गर्मी आते ही आम का सीजन शुरू हो जाता है और बाजारों में “आम” की भरमार देखने को मिलती है। लेकिन इसी के साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ा होता है—केमिकल से पकाए गए आम।
हाल ही में Hyderabad में एक बड़ी कार्रवाई के दौरान करीब 200 किलो कृत्रिम रूप से पकाए गए आम जब्त किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि तय सीमा से ज्यादा “इथिलीन रिपनर” का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।
यह घटना केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है।
क्या मिला जांच में? पूरा मामला समझिए

जांच एजेंसियों को मौके से “Diamond Ripe – Ethylene Ripener” के 25 सैशे मिले, जिनका इस्तेमाल आम को जल्दी पकाने के लिए किया जा रहा था।
नियम के अनुसार:
- 20 किलो आम के लिए अधिकतम 5 सैशे इस्तेमाल किए जा सकते हैं
- लेकिन आरोपी 6 सैशे प्रति ट्रे इस्तेमाल कर रहा था
यानी तय सीमा से ज्यादा केमिकल का उपयोग किया जा रहा था, जिससे स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ सकता है।
इस मामले में खाद्य मिलावट और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने के तहत केस दर्ज किया गया है।
FSSAI की गाइडलाइन: क्या सही और क्या गलत?

Food Safety and Standards Authority of India ने फलों को पकाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं।
क्या पूरी तरह बैन है?
- कैल्शियम कार्बाइड (Carbide gas)
- एसीटिलीन गैस
ये दोनों गैसें स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं और इनका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
क्या इस्तेमाल किया जा सकता है?
- इथिलीन गैस (Ethylene gas)
- अधिकतम 100 ppm तक
इथिलीन एक प्राकृतिक हार्मोन है, जो फलों को प्राकृतिक रूप से पकने में मदद करता है। सही मात्रा में इसका उपयोग सुरक्षित माना जाता है।
महत्वपूर्ण नियम
- इथिलीन का सीधा संपर्क फल से नहीं होना चाहिए
- केवल प्रमाणित स्रोतों से ही फल खरीदें
- भरोसेमंद विक्रेताओं को प्राथमिकता दें
केमिकल से पके आम पहचानने के 8 आसान तरीके (घर पर टेस्ट)

अब सबसे जरूरी सवाल—आप कैसे पहचानें कि आम असली है या केमिकल से पका हुआ?
1. रंग पर ध्यान दें
कृत्रिम रूप से पके आम अक्सर बहुत ज्यादा एक जैसे पीले या नारंगी दिखते हैं।
प्राकृतिक आम का रंग थोड़ा असमान होता है।
2. खुशबू से पहचानें
- प्राकृतिक आम में मीठी और ताजी खुशबू होती है
- केमिकल वाले आम में हल्की अजीब या केमिकल जैसी गंध हो सकती है
3. दबाकर देखें
- बहुत ज्यादा नरम या गूदेदार आम से बचें
- केमिकल से पके आम जल्दी सॉफ्ट हो जाते हैं
4. बाहरी दाग-धब्बे
अगर आम पर अजीब धब्बे या इंजेक्शन जैसे निशान दिखें, तो सावधान हो जाएं।
5. पानी वाला टेस्ट
एक बाल्टी पानी में आम डालें:
- अगर डूब जाए → सामान्य (संभावित प्राकृतिक)
- अगर तैर जाए → शक की संभावना
6. बेकिंग सोडा टेस्ट
- पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाएं
- आम को 15-20 मिनट डुबोकर रखें
अगर धोने के बाद रंग बदलता है, तो केमिकल होने की संभावना है।
7. स्वाद से पहचान
- प्राकृतिक आम मीठा और संतुलित स्वाद देता है
- केमिकल आम में अजीब या फीका स्वाद हो सकता है
8. माचिस टेस्ट (सावधानी जरूरी)
कुछ लोग माचिस जलाकर जांच करते हैं, लेकिन यह तरीका जोखिम भरा है।
इसे घर पर करने से बचना ही बेहतर है।
केमिकल से पके आम से क्या नुकसान हो सकता है?

कैल्शियम कार्बाइड जैसे केमिकल्स से पकाए गए फल कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं:
- पेट दर्द और उल्टी
- सिरदर्द और चक्कर
- लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा
बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
क्या करें और क्या न करें (Consumer Guide)
✔ हमेशा भरोसेमंद दुकानदार से खरीदें
✔ बहुत चमकीले और एक जैसे रंग वाले आम से बचें
✔ घर लाकर अच्छी तरह धोकर ही खाएं
❌ सस्ते के चक्कर में संदिग्ध फल न खरीदें
❌ बिना जांच के ज्यादा मात्रा में स्टॉक न करें
निष्कर्ष: सावधानी ही सुरक्षा है

Hyderabad की यह घटना दिखाती है कि बाजार में मिलावट का खतरा अभी भी मौजूद है।
Food Safety and Standards Authority of India के नियम उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए हैं, लेकिन जागरूक रहना हमारी जिम्मेदारी है।
अगर आप थोड़ी सावधानी बरतें और इन आसान तरीकों को अपनाएं, तो आप अपने परिवार को केमिकल वाले फलों से बचा सकते हैं।
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