Sergey Brin Yacht Dragonfly: गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन की लग्जरी सुपरयॉट Dragonfly अपनी विशाल लंबाई, अत्याधुनिक तकनीक और शानदार सुविधाओं के कारण खास चर्चा में रहती है। करीब 466 फीट यानी 142 मीटर लंबी इस यॉट का आकार इतना बड़ा है कि इसे सामान्य मरीना के फ्यूल स्टेशन पर ईंधन भराना संभव नहीं होता। इसके लिए बड़े कमर्शियल फ्यूल टर्मिनल की जरूरत पड़ती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2024 में तैयार हुई इस सुपरयॉट की कीमत करीब 450 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹4,250 करोड़ बताई जाती है। हाल ही में Gibraltar Yachting के एक वीडियो में Dragonfly को जिब्राल्टर के कमर्शियल बंकरिंग टर्मिनल के पास देखा गया। यहां बड़े जहाजों को पाइपलाइन के जरिए ईंधन उपलब्ध कराया जाता है।
13 घंटे तक चल सकती है फ्यूलिंग प्रक्रिया
जिब्राल्टर के Western Arm टर्मिनल का संचालन Gib Oil करता है। यहां पाइपलाइन के जरिए जहाजों में अधिकतम करीब 80 मीट्रिक टन प्रति घंटे की दर से ईंधन पहुंचाने की क्षमता बताई जाती है।
इसी क्षमता के आधार पर अगर Dragonfly में करीब 1,000 टन ईंधन भरा जाए, तो इसे भरने में लगभग 12.5 घंटे लग सकते हैं। व्यावहारिक तौर पर यह समय यॉट की जरूरत और उस समय उपलब्ध फ्यूलिंग क्षमता पर निर्भर करेगा। यही वजह है कि इतनी बड़ी सुपरयॉट को पूरी तरह ईंधन भराने में करीब 13 घंटे तक का समय लग सकता है।
जिब्राल्टर के फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर में 18 टैंक बताए जाते हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 3,200 मीट्रिक टन मरीन गैस ऑयल और ऑटोमोटिव गैस ऑयल की है। इसके अलावा एक अलग सुविधा में लगभग 13,350 मीट्रिक टन मरीन गैस ऑयल स्टोर करने की क्षमता बताई गई है।
1000 टन डीजल की कीमत करीब ₹14 करोड़
Dragonfly जैसी विशाल यॉट के लिए ईंधन की जरूरत भी असाधारण रूप से बड़ी हो सकती है। अगर इसमें 500 टन ईंधन भरा जाए, तो यह करीब 5.81 लाख लीटर डीजल के बराबर होगा।
जिब्राल्टर में मरीन गैस ऑयल की अनुमानित कीमत 1,380 से 1,440 डॉलर प्रति मीट्रिक टन मानने पर 500 टन ईंधन की कीमत लगभग 6.9 लाख से 7.2 लाख डॉलर यानी करीब ₹6.5 करोड़ से ₹6.8 करोड़ हो सकती है।
वहीं, अगर 1,000 मीट्रिक टन ईंधन भरा जाए तो करीब 11.6 लाख लीटर डीजल की जरूरत होगी। इसकी अनुमानित कीमत 13.8 लाख से 14.4 लाख डॉलर तक पहुंच सकती है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब ₹13 करोड़ से ₹14 करोड़ बैठती है।
यानी सिर्फ एक बार यॉट में 1,000 टन ईंधन भरने का खर्च ही करोड़ों रुपये में पहुंच सकता है।
60 बड़े टैंकरों जितना ईंधन
1,000 टन यानी करीब 11.6 लाख लीटर ईंधन की मात्रा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर इसे सड़क के रास्ते पहुंचाना हो तो लगभग 60 टैंकरों की जरूरत पड़ सकती है।
यदि एक टैंकर की क्षमता 20,000 लीटर मानी जाए, तो 11.6 लाख लीटर ईंधन पहुंचाने के लिए करीब 58 टैंकरों की जरूरत होगी। व्यावहारिक लॉजिस्टिक्स को देखते हुए यह संख्या करीब 60 टैंकर तक पहुंच सकती है।
इतनी बड़ी मात्रा में ईंधन की सप्लाई सड़क के जरिए करना मुश्किल और समय लेने वाला काम होगा। इसलिए Dragonfly जैसी सुपरयॉट के लिए कमर्शियल फ्यूल टर्मिनल से सीधे पाइपलाइन के जरिए ईंधन लेना ज्यादा सुविधाजनक विकल्प है।
सिर्फ यॉट नहीं, समुद्र में चलता-फिरता लग्जरी कॉम्प्लेक्स
Dragonfly को सिर्फ एक विशाल यॉट कहना इसके आकार और सुविधाओं को पूरी तरह बयां नहीं करता। करीब 9,408 ग्रॉस टन की इस सुपरयॉट में लग्जरी के साथ अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
यह यॉट डीजल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम से संचालित होती है। इसके दोनों इंजन मिलकर इसे करीब 24 नॉट की अधिकतम रफ्तार तक पहुंचाने में सक्षम बताए जाते हैं।
इसके पांच डेक पर कई तरह की लग्जरी सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें ग्लास-बॉटम स्विमिंग पूल, स्पा, जिम, गेम्स रूम, सिनेमा, ब्यूटी सैलून और लिफ्ट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा यॉट में गैली, रेफ्रिजरेशन और लॉन्ड्री की सुविधाएं भी हैं। लंबी समुद्री यात्राओं को ध्यान में रखते हुए इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम के साथ पानी बनाने और कचरे के निपटारे की व्यवस्था भी मौजूद है।
यॉट पर टेंडर्स और हेलिकॉप्टर ऑपरेशन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध है।
Dragonfly को आम मरीना में क्यों नहीं मिलती जगह?
मरीना समुद्र या नदी के किनारे बनाया गया ऐसा स्थान होता है जहां बोट, यॉट और अन्य छोटे जहाजों को खड़ा करने, उनकी सर्विसिंग और कई बार ईंधन भरने की सुविधा होती है।
लेकिन Dragonfly का आकार सामान्य लग्जरी यॉट से काफी बड़ा है। करीब 142 मीटर लंबी इस सुपरयॉट को सामान्य मरीना में खड़ा करना संभव नहीं होता। इसे बड़े पोर्ट या कमर्शियल हार्बर की सुविधाओं की जरूरत पड़ती है।
यही वजह है कि Dragonfly जैसी सुपरयॉट के लिए फ्यूलिंग भी किसी सामान्य नाव की तरह नहीं होती। हजारों नहीं तो सैकड़ों टन के स्तर पर ईंधन की जरूरत होने के कारण इसके लिए बड़े कमर्शियल बंकरिंग टर्मिनल और पाइपलाइन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।
सर्गेई ब्रिन की यह सुपरयॉट इस बात का उदाहरण है कि दुनिया की सबसे महंगी निजी नौकाओं में सिर्फ लग्जरी ही नहीं, बल्कि उनका संचालन और रखरखाव भी अपने आप में बेहद बड़ा और महंगा ऑपरेशन होता है।


