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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: FSSAI Raid: खाने-पीने की चीजों में मिले जिंदा कीड़े, फंगस और चूहे की बीट, FSSAI ने 2 कंपनियों के लाइसेंस किए सस्पेंड
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FSSAI Raid: खाने-पीने की चीजों में मिले जिंदा कीड़े, फंगस और चूहे की बीट, FSSAI ने 2 कंपनियों के लाइसेंस किए सस्पेंड

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/09 at 2:23 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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12 Min Read
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FSSAI Action on Food Companies: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य सुरक्षा नियमों की गंभीर अनदेखी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की दो खाद्य कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जांच के दौरान एक कंपनी के परिसर में पिस्ता में जिंदा कीड़े, काला फंगस और चूहे की बीट मिली, जबकि दूसरी यूनिट में फर्श पर रखकर खाद्य सामग्री तैयार करने, गंदे पानी और खराब स्वच्छता जैसी गंभीर कमियां सामने आईं।

Contents
VKC Nuts के स्टोरेज एरिया में पिस्ता में मिले जिंदा कीड़ेमशीनों में जंग, खराब फर्श और मक्खियों की भी समस्याVKC Nuts को मिला सिर्फ 38% अनुपालन स्कोरChheda Specialities Foods में भी मिली गंभीर लापरवाहीतेल के टैंकों के आसपास मिला फंगसChheda Specialities Foods का अनुपालन स्कोर 42%पहले भी असुरक्षित पाए गए थे कुछ सैंपलक्यों महत्वपूर्ण है FSSAI की यह कार्रवाई?लाइसेंस सस्पेंड होने का क्या मतलब है?उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबक?FSSAI की कार्रवाई से कंपनियों को कड़ा संदेश

देश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की निगरानी लगातार सख्त हो रही है। इसी कड़ी में FSSAI ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की दो खाद्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं। अधिकारियों की जांच में दोनों कंपनियों की उत्पादन और स्टोरेज यूनिट में खाद्य सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाया गया।

जिन कंपनियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें उत्तर प्रदेश की VKC Nuts Private Limited और महाराष्ट्र की Chheda Specialities Foods Pvt Ltd शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थों के आसपास गंदगी, फंगस, कीड़े और खराब स्वच्छता व्यवस्था जैसी कमियां सामने आईं। FSSAI के मुताबिक इस तरह की परिस्थितियां खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकती हैं और उपभोक्ताओं की सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।

VKC Nuts के स्टोरेज एरिया में पिस्ता में मिले जिंदा कीड़े

उत्तर प्रदेश स्थित VKC Nuts की यूनिट में FSSAI के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं। जांच टीम को स्टोर किए गए पिस्ता में जिंदा कीड़े मिले। खाद्य पदार्थ में इस तरह के कीड़ों की मौजूदगी सीधे तौर पर स्टोरेज और हाइजीन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

सिर्फ इतना ही नहीं, स्टोरेज एरिया की दीवारों और छत पर काफी मात्रा में काला फंगस भी पाया गया। खाद्य प्रसंस्करण या भंडारण वाले परिसर में फंगस की मौजूदगी खाद्य पदार्थों के दूषित होने का खतरा बढ़ा सकती है।

निरीक्षण के दौरान परिसर के कई हिस्सों में चूहे की बीट भी मिली। इससे यह संकेत मिला कि यूनिट में पेस्ट कंट्रोल और स्वच्छता व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। खाद्य पदार्थों के स्टोरेज क्षेत्र में कृंतकों की मौजूदगी विशेष रूप से गंभीर मानी जाती है, क्योंकि इनके संपर्क से खाद्य सामग्री दूषित होने का जोखिम रहता है।

मशीनों में जंग, खराब फर्श और मक्खियों की भी समस्या

FSSAI की जांच में सिर्फ खाद्य पदार्थों की स्थिति ही खराब नहीं मिली, बल्कि यूनिट की आधारभूत स्वच्छता व्यवस्था में भी कई कमियां सामने आईं।

निरीक्षण के दौरान कुछ मशीनों पर जंग दिखाई दी। वहीं फर्श की स्थिति भी खराब पाई गई। खाद्य पदार्थों के आसपास मक्खियां भी देखी गईं, जो खुले खाद्य उत्पादों के लिए दूषण का संभावित स्रोत बन सकती हैं।

जांच टीम को खुले क्रेट के पास अंजीर के नजदीक एक जिंदा छिपकली भी दिखाई दी। यह स्थिति खाद्य पदार्थों की हैंडलिंग और परिसर में पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

इसके अलावा कर्मचारियों की व्यक्तिगत सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कमियां भी सामने आईं। एक कर्मचारी पट्टी बंधे हाथ से अंजीर की छंटाई करता हुआ पाया गया। वहीं एक अन्य कर्मचारी जरूरी चश्मे के बिना ड्राई फ्रूट्स संभाल रहा था।

VKC Nuts को मिला सिर्फ 38% अनुपालन स्कोर

FSSAI की जांच में VKC Nuts की यूनिट को खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन के मामले में सिर्फ 38 प्रतिशत का स्कोर मिला।

जांच में सामने आई कमियों को देखते हुए कंपनी के लाइसेंस को आंशिक रूप से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। FSSAI की कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खाद्य पदार्थों के उत्पादन और स्टोरेज में निर्धारित सुरक्षा एवं स्वच्छता मानकों का पालन किया जाए।

किसी खाद्य कंपनी के लिए केवल उत्पादन क्षमता या उत्पाद की गुणवत्ता ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि कच्चे माल की खरीद से लेकर स्टोरेज, प्रोसेसिंग, कर्मचारियों की हाइजीन और पैकेजिंग तक पूरी प्रक्रिया में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है।

Chheda Specialities Foods में भी मिली गंभीर लापरवाही

महाराष्ट्र की Chheda Specialities Foods Pvt Ltd की यूनिट में भी FSSAI की टीम को खाद्य सुरक्षा नियमों से जुड़ी कई गंभीर कमियां मिलीं।

निरीक्षण के दौरान कर्मचारी बेसन का आटा बिना दस्ताने के हाथों से मिला रहे थे। इसके अलावा केले को ऐसे फर्श पर छीला जा रहा था, जहां उसके पास सड़ता हुआ कचरा मौजूद था।

खाद्य सामग्री को गंदे या दूषित क्षेत्र में सीधे फर्श के संपर्क में रखना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर समस्या हो सकती है। इससे खाद्य पदार्थ में बैक्टीरिया और अन्य दूषित तत्वों के पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

तेल के टैंकों के आसपास मिला फंगस

FSSAI की जांच में Chheda Specialities Foods के परिसर में खाद्य तेल के टैंकों के आसपास भी फंगस पाया गया।

प्रोसेसिंग एरिया में गंदा पानी जमा था। इसके अलावा कीड़ों को अंदर आने से रोकने के लिए लगाई गई जाली टूटी हुई मिली। ऐसी स्थिति में बाहरी कीड़े और अन्य दूषित तत्व उत्पादन क्षेत्र में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं।

जांच के दौरान परिसर में मरी हुई मक्खियां भी मिलीं। साथ ही कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

कच्चे माल को गीले और धूल भरे फर्श पर रखा हुआ पाया गया। खाद्य पदार्थों के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को साफ और सुरक्षित परिस्थितियों में स्टोर करना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Chheda Specialities Foods का अनुपालन स्कोर 42%

FSSAI की जांच में महाराष्ट्र की इस यूनिट को भी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन में काफी कम स्कोर मिला। कंपनी का कंप्लायंस स्कोर 42 प्रतिशत रहा।

जांच में सामने आई कमियों को देखते हुए कंपनी के लाइसेंस को सस्पेंड किया गया है। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना कंपनी की जिम्मेदारी है और गंभीर कमियों की स्थिति में नियामक कार्रवाई की जा सकती है।

पहले भी असुरक्षित पाए गए थे कुछ सैंपल

Chheda Specialities Foods से लिए गए कुछ खाद्य नमूनों को पहले की जांच में भी असुरक्षित या गलत लेबल वाला घोषित किया जा चुका है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी चल रही है।

इस पुराने मामले और मौजूदा निरीक्षण में सामने आई कमियों को देखते हुए कंपनी पर नियामकीय दबाव और बढ़ गया है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल उत्पाद का सैंपल पास होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादन और स्टोरेज की पूरी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन भी जरूरी होता है।

क्यों महत्वपूर्ण है FSSAI की यह कार्रवाई?

FSSAI देश में खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और गुणवत्ता के लिए प्रमुख नियामक संस्था है। बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों के लिए निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना इसका महत्वपूर्ण दायित्व है।

खाद्य पदार्थों में कीड़े, फंगस या अन्य गंदगी मिलने की स्थिति में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है। खासतौर पर लंबे समय तक खराब स्टोरेज, नमी, गंदगी या पेस्ट की मौजूदगी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

यही वजह है कि खाद्य उत्पादन इकाइयों में स्वच्छता, पेस्ट कंट्रोल, साफ पानी, सुरक्षित स्टोरेज, कर्मचारियों की व्यक्तिगत हाइजीन और मशीनरी की साफ-सफाई जैसे मानकों पर लगातार निगरानी जरूरी होती है।

लाइसेंस सस्पेंड होने का क्या मतलब है?

किसी खाद्य कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड होना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है। इसका सीधा संबंध खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन से होता है।

इस कार्रवाई के जरिए नियामक कंपनी को यह संकेत देता है कि जब तक गंभीर कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।

Chheda Specialities Foods का लाइसेंस तब तक सस्पेंड रहने की बात कही गई है, जब तक कंपनी आवश्यक सुधार लागू करके खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन साबित नहीं करती। वहीं VKC Nuts के मामले में आंशिक लाइसेंस निलंबन अगले आदेश तक जारी रहेगा।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है सबक?

FSSAI की इस कार्रवाई से उपभोक्ताओं के लिए भी यह संदेश निकलता है कि पैक्ड या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय केवल ब्रांड नाम या कीमत पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेजिंग की स्थिति, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर, FSSAI लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन की जानकारी और लेबल को देखना जरूरी है। यदि पैकेट फूला हुआ, क्षतिग्रस्त या संदिग्ध स्थिति में दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

किसी खाद्य उत्पाद में कीड़े, फंगस, बदबू या अन्य असामान्यता दिखाई देने पर उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और संबंधित शिकायत को उचित नियामकीय चैनल पर दर्ज किया जा सकता है।

FSSAI की कार्रवाई से कंपनियों को कड़ा संदेश

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की इन दो कंपनियों पर हुई कार्रवाई यह बताती है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर नियामक अब सख्त रुख अपना रहा है।

VKC Nuts में पिस्ता में जिंदा कीड़े, फंगस, चूहे की बीट, मक्खियां और अन्य स्वच्छता संबंधी कमियां मिलीं, जबकि Chheda Specialities Foods में खाद्य सामग्री की गलत तरीके से हैंडलिंग, गंदा पानी, फंगस, मरी हुई मक्खियां और खराब कचरा प्रबंधन जैसी समस्याएं सामने आईं।

दोनों कंपनियों को कम अनुपालन स्कोर मिलने के बाद लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसला खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब कंपनियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुधार करने होंगे और यह साबित करना होगा कि उनकी उत्पादन एवं स्टोरेज व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षित है।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध आधिकारिक/रिपोर्टेड जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। लाइसेंस निलंबन नियामकीय कार्रवाई है; इसे संबंधित कंपनियों के उत्पादों के हर बैच या हर उत्पाद के असुरक्षित होने के सामान्य निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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