दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार (24 जुलाई) को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना 2,000 रुपये टूटकर 1,47,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि चांदी 5,000 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने में कमजोरी देखने को मिली, जिसकी प्रमुख वजह मुनाफावसूली और घरेलू बाजार में कमजोर खरीदारी मानी जा रही है।
हालांकि घरेलू बाजार में गिरावट के विपरीत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों में मजबूती देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतों में नरमी और वैश्विक आर्थिक संकेतों ने बुलियन को सहारा दिया है।
दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना-चांदी के ताजा भाव
24 जुलाई के कारोबार में बुलियन बाजार में निम्नलिखित भाव दर्ज किए गए:
| धातु | पिछला भाव | नया भाव | बदलाव |
|---|---|---|---|
| 24 कैरेट सोना | ₹1,49,200 | ₹1,47,200 प्रति 10 ग्राम | ₹2,000 की गिरावट |
| चांदी | ₹2,29,700 | ₹2,24,700 प्रति किलोग्राम | ₹5,000 की गिरावट |
बाजार जानकारों के अनुसार हाल के दिनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे घरेलू कीमतों पर दबाव बना।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों चढ़े
घरेलू बाजार में गिरावट के बावजूद वैश्विक बुलियन मार्केट में तेजी देखने को मिली।
- स्पॉट गोल्ड बढ़कर 4,063 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया।
- स्पॉट सिल्वर लगभग 2 फीसदी की तेजी के साथ 58.59 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने 58 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर पार कर लिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और निवेशकों की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की मांग बढ़ने से आई।
ब्रेंट क्रूड की गिरावट बनी बड़ी वजह
मिरै एसेट शेयरखान के कमोडिटीज प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड करीब 12 प्रतिशत तक चढ़ा था, लेकिन शुक्रवार को इसमें लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों का रुझान दोबारा सोने की ओर बढ़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन को समर्थन मिला।
मध्यपूर्व तनाव पर बनी हुई है नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अभी भी वैश्विक बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, यदि कच्चे तेल की कीमतें फिर तेजी से बढ़ती हैं तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकता है। ऐसी स्थिति में सोने पर दबाव भी देखने को मिल सकता है।
आगे सोना और चांदी कितना बढ़ सकते हैं?
कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च विशेषज्ञ एवीबी कायनात चेनवाला के अनुसार यदि:
- ब्रेंट क्रूड की तेजी थमती है,
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आती है,
- और डॉलर इंडेक्स कमजोर होता है,
तो सोना और चांदी दोनों में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
उनका अनुमान है कि आने वाले समय में:
- सोना 4,100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
- चांदी 60 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू सकती है।
शेयर बाजार पर भी दिखा असर
मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक लगातार पांचवें कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुए।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें दोबारा तेजी पकड़ती हैं तो इससे महंगाई बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में वैश्विक केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति अपना सकते हैं, जिसका असर सोने और अन्य निवेश विकल्पों पर भी पड़ेगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
फिलहाल घरेलू बाजार में सोना और चांदी सस्ते हुए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी इस बात का संकेत देती है कि आने वाले दिनों में कीमतों में फिर उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और मध्यपूर्व के घटनाक्रम पर लगातार नजर रखनी चाहिए। अल्पकाल में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जबकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए हर गिरावट खरीदारी का अवसर साबित हो सकती है।


