भारत के व्यापार ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। NITI Aayog की ताज़ा “Trade Watch Quarterly” रिपोर्ट के अनुसार, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वाले देशों के साथ भारत का व्यापार हिस्सा बढ़कर 28.8% तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2006 में महज 4.6% था, जो पिछले दो दशकों में भारत की बदलती व्यापार रणनीति को साफ दर्शाता है।
हालांकि, इस सकारात्मक ट्रेंड के साथ एक बड़ी चिंता भी सामने आई है—भारत का एक्सपोर्ट अभी भी सीमित सेक्टर्स, खासकर ज्वेलरी पर काफी हद तक निर्भर है।
FTA पार्टनर्स का बढ़ता प्रभाव: क्या बदल रहा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, FTA देशों के साथ बढ़ता व्यापार यह संकेत देता है कि भारत अब ग्लोबल वैल्यू चेन में ज्यादा गहराई से जुड़ रहा है।
इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं:
- नए व्यापार समझौते
- सप्लाई चेन का पुनर्गठन
- एशिया और यूरोप के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते
FTA पार्टनर्स अब भारत के लिए केवल ट्रेड पार्टनर नहीं, बल्कि “ग्रोथ इंजन” बनते जा रहे हैं।
ज्वेलरी सेक्टर पर ज्यादा निर्भरता: जोखिम क्यों?
रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता भारत के एक्सपोर्ट बास्केट को लेकर जताई गई है।
- गोल्ड और प्लैटिनम ज्वेलरी में भारी कंसंट्रेशन
- ग्लोबल डिमांड कुछ ही प्रोडक्ट्स तक सीमित
- एक्सपोर्ट डाइवर्सिफिकेशन की कमी
इसका मतलब यह है कि अगर इन प्रोडक्ट्स की डिमांड में गिरावट आती है, तो भारत के एक्सपोर्ट पर सीधा असर पड़ सकता है।
डायमंड इंडस्ट्री: मजबूत स्थिति, लेकिन चुनौतियां भी
भारत दुनिया में “worked diamonds” यानी प्रोसेस्ड डायमंड्स के मामले में मजबूत स्थिति रखता है।
लेकिन रिपोर्ट यह भी बताती है कि:
- कच्चे हीरों (raw diamonds) के लिए भारत आयात पर निर्भर है
- वैल्यू चेन में यह एक बड़ी कमजोरी है
इससे साफ है कि भारत का प्रभुत्व पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि आंशिक रूप से आयात पर आधारित है।
बदलता ट्रेंड: पॉलिश्ड डायमंड्स vs गोल्ड ज्वेलरी
रिपोर्ट के अनुसार ज्वेलरी सेक्टर के भीतर भी बदलाव दिख रहा है:
- पॉलिश्ड डायमंड्स का हिस्सा 2020 के 60% से घटा
- गोल्ड ज्वेलरी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है
यह ट्रेंड ग्लोबल मार्केट की बदलती पसंद और निवेश पैटर्न को दर्शाता है।
कुल व्यापार में वृद्धि, लेकिन घाटा बरकरार
भारत का कुल मर्चेंडाइज और सर्विसेज ट्रेड FY26 (अप्रैल–दिसंबर) के दौरान:
- 5.3% की सालाना वृद्धि के साथ 1.37 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा
- लेकिन 34.3 बिलियन डॉलर का ट्रेड डेफिसिट भी दर्ज हुआ
यह बताता है कि ग्रोथ के बावजूद संतुलन अभी भी चुनौती बना हुआ है।
प्रोडक्ट लेवल पर असमान प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार:
- ज्यादातर प्रोडक्ट्स में भारत की हिस्सेदारी या तो स्थिर रही या घटी
- केवल सिल्वर (raw और semi-processed) में सुधार देखा गया
यह असमानता दर्शाती है कि भारत को अपने एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की जरूरत है।
विश्लेषण: आगे का रास्ता क्या?
यह रिपोर्ट एक साफ संदेश देती है:
- FTA से जुड़ाव बढ़ाना सही दिशा है
- लेकिन एक्सपोर्ट डाइवर्सिफिकेशन बेहद जरूरी है
- वैल्यू एडिशन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ानी होगी
अगर भारत केवल कुछ सेक्टर्स पर निर्भर रहेगा, तो वैश्विक उतार-चढ़ाव का असर ज्यादा होगा।
निष्कर्ष
NITI Aayog की रिपोर्ट बताती है कि भारत का व्यापार तेजी से बदल रहा है और FTA पार्टनर्स इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं।
लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट है कि ज्वेलरी सेक्टर पर अत्यधिक निर्भरता एक जोखिम है।
लंबे समय में टिकाऊ ग्रोथ के लिए भारत को अपने एक्सपोर्ट बास्केट को विविध बनाना होगा और वैल्यू चेन में ऊपर बढ़ना होगा।
Also Read:


