Gold Price Prediction 2026: सोने की कीमतों में हाल के दिनों में जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। एक तरफ गोल्ड अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है, वहीं दूसरी ओर दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इसकी कीमतों को लेकर लंबी अवधि में तेजी का अनुमान जताया जा रहा है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के अंत तक सोने की कीमत को लेकर अपना अनुमान पेश किया है।
2026 के अंत तक 4,900 डॉलर तक पहुंच सकता है सोना
गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। मौजूदा करीब 4,550 डॉलर प्रति औंस के स्तर से तुलना करें तो यह लगभग 8 फीसदी की संभावित बढ़त है।
भारतीय बाजार में अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर रुपये की विनिमय दर, आयात लागत, टैक्स और स्थानीय मांग जैसे कई कारकों के जरिए दिखाई देता है। इसलिए डॉलर में दिए गए इस अनुमान को सीधे भारतीय बाजार के 10 ग्राम सोने के भाव के बराबर नहीं माना जा सकता।
सोने में अचानक क्यों आई बड़ी गिरावट?
सोने के लिए 2026 अब तक बेहद उतार-चढ़ाव वाला साल रहा है। हाल के सत्रों में अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदले संकेतों ने बुलियन मार्केट पर दबाव बढ़ाया है।
28 अगस्त को अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के जैक्सन होल भाषण के बाद महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ी। निवेशकों को ब्याज दरों के रुख में सख्ती की आशंका हुई, जिसके बाद सोने में तेज बिकवाली देखने को मिली।
सोने की कीमतों पर ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो बिना ब्याज देने वाली संपत्ति के रूप में सोने की आकर्षकता कम हो सकती है। इसके उलट दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर सोने को समर्थन मिल सकता है।
जनवरी में रिकॉर्ड हाई, फिर 4,000 डॉलर से नीचे आया भाव
2026 में सोने ने निवेशकों को जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिखाया है। 29 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी।
इसके बाद कीमतों में बड़ी गिरावट आई और जुलाई के मध्य तक सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से भी नीचे चला गया। हालांकि, निचले स्तरों से इसमें फिर मजबूत रिकवरी देखने को मिली और इसके बाद कीमतों में लगभग 15 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई।
यही वजह है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद बाजार की नजर इस बात पर है कि सोना आने वाले महीनों में फिर अपने रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ता है या नहीं।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी सोने की बड़ी ताकत
सोने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेतों में से एक दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। पिछले कुछ वर्षों में कई केंद्रीय बैंकों ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है।
भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशों ने भी सोने की मांग को समर्थन दिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद केंद्रीय बैंकों के रिजर्व मैनेजमेंट में सोने की भूमिका पर खास तौर पर ध्यान बढ़ा है।
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के विश्लेषकों के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की सोना खरीदने की प्रवृत्ति कोई कुछ महीनों की कहानी नहीं, बल्कि एक मल्टी-ईयर ट्रेंड हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, 2022 से पहले केंद्रीय बैंकों की औसत मासिक सोना खरीद करीब 17 टन थी। इसके मुकाबले 2026 में औसतन लगभग 50 टन प्रति माह खरीद की उम्मीद जताई गई है। जून 2026 में खरीदारी का आंकड़ा करीब 100 टन तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।
चीन समेत बड़े देशों की खरीदारी पर नजर
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर बड़े देश लगातार अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को लंबी अवधि में सपोर्ट मिल सकता है।
हालांकि, सिर्फ केंद्रीय बैंक की खरीदारी के आधार पर सोने की दिशा तय नहीं होती। अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरें, ETF में निवेश और वैश्विक जोखिम की धारणा भी कीमतों को प्रभावित करती है।
क्या 4,900 डॉलर का अनुमान पार कर सकता है सोना?
गोल्डमैन सैक्स का 4,900 डॉलर प्रति औंस का अनुमान मौजूदा परिस्थितियों में एक महत्वपूर्ण स्तर है। लेकिन बाजार में तेजी या गिरावट कई परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
अगर अमेरिकी ब्याज दरों में स्थिरता रहती है और गोल्ड ETF में निवेशकों की मांग फिर मजबूत होती है, तो सोने के लिए तेजी का माहौल बन सकता है। ऐसे में 4,900 डॉलर का स्तर हासिल करना संभव हो सकता है और मजबूत निवेश मांग की स्थिति में कीमत इसके ऊपर भी जा सकती है।
इसके विपरीत, अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला करता है या लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति अपनाता है, तो सोने में एक और तेज करेक्शन देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत है?
सोने में हाल की गिरावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि इसकी लंबी अवधि की तेजी खत्म हो गई है। इसी तरह, सिर्फ 4,900 डॉलर के अनुमान के आधार पर यह मान लेना भी उचित नहीं है कि सोना निश्चित रूप से रिकॉर्ड बनाएगा।
निवेशकों को सोने की कीमत के साथ अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF फ्लो पर भी नजर रखनी चाहिए।
फिलहाल गोल्ड मार्केट के सामने तस्वीर दोतरफा है। ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने के लिए चुनौती बन सकते हैं, जबकि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक जोखिम और निवेश मांग इसकी कीमत को ऊपर ले जाने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: सोने की कीमतों के ये अनुमान बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और विश्लेषण पर आधारित हैं। वास्तविक कीमत इससे काफी अलग हो सकती है। सोने में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना उचित है।


