भारत का बड़ा कदम, कई देशों से आने वाले सस्ते आयात पर कड़ा प्रहार
भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को सस्ते आयात से बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने चार रसायनों और लौह-इस्पात से जुड़े उत्पादों पर लागू डंपिंग रोधी (Anti-Dumping Duty) शुल्क की अवधि बढ़ा दी है। इसके अलावा पहली बार ऑस्ट्रेलिया, चीन, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जापान और रूस से आयात होने वाले ‘लो ऐश मेटलर्जिकल कोक’ पर भी पांच वर्षों के लिए नया डंपिंग रोधी शुल्क लगाया गया है।
सरकार का मानना है कि विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार में बेहद कम कीमत पर सामान बेच रही थीं, जिससे घरेलू उद्योगों को नुकसान हो रहा था। इसी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
Highlights
- भारत ने चार उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि बढ़ाई।
- लो ऐश मेटलर्जिकल कोक पर पहली बार नया एंटी-डंपिंग शुल्क लागू।
- चीन, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया समेत छह देशों से आयात प्रभावित।
- घरेलू उद्योगों को सस्ते विदेशी आयात से मिलेगी सुरक्षा।
- डंपिंग रोधी शुल्क 42.95 डॉलर से 128.83 डॉलर प्रति टन तक तय।
किन उत्पादों पर बढ़ाया गया डंपिंग रोधी शुल्क?
वित्त मंत्रालय की अधिसूचनाओं के अनुसार निम्नलिखित उत्पादों पर पहले से लागू डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि बढ़ा दी गई है—
- अनट्रीटेड फ्यूम्ड सिलिका (Untreated Fumed Silica)
- एरिलाइड्स (Arylides)
- सीमलेस ट्यूब, पाइप और खोखले स्टील प्रोफाइल
- नॉर्मल ब्यूटेनॉल (Normal Butanol)
इन उत्पादों का उपयोग पेंट, केमिकल, कॉस्मेटिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्रिंटिंग इंक और स्टील उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
मेटलर्जिकल कोक पर नया शुल्क
सरकार ने लो ऐश मेटलर्जिकल कोक पर पहली बार डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है। यह कोक मुख्य रूप से इस्पात उद्योग में ऊष्मा स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
यह शुल्क निम्न देशों से आयात पर लागू होगा—
- चीन
- ऑस्ट्रेलिया
- जापान
- रूस
- इंडोनेशिया
- कोलंबिया
सरकार ने इस पर 42.95 डॉलर प्रति टन से लेकर 128.83 डॉलर प्रति टन तक डंपिंग रोधी शुल्क तय किया है। यह शुल्क अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
किन देशों से हो रही थी डंपिंग?
सरकारी जांच में पाया गया कि—
- चीन की कुछ कंपनियां फ्यूम्ड सिलिका, एरिलाइड्स और स्टील उत्पाद बेहद कम कीमत पर भारत में बेच रही थीं।
- मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका से नॉर्मल ब्यूटेनॉल भी कम दामों पर आयात किया जा रहा था।
- इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही थी और उत्पादन पर असर पड़ रहा था।
कब तक लागू रहेगा शुल्क?
सरकार की अधिसूचना के अनुसार—
| उत्पाद | शुल्क लागू रहने की अवधि |
|---|---|
| अनट्रीटेड फ्यूम्ड सिलिका | 10 फरवरी 2027 तक |
| एरिलाइड्स | 13 जनवरी 2027 तक |
| सीमलेस स्टील ट्यूब एवं पाइप | 27 जनवरी 2027 तक |
| नॉर्मल ब्यूटेनॉल | अगले 5 वर्ष |
| लो ऐश मेटलर्जिकल कोक | अगले 5 वर्ष |
किसकी सिफारिश पर लिया गया फैसला?
यह निर्णय वाणिज्य मंत्रालय के व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। इसके बाद वित्त मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की, जबकि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने इसे लागू किया।
डीजीटीआर विदेशी कंपनियों द्वारा डंपिंग की जांच करता है और यदि घरेलू उद्योग को नुकसान का खतरा पाया जाता है तो सरकार को डंपिंग रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश करता है।
क्या होता है डंपिंग रोधी शुल्क?
डंपिंग रोधी शुल्क (Anti-Dumping Duty) वह अतिरिक्त कर होता है जो किसी विदेशी कंपनी द्वारा उत्पाद को उसकी वास्तविक कीमत से कम दाम पर बेचने की स्थिति में लगाया जाता है।
इसका उद्देश्य—
- घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना।
- विदेशी कंपनियों द्वारा अनुचित प्रतिस्पर्धा रोकना।
- बाजार में निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था बनाए रखना।
- भारतीय निर्माताओं को समान अवसर उपलब्ध कराना।
WTO के नियमों के तहत उठाया गया कदम
भारत और जिन देशों पर यह शुल्क लगाया गया है, वे सभी विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य हैं। WTO के नियम सदस्य देशों को यह अधिकार देते हैं कि यदि किसी देश से सस्ते आयात के कारण घरेलू उद्योग प्रभावित हो रहा हो, तो उचित जांच के बाद एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया जा सकता है।
पहले भी उठाए जा चुके हैं ऐसे कदम
भारत पहले भी चीन सहित कई देशों से आने वाले सस्ते आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क लगा चुका है। सरकार का कहना है कि इस तरह के कदमों का उद्देश्य आयात रोकना नहीं, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना और भारतीय उद्योगों को अनुचित व्यापारिक दबाव से बचाना है।
निष्कर्ष
भारत सरकार का यह फैसला घरेलू रसायन और इस्पात उद्योग के लिए राहत भरा माना जा रहा है। डंपिंग रोधी शुल्क बढ़ने से विदेशी कंपनियों द्वारा बेहद कम कीमत पर होने वाले आयात पर अंकुश लगेगा, जिससे भारतीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में इसका असर स्टील, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है।


