नई दिल्ली | 29 अप्रैल 2026 दुनिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इस समय एक जटिल और दबाव भरे दौर से गुजर रही है। International Organisation of Motor Vehicle Manufacturers के अध्यक्ष Shailesh Chandra ने कहा है कि ट्रेड टेंशन, सप्लाई चेन की अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
उन्होंने यह बात Beijing Motor Show के दौरान OICA की ग्लोबल ऑटो सेल्स रिपोर्ट जारी करते समय कही।
क्या बदल रहा है ग्लोबल ऑटो सेक्टर में?
Shailesh Chandra के अनुसार, आज की ऑटो इंडस्ट्री केवल कार बेचने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कई बड़े बदलावों से गुजर रही है:
- टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव (EV, AI, connected cars)
- जियोपॉलिटिकल दबाव (देशों के बीच तनाव और नीतियां)
- अलग-अलग देशों की नीतियों में अंतर
इन सभी फैक्टर्स ने इंडस्ट्री को पहले से ज्यादा “डायनेमिक और अनिश्चित” बना दिया है।
ग्रोथ है, लेकिन बराबर नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक:
- ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री में कुल मिलाकर ग्रोथ देखने को मिल रही है
- लेकिन यह ग्रोथ समान रूप से नहीं बंटी
कुछ क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ मार्केट्स में गिरावट भी दर्ज की गई है।
NewsJagran Analysis: असली चुनौती क्या है?
1. सप्लाई चेन अभी भी कमजोर
कोविड के बाद से:
- चिप शॉर्टेज
- लॉजिस्टिक्स में देरी
ये समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
2. ऊर्जा कीमतों का दबाव
ईंधन और ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से:
- प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रही है
- EV ट्रांजिशन भी महंगा हो रहा है
3. ट्रेड वॉर और नीतिगत टकराव
देशों के बीच:
- आयात-निर्यात नियम
- टैरिफ और सब्सिडी
कंपनियों के लिए ग्लोबल प्लानिंग मुश्किल बना रहे हैं।
भारत के लिए क्या मतलब?
Shailesh Chandra, जो Society of Indian Automobile Manufacturers के अध्यक्ष और Tata Motors Passenger Vehicles Ltd के MD & CEO भी हैं, के मुताबिक:
भारत एक ग्रोथ मार्केट बना हुआ है
लेकिन:
- ग्लोबल चुनौतियों का असर यहां भी पड़ेगा
- खासकर EV और निर्यात रणनीतियों पर
आगे क्या?
आने वाले समय में ऑटो कंपनियों को:
- सप्लाई चेन मजबूत करनी होगी
- नई टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ाना होगा
- और अलग-अलग देशों की नीतियों के अनुसार रणनीति बनानी होगी
निष्कर्ष
International Organisation of Motor Vehicle Manufacturers की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि ऑटो इंडस्ट्री अब एक ट्रांसफॉर्मेशन फेज में है।
जो कंपनियां तेजी से बदलेंगी, वही आगे टिक पाएंगी — बाकी के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
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