HDFC Mid Cap Fund Direct Growth: म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि के निवेश का फायदा कंपाउंडिंग के जरिए मिलता है। सही स्कीम में लंबे समय तक निवेश किया जाए तो छोटी रकम भी समय के साथ बड़ा कॉर्पस बना सकती है। HDFC Mid Cap Fund Direct Growth इसका एक उदाहरण है। HDFC Mutual Fund के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस स्कीम के Direct Plan की शुरुआत 1 जनवरी 2013 को हुई थी और इसका since-inception CAGR करीब 20.25% रहा है।
₹10 लाख का निवेश बन गया होता ₹1.25 करोड़
अगर जनवरी 2013 के आसपास HDFC Mid Cap Fund Direct Growth में ₹10 लाख का एकमुश्त निवेश किया गया होता और उसे लंबे समय तक बनाए रखा जाता, तो कंपाउंडिंग के प्रभाव से निवेश की वैल्यू कई गुना बढ़ सकती थी। उपलब्ध ऐतिहासिक NAV और रिटर्न के आधार पर इस निवेश की वैल्यू करीब ₹1.25 करोड़ के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ₹1.25 लाख करोड़ का आंकड़ा गलत है। सही रकम ₹1.25 करोड़ है। वास्तविक वैल्यू निवेश की तारीख, NAV और कैलकुलेशन की तारीख के आधार पर थोड़ी अलग हो सकती है।
मिडकैप कंपनियों में मुख्य रूप से करता है निवेश
HDFC Mid Cap Fund एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जिसका मुख्य फोकस मिडकैप कंपनियों पर रहता है। HDFC Mutual Fund के अनुसार, स्कीम में कम से कम 65% निवेश मिडकैप शेयरों में रखने की रणनीति है।
मिडकैप कंपनियां आमतौर पर बड़ी कंपनियों की तुलना में ज्यादा ग्रोथ क्षमता रख सकती हैं, लेकिन इनके शेयरों में उतार-चढ़ाव भी अधिक देखने को मिल सकता है। इसलिए ऐसे फंड में निवेश करते समय निवेशक को बाजार के जोखिम और लंबी निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
Direct Plan की शुरुआत 2013 में हुई
HDFC Mid Cap Fund की मूल स्कीम की शुरुआत 25 जून 2007 को हुई थी, जबकि इसका Direct Plan-Growth Option 1 जनवरी 2013 को शुरू हुआ। HDFC Mutual Fund के स्कीम डॉक्यूमेंट में भी दोनों तारीखों का उल्लेख किया गया है।
Direct Plan में निवेशक सीधे म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करता है, इसलिए इसमें Regular Plan की तुलना में डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन नहीं होता। इसी वजह से Direct Plan का खर्च अनुपात आमतौर पर कम होता है और लंबी अवधि में इसका असर रिटर्न पर पड़ सकता है।
लंबी अवधि में 20% से ज्यादा CAGR
HDFC Mutual Fund की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, HDFC Mid Cap Fund Direct Plan का since-inception CAGR करीब 20.25% है। वहीं फंड के 5 साल का रिटर्न करीब 20.69% और 10 साल का रिटर्न करीब 18.56% बताया गया है।
हालांकि, इन आंकड़ों को भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन बाजार की स्थिति, कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।
कंपाउंडिंग ने बनाया बड़ा कॉर्पस
लंबी अवधि के निवेश में कंपाउंडिंग सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर में से एक है। जब निवेश पर मिलने वाला रिटर्न दोबारा निवेश में जुड़ता रहता है, तो समय के साथ रिटर्न पर भी रिटर्न मिलना शुरू हो जाता है।
यही वजह है कि लंबी अवधि में 15-20% के आसपास का CAGR भी निवेश की रकम को कई गुना बढ़ा सकता है। हालांकि, इक्विटी म्यूचुअल फंड में इस तरह का रिटर्न हर साल समान नहीं रहता और कुछ वर्षों में नकारात्मक रिटर्न भी मिल सकता है।
फंड का रिस्क लेवल ‘Very High’
HDFC Mid Cap Fund का Riskometer Very High है। इसका मतलब है कि इस फंड में निवेश बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकता है।
इसलिए यह फंड उन निवेशकों के लिए ज्यादा उपयुक्त हो सकता है जिनकी निवेश अवधि लंबी है और जो बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं। कम अवधि में पैसों की जरूरत वाले निवेशकों को केवल पिछले रिटर्न देखकर इस तरह के फंड में निवेश करने से बचना चाहिए।
क्या आपको इस फंड में निवेश करना चाहिए?
किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश का फैसला सिर्फ उसके पुराने रिटर्न के आधार पर नहीं करना चाहिए। निवेशक को अपना वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और मौजूदा पोर्टफोलियो देखकर फैसला करना चाहिए।
HDFC Mid Cap Fund ने लंबी अवधि में मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन Past Performance is not indicative of future returns। मिडकैप फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया रखना चाहिए और बाजार में गिरावट के दौरान घबराकर निवेश निकालने से बचने की रणनीति पर विचार करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले स्कीम के दस्तावेज पढ़ें और जरूरत पड़ने पर SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से सलाह लें।


