Highlights
- जर्मनी की B+H Solutions GmbH भारत में 10 लाख यूरो निवेश करेगी
- कंपनी को भारत में मिला ‘नैनो पंजीकरण’
- तांबा और चांदी आधारित नैनो-फर्टिलाइजर तकनीक पर फोकस
- फसलों की इम्यूनिटी बढ़ाने और रोग कम करने का दावा
- भारतीय बाजार में कंपनी के 8 उत्पाद पहले से मौजूद
नई दिल्ली। भारतीय कृषि क्षेत्र तेजी से नई तकनीकों की ओर बढ़ रहा है और अब खेती में नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी बढ़ने लगा है। इसी बीच जर्मनी की कृषि प्रौद्योगिकी कंपनी B+H Solutions GmbH ने भारत में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा है कि वह साल 2026 तक भारत में 10 लाख यूरो यानी करीब 11.09 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
यह निवेश ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में पारंपरिक उर्वरकों के विकल्प के तौर पर नैनो-फर्टिलाइजर और एडवांस एग्री-टेक सॉल्यूशंस की मांग तेजी से बढ़ रही है। खास बात यह है कि कंपनी की तकनीक सामान्य नैनो यूरिया से अलग है और इसमें तांबे तथा चांदी के नैनोकणों का इस्तेमाल किया जाता है।
भारत क्यों बना जर्मन कंपनी के लिए बड़ा बाजार?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि बाजारों में शामिल है। यहां करोड़ों किसान खेती पर निर्भर हैं और उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने भी नैनो उर्वरकों और टिकाऊ खेती को बढ़ावा दिया है।
B+H Solutions GmbH भारत में अपनी सहायक कंपनी ‘Dr. Hanish Agri Solutions India Private Limited’ के जरिए काम कर रही है, जिसकी स्थापना 2022 में की गई थी। कंपनी का कहना है कि भारत में किसानों के बीच एडवांस नैनो उत्पादों के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और यही वजह है कि वह यहां अपने कारोबार का विस्तार करना चाहती है।
कंपनी की महाप्रबंधक और मुख्य विज्ञान अधिकारी (CSO) डॉ. लॉरा वीलर के मुताबिक, हाल ही में कंपनी को उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) के तहत ‘नैनो पंजीकरण’ मिला है। यह मंजूरी मिलने के बाद कंपनी भारतीय बाजार में बड़े स्तर पर उतरने की तैयारी कर रही है।
पारंपरिक नैनो यूरिया से कितनी अलग है यह तकनीक?
भारत में फिलहाल नैनो यूरिया और नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों की चर्चा ज्यादा होती है, लेकिन B+H Solutions की तकनीक इससे अलग है। कंपनी के उत्पादों में मुख्य रूप से धातु आधारित नैनोकणों का इस्तेमाल होता है। इनमें तांबा (Copper) और चांदी (Silver) के सूक्ष्म कण शामिल हैं। कंपनी इसे “Fertilizer Plus” कैटेगरी में रखती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, धातु आधारित नैनो टेक्नोलॉजी पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती है। इससे फसलों पर फंगस और अन्य बीमारियों का असर कम हो सकता है। हालांकि, बड़े स्तर पर इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग कृषि वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं।
फसलों को क्या फायदा हो सकता है?
कंपनी का दावा है कि उसके उत्पाद पौधों की प्राकृतिक इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही ये पौध संरक्षण एजेंट की तरह भी काम करते हैं।
अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो किसानों को कई फायदे मिल सकते हैं फसलों में रोग का दबाव कम हो सकता है, उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना, पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घट सकती है मिट्टी की गुणवत्ता पर कम असर पड़ सकता है, कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने की संभावना. हालांकि कृषि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी नई तकनीक के लंबे समय के असर का आकलन जरूरी होता है। इसलिए किसानों को वैज्ञानिक सलाह के साथ ही इन उत्पादों का उपयोग करना चाहिए।
भारत में नैनो फर्टिलाइजर बाजार क्यों बढ़ रहा है?
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से नैनो उर्वरकों को बढ़ावा दे रही है। इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव (IFFCO) द्वारा लॉन्च किए गए नैनो यूरिया के बाद इस सेक्टर में कई निजी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कृषि क्षेत्र में “Precision Farming” और “Smart Agriculture” का महत्व बढ़ेगा। ऐसे में नैनो टेक्नोलॉजी आधारित उत्पादों की मांग भी बढ़ सकती है।
इसके पीछे कई कारण हैं बढ़ती खाद लागत, मिट्टी की खराब होती गुणवत्ता, जलवायु परिवर्तन का असर, कम जमीन में ज्यादा उत्पादन की जरूरत, टिकाऊ खेती की बढ़ती मांग.
कंपनी के कौन-कौन से उत्पाद भारत में मौजूद हैं?
B+H Solutions का कहना है कि उसके आठ उत्पाद पहले से भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें ‘AgroBeez’ नाम का उत्पाद प्रमुख है।
कंपनी के मुताबिक, इसे भारतीय मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भारत जैसे विविध जलवायु वाले देश में अलग-अलग फसलों के लिए विशेष समाधान तैयार करना बड़ी चुनौती माना जाता है। इसी वजह से विदेशी कंपनियां अब भारत के लिए लोकलाइज्ड एग्रीकल्चर सॉल्यूशंस पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
क्या भारतीय किसानों के लिए बदल सकता है खेती का तरीका?
अगर धातु आधारित नैनो-फर्टिलाइजर तकनीक बड़े स्तर पर सफल साबित होती है, तो यह भारतीय खेती के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकती है।
आज भी देश के कई हिस्सों में किसान अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में कम मात्रा में असरदार तकनीक किसानों की लागत घटाने में मदद कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई कृषि तकनीक को अपनाने से पहले फील्ड ट्रायल, सरकारी मान्यता, वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय परिस्थितियों का परीक्षण बहुत जरूरी होता है।
भारतीय कृषि बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत का कृषि बाजार तेजी से टेक्नोलॉजी आधारित हो रहा है। ड्रोन स्प्रेइंग, स्मार्ट सिंचाई, AI आधारित खेती और नैनो टेक्नोलॉजी जैसी चीजें अब खेती का हिस्सा बन रही हैं। ऐसे में विदेशी कंपनियों का निवेश यह दिखाता है कि भारतीय कृषि क्षेत्र वैश्विक कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बन चुका है। आने वाले वर्षों में नैनो-फर्टिलाइजर बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
अगर यह तकनीक किसानों के बीच सफल रहती है, तो इससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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