Gold Import India: भारत में सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, लेकिन सोने के आयात का पैटर्न अब बदलता नजर आ रहा है। भारतीय आयातकों और ज्वैलर्स का रुख पारंपरिक सप्लायर स्विट्जरलैंड से हटकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर बढ़ रहा है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान UAE से भारत आने वाले सोने के आयात में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
Highlights
- UAE से भारत के गोल्ड-बार आयात में 47.1% की बढ़ोतरी हुई।
- अप्रैल-जून 2026 में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया।
- पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 7.49 अरब डॉलर था।
- स्विट्जरलैंड जैसे पारंपरिक सप्लायर्स से सोने की खरीद में गिरावट आई।
- इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी रही।
भारत के लिए सोने का नया रास्ता बना UAE
भारत में सोने की खपत काफी ज्यादा है और ज्वैलरी से लेकर निवेश तक इसकी लगातार मांग बनी रहती है। हालांकि, अब भारत के गोल्ड इंपोर्ट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक भारत के प्रमुख गोल्ड सप्लायर्स में शामिल रहा स्विट्जरलैंड अब पीछे होता दिखाई दे रहा है, जबकि UAE की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।
दुबई को लंबे समय से दुनिया के प्रमुख गोल्ड ट्रेडिंग सेंटर में गिना जाता है। यहां सोने का बड़ा कारोबार होने के साथ-साथ भारत के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध भी हैं। ऐसे में भारतीय आयातकों के लिए UAE से सोना मंगाने का विकल्प पहले के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
अप्रैल-जून में 47.1% बढ़ा गोल्ड इंपोर्ट
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत का गोल्ड-बार आयात सालाना आधार पर 47.1% बढ़कर 11.01 अरब डॉलर पहुंच गया।
एक साल पहले अप्रैल-जून 2025 के दौरान भारत ने करीब 7.49 अरब डॉलर का गोल्ड-बार आयात किया था। यानी एक साल के भीतर आयात के मूल्य में काफी बड़ा उछाल आया है।
यह तेजी ऐसे समय में आई है जब सोने की कीमतें ऊंचे स्तरों पर बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत में गोल्ड की मांग कमजोर नहीं पड़ी।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद भी नहीं घटी मांग
भारत में सोने के आयात पर कस्टम ड्यूटी में बदलाव भी इस दौरान चर्चा में रहा। 13 मई को सोने पर कस्टम ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने के बावजूद आयात में बड़ी तेजी देखने को मिली।
आमतौर पर आयात शुल्क बढ़ने से घरेलू बाजार में सोने की कीमत बढ़ सकती है और मांग पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन इस मामले में तस्वीर कुछ अलग रही। भारतीय बाजार में सोने की मांग मजबूत बनी रही और अप्रैल-जून तिमाही में गोल्ड इंपोर्ट में 47% से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई।
स्विट्जरलैंड से क्यों घट रही सोने की खरीद?
स्विट्जरलैंड लंबे समय से दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड रिफाइनिंग और ट्रेडिंग केंद्रों में से एक रहा है और भारत के लिए भी यह महत्वपूर्ण सोना सप्लायर रहा है। लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय आयातकों की खरीदारी का एक हिस्सा अब UAE की ओर शिफ्ट हो रहा है।
इसके पीछे वैश्विक गोल्ड ट्रेड में UAE की मजबूत स्थिति, दुबई का प्रमुख ट्रेडिंग हब होना और भारत-UAE के बीच व्यापारिक संबंधों को अहम वजह माना जा सकता है।
भारतीय ज्वैलर्स और आयातक ऐसे बाजारों पर ध्यान दे रहे हैं जहां से सोने की सप्लाई, ट्रेडिंग और लॉजिस्टिक्स को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके। इसी वजह से UAE की भूमिका भारतीय गोल्ड मार्केट में तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
दुबई क्यों बन रहा है भारतीय ज्वैलर्स की पसंद?
दुबई लंबे समय से सोने के कारोबार के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां गोल्ड ट्रेडिंग का मजबूत नेटवर्क मौजूद है और भारत के साथ इसका व्यापारिक जुड़ाव भी काफी गहरा है।
भारतीय कारोबारियों के लिए UAE सिर्फ एक सप्लायर नहीं, बल्कि ग्लोबल गोल्ड मार्केट से जुड़ने वाला एक महत्वपूर्ण ट्रेडिंग हब भी है। यही वजह है कि स्विट्जरलैंड जैसे पारंपरिक स्रोतों के मुकाबले UAE से आने वाली सोने की खेप में तेजी देखने को मिल रही है।
भारत में सोने की मांग बनी हुई है मजबूत
सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में इसकी मांग कई कारणों से बनी रहती है। ज्वैलरी की खरीद के अलावा सोने को भारतीय परिवारों में पारंपरिक बचत और निवेश के विकल्प के तौर पर भी देखा जाता है।
शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन के दौरान इसकी मांग में और तेजी आ सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में भारत के गोल्ड इंपोर्ट पर नजर रखना इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा कि आयात की मात्रा के साथ-साथ सप्लाई का स्रोत किस तरह बदलता है।
क्या बदला है भारत के गोल्ड इंपोर्ट में?
कुल मिलाकर, भारत के गोल्ड इंपोर्ट की कहानी अब सिर्फ बढ़ती मांग तक सीमित नहीं है। सोने की सप्लाई का स्रोत भी बदल रहा है। अप्रैल-जून 2026 में कुल गोल्ड-बार आयात में 47.1% की तेजी और UAE से बढ़ती सप्लाई इस बदलाव की ओर इशारा करती है।
जहां कभी स्विट्जरलैंड भारत के लिए प्रमुख गोल्ड सप्लायर रहा, वहीं अब दुबई और UAE की भूमिका तेजी से मजबूत हो रही है। अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो भारत के गोल्ड ट्रेड में UAE की हिस्सेदारी आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।


