भारत में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करती है तो इससे करीब ₹1 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है। वित्त मंत्री ने देश को मौजूदा वैश्विक संकट के बीच “3F” यानी Fuel, Fertilizer और Forex पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
नई दिल्ली में Small Industries Development Bank of India (SIDBI) की 37वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत को बाहरी चुनौतियों के बावजूद डर और निराशा फैलाने वाली मानसिकता से बचना होगा। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
आखिर क्यों अहम है वित्त मंत्री का यह बयान?
सीतारमण का बयान ऐसे समय आया है जब देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले 10 दिनों में ईंधन की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी रही। सोमवार को पेट्रोल करीब ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हुआ। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाद्य पदार्थ, दूध, सब्जियां, ऑनलाइन डिलीवरी और बस-कैब किराए तक महंगे हो सकते हैं। भारत में अधिकांश सामान सड़क मार्ग से सप्लाई होता है, इसलिए डीजल की कीमत बढ़ने का असर पूरी सप्लाई चेन पर दिखाई देता है।
3F यानी Fuel, Fertilizer और Forex पर क्यों है सरकार का फोकस?
वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में भारत को तीन बड़े मोर्चों पर सतर्क रहने की जरूरत है:
1. Fuel (ईंधन)
मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव की वजह से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो रही है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के आयात बिल और घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं, एयरलाइन टिकट महंगे हो सकते हैं, महंगाई दर बढ़ सकती है, सरकार पर सब्सिडी का दबाव बढ़ सकता है.
2. Fertilizer (उर्वरक)
सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की कीमतें “अकल्पनीय स्तर” तक पहुंच गई हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश यूरिया और अन्य उर्वरकों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर करता है।
अगर उर्वरक महंगे होते हैं तो किसानों की लागत बढ़ती है, खेती महंगी होती है, खाद्यान्न कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, सरकार की सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है विशेषज्ञों के अनुसार रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक फर्टिलाइजर मार्केट में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
3. Forex (विदेशी मुद्रा)
विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिरता भी सरकार के लिए बड़ी चिंता है। कच्चा तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।
हाल के महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी देखी गई, सोने के आयात बिल में बढ़ोतरी हुई, विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव बढ़ा अगर डॉलर लगातार मजबूत रहता है तो भारत का आयात बिल और बढ़ सकता है। इसका असर इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पादों और कई आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
एक्साइज ड्यूटी घटाने में सरकार क्यों हिचक रही है?
पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत है। वित्त मंत्री ने साफ कहा कि अगर सरकार बड़ी राहत देती है तो करीब ₹1 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
यह पैसा सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण योजनाओं, सब्सिडी, रक्षा खर्च, सामाजिक योजनाओं में इस्तेमाल करती है। यही वजह है कि सरकार कीमतों पर पूरी तरह टैक्स कम करने के बजाय संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि सरकार पहले भी कुछ राहत दे चुकी है पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाकर ₹3 प्रति लीटर की गई, डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह हटाई गई लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में नई तेजी ने फिर दबाव बढ़ा दिया है।
“भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता”
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि कुछ लोग मौजूदा वैश्विक संकट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं और ऐसा माहौल बना रहे हैं जैसे देश की अर्थव्यवस्था टूट रही हो। उन्होंने कहा कि वास्तविकता इससे अलग है।
सीतारमण ने कहा:
“भारत डर फैलाने का जोखिम नहीं उठा सकता। हमें अपने शब्दों और कामों से लोगों में भरोसा पैदा करना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि चुनौतियां मुख्य रूप से बाहरी कारणों से पैदा हुई हैं और भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
पीएम मोदी की अपील का भी किया जिक्र
वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील का भी समर्थन किया जिसमें लोगों से गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने की बात कही गई थी। सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में वित्तीय अनुशासन जरूरी है।
MSME सेक्टर को लेकर भी जताई चिंता
कार्यक्रम में सीतारमण ने MSME सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या — लेट पेमेंट — पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि MSME का करीब ₹8.1 लाख करोड़ भुगतान अभी भी अटका हुआ है, जिससे छोटे उद्योगों की वर्किंग कैपिटल प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकारी कंपनियों और बड़े उद्योगों से अपील की कि वे 45 दिनों के भीतर MSME का भुगतान सुनिश्चित करें।
होर्मुज स्ट्रेट संकट से क्यों बढ़ी चिंता?
28 फरवरी से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बाद होर्मुज स्ट्रेट के आसपास अस्थिरता बनी हुई है। दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है।
अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है तो वैश्विक तेल कीमतें और बढ़ सकती हैं, भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, महंगाई और तेज हो सकती है इसी वजह से सरकार फिलहाल 3F रणनीति पर विशेष फोकस कर रही है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर ईंधन कीमतों में तेजी जारी रहती है तो पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है, सब्जियां और रोजमर्रा का सामान महंगा हो सकता है, महंगाई दर में बढ़ोतरी हो सकती है, EMI और ब्याज दरों पर भी दबाव बन सकता है हालांकि सरकार फिलहाल स्थिति को “कंट्रोल में” बता रही है और कह रही है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।
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