केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन से पहले देश के करोड़ों किसानों को बड़ा आर्थिक तोहफा दिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में 2026-27 खरीफ मार्केटिंग सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने धान समेत 14 खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोतरी की है, जिससे किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा।
सरकार के मुताबिक इस फैसले से किसानों को करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होने का अनुमान है। यह कदम ऐसे समय आया है जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर सरकार का फोकस बढ़ा है।
नई दिल्ली में हुई कैबिनेट बैठक के बाद जारी जानकारी के अनुसार सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि MSP उत्पादन लागत से कम से कम 50 फीसदी ज्यादा रहे। यही नीति पिछले कुछ वर्षों से सरकार की कृषि रणनीति का अहम हिस्सा बनी हुई है।
धान का MSP बढ़कर ₹2441 प्रति क्विंटल
💠 #Cabinet approves Scheme for Promotion of Surface Coal/Lignite Gasification Projects with a financial outlay of Rs.37,500 crore
💠 The Scheme marks a major step towards accelerating India’s coal/lignite gasification programme, advancing the national target of gasifying 100… pic.twitter.com/M69rdgOWlS
— PIB India (@PIB_India) May 13, 2026 सरकार ने सामान्य धान (Common Paddy) का MSP 72 रुपये बढ़ाकर 2,441 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। पिछले सीजन में यह 2,369 रुपये प्रति क्विंटल था। वहीं A-ग्रेड धान का MSP बढ़ाकर 2,461 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।
धान देश की सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल मानी जाती है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में करोड़ों किसान इसकी खेती करते हैं। ऐसे में MSP में बढ़ोतरी का सीधा असर ग्रामीण आय और कृषि बाजार पर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धान के MSP में बढ़ोतरी का मकसद केवल किसानों को राहत देना नहीं, बल्कि ग्रामीण मांग को भी मजबूत करना है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी बढ़ने से ट्रैक्टर, खाद, बीज, FMCG और उपभोक्ता सामानों की मांग पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
किन फसलों में हुई सबसे ज्यादा बढ़ोतरी?

सरकार ने इस बार कुछ विशेष फसलों पर ज्यादा फोकस किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सबसे बड़ी MSP बढ़ोतरी सूरजमुखी बीज में की गई है।
MSP में प्रमुख बढ़ोतरी
- सूरजमुखी बीज: ₹622 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- कपास: ₹557 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- नाइजर बीज: ₹515 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- तिल: ₹500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार तिलहन और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। भारत अभी भी खाद्य तेलों के आयात पर भारी खर्च करता है। ऐसे में सूरजमुखी, तिल और अन्य तिलहन फसलों के MSP में बड़ी बढ़ोतरी किसानों को इनकी खेती के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
MSP आखिर क्यों महत्वपूर्ण है?
न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP वह न्यूनतम दर होती है जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदने की गारंटी देती है। इसका उद्देश्य किसानों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति से सुरक्षा देना होता है।
अगर बाजार में फसल का दाम MSP से नीचे चला जाए तो सरकारी एजेंसियां किसानों से तय कीमत पर खरीद करती हैं। इससे किसानों को न्यूनतम आय सुरक्षा मिलती है।
भारत में MSP केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील मुद्दा माना जाता है। खासकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्यों में MSP कृषि व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
2.60 लाख करोड़ रुपये का होगा भुगतान
सरकार का अनुमान है कि खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 में किसानों को MSP के जरिए करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये का भुगतान होगा। यह रकम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़े कैश फ्लो के रूप में देखी जा रही है।
आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक सालाना खरीद लगभग 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने की संभावना है। इससे सरकारी खरीद एजेंसियों पर भी बड़ा वित्तीय दबाव आएगा, लेकिन सरकार इसे किसानों की आय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मान रही है।
उत्पादन लागत से 50% ज्यादा MSP का क्या मतलब?
🔰#Cabinet approves increase in the Minimum Support Prices (MSP) for 14 Kharif Crops for Marketing Season 2026-27
🔰 Government has increased the MSP of Kharif Crops for Marketing Season 2026-27, to ensure remunerative prices to the growers for their produce
🔰 The highest… pic.twitter.com/XLlB6TM3Nl
— PIB India (@PIB_India) May 13, 2026 सरकार ने कहा है कि MSP तय करते समय यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को उत्पादन लागत से कम से कम 50 फीसदी ज्यादा रिटर्न मिले।
यह फार्मूला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाता है। इसमें बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई और अन्य लागतों को ध्यान में रखा जाता है।
हालांकि कुछ किसान संगठनों का कहना है कि वास्तविक लागत इससे ज्यादा होती है और MSP निर्धारण में व्यापक लागत (C2 लागत) को पूरी तरह शामिल नहीं किया जाता। यह बहस पिछले कई वर्षों से जारी है।
सरकार की रणनीति क्या संकेत दे रही है?
विशेषज्ञों के मुताबिक MSP बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े आर्थिक और राजनीतिक कारण हो सकते हैं।
1. ग्रामीण मांग को बढ़ावा
शहरी अर्थव्यवस्था की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च की रफ्तार धीमी रही है। MSP बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी बढ़ सकती है।
2. तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर फोकस
भारत खाद्य तेलों का बड़ा आयातक है। सरकार चाहती है कि किसान तिलहन फसलों की खेती बढ़ाएं।
3. कृषि आय को स्थिर करना
मौसम जोखिम, महंगाई और बाजार अस्थिरता के बीच MSP किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
4. राजनीतिक महत्व
कृषि और MSP देश की राजनीति में बेहद प्रभावशाली मुद्दा रहे हैं। ऐसे में MSP बढ़ोतरी को ग्रामीण वोट बैंक से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
कोयला गैसीकरण योजना को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में केवल MSP ही नहीं, बल्कि 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को भी मंजूरी दी गई।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करना है। इस योजना का उद्देश्य आयातित प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर भारत की निर्भरता कम करना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह योजना सफल होती है तो ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है और घरेलू कोयले का comparatively cleaner इस्तेमाल संभव हो पाएगा।
किसानों और बाजार पर क्या होगा असर?
MSP बढ़ने का सीधा फायदा किसानों की आय पर पड़ सकता है। हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे खाद्य मुद्रास्फीति पर कुछ दबाव भी आ सकता है।
अगर सरकारी खरीद बड़े स्तर पर होती है तो खाद्य सब्सिडी बिल भी बढ़ सकता है। दूसरी ओर ग्रामीण मांग मजबूत होने से FMCG, ट्रैक्टर, उर्वरक और कृषि उपकरण कंपनियों को फायदा मिल सकता है।
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