कि संपन्न निवेशकों की संपत्ति में भी वृद्धि देखने को मिली।
जापान और चीन में भी तेजी
एशिया-प्रशांत क्षेत्र वर्ष 2025 में दुनिया का सबसे तेज संपत्ति वृद्धि वाला क्षेत्र बनकर उभरा।
रिपोर्ट के अनुसार:
- एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुल संपत्ति 10.5% बढ़ी
- HNWI आबादी 9.4% बढ़ी
जापान और चीन ने इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान दिया।
जापान
जापान में वर्ष 2025 के दौरान 4.36 लाख नए करोड़पति जुड़े।
चीन
चीन में 1.54 लाख नए करोड़पति जुड़े।
भारत
भारत में लगभग 11,300 नए HNWI जुड़े।
ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया में करीब 18,100 नए HNWI दर्ज किए गए।
यह आंकड़े बताते हैं कि एशियाई अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक संपत्ति निर्माण का नया केंद्र बनती जा रही हैं।
शेयर बाजार बना सबसे बड़ा धन निर्माता
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर में करोड़पतियों की संख्या बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका शेयर बाजार ने निभाई।
तकनीकी कंपनियों, विशेषकर AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इसके कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी वृद्धि हुई।
महंगाई दर में कमी और ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी इक्विटी बाजारों को मजबूती दी।
परिणामस्वरूप:
- वैश्विक करोड़पतियों की संख्या लगभग 20 लाख बढ़ी
- कुल HNWI आबादी 2.53 करोड़ तक पहुंच गई
- वैश्विक संपत्ति 98.3 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई
यह वर्ष 2018 के बाद एक साल में दर्ज की गई सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है।
सबसे ज्यादा फायदा किसे हुआ?
रिपोर्ट बताती है कि संपत्ति वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ अति उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों (Ultra HNWI) को मिला।
इन निवेशकों के पास आम तौर पर:
- बड़े शेयर पोर्टफोलियो
- निजी कंपनियों में हिस्सेदारी
- प्राइवेट इक्विटी निवेश
- वैश्विक निवेश परिसंपत्तियां
ज्यादा होती हैं।
यही कारण है कि बाजार में तेजी का फायदा सबसे अधिक इन्हें मिला।
संपत्ति अभी भी कुछ लोगों के पास केंद्रित
हालांकि करोड़पतियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर भी संकेत करती है।
दुनिया के शीर्ष 1 प्रतिशत HNWI के पास कुल उच्च संपत्ति वाली संपत्ति का 34.8 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है।
इसका मतलब है कि वैश्विक स्तर पर संपत्ति का बड़ा हिस्सा अभी भी बहुत कम लोगों के हाथों में केंद्रित है।
यह आर्थिक असमानता को लेकर नई बहस को जन्म देता है।
अमेरिका अब भी सबसे आगे
उत्तर अमेरिका में HNWI आबादी 9.1 प्रतिशत बढ़ी।
सबसे मजबूत प्रदर्शन अमेरिका का रहा जहां:
- 7.36 लाख नए करोड़पति जुड़े
- HNWI आबादी 9.2 प्रतिशत बढ़ी
- कुल संख्या 87 लाख तक पहुंच गई
यह दुनिया में सबसे अधिक है।
अमेरिकी तकनीकी कंपनियों और AI क्षेत्र में भारी निवेश ने वहां के निवेशकों की संपत्ति को तेजी से बढ़ाया।
निवेश पोर्टफोलियो में क्या बदलाव आया?
जनवरी 2026 तक HNWI निवेश पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए।
शेयरों की हिस्सेदारी
- बढ़कर 25% हुई
- पिछले वर्ष की तुलना में 3% अधिक
बॉन्ड निवेश
- बढ़कर 20% हुआ
- पिछले वर्ष से 2% अधिक
विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत कॉर्पोरेट आय, तकनीकी क्षेत्र की तेजी और बेहतर रिटर्न ने निवेशकों को इक्विटी और बॉन्ड दोनों की ओर आकर्षित किया।
NewsJagran Analysis
भारत में अमीरों की संख्या बढ़ना केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है बल्कि यह देश के निवेश माहौल में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत भी है। अब निवेशक केवल संपत्ति बचाने की बजाय उसे तेजी से बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों और AI आधारित समाधानों का उपयोग कर रहे हैं।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो रहा है कि आने वाले वर्षों में वेल्थ मैनेजमेंट उद्योग, प्राइवेट इक्विटी, फैमिली ऑफिस और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म का महत्व और बढ़ेगा।
हालांकि संपत्ति निर्माण की यह रफ्तार सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन संपत्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण आर्थिक असमानता की चुनौती को भी सामने लाता है। नीति निर्माताओं के लिए यह संतुलन बनाए रखना आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
कैपजेमिनी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारत में अमीरों की संख्या और उनकी संपत्ति दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। मजबूत आर्थिक वृद्धि, शेयर बाजार की तेजी, AI आधारित निवेश और नए वित्तीय उत्पाद इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था इसी गति से आगे बढ़ती रही तो आने वाले वर्षों में देश वैश्विक संपत्ति निर्माण के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल हो सकता है।


