Consumer Court Decision: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ग्राहक के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए सुनार को 32 ग्राम सोना वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही ग्राहक को मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000 और कानूनी खर्च के लिए ₹10,000 यानी कुल ₹35,000 का मुआवजा भी देना होगा। मामला पुरानी सोने की चूड़ियों को नई ज्वैलरी में बदलने के लिए सुनार को सौंपने से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर स्थित पपरोला का है। शिकायतकर्ता राज कुमार ने कपूर ज्वैलर्स के मालिकों के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि उन्होंने अपनी पुरानी सोने की चूड़ियां सुनार को नई अंगूठी बनवाने के लिए दी थीं, लेकिन लंबे समय तक इंतजार करने के बावजूद न तो उन्हें नई अंगूठी मिली और न ही उनका पुराना सोना वापस किया गया।
राज कुमार के मुताबिक, 1 सितंबर 2023 को उन्होंने कपूर ज्वैलर्स को 32 ग्राम वजन की दो पुरानी सोने की चूड़ियां दी थीं। इन चूड़ियों के सोने को पिघलाकर करीब 40 ग्राम वजन की नई अंगूठी तैयार की जानी थी। सुनार ने ग्राहक को भरोसा दिलाया था कि करीब दो महीने के भीतर नई अंगूठी तैयार कर दी जाएगी।
लेकिन तय समय गुजरने के बाद भी अंगूठी तैयार नहीं हुई।
दो महीने का इंतजार बना दो साल की परेशानी
जब दो महीने बीत गए तो राज कुमार ने ज्वैलर से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, हर बार उन्हें अलग-अलग वजह बताकर इंतजार करने के लिए कहा गया। ग्राहक का कहना था कि उन्होंने कई बार अपनी अंगूठी और पुराना सोना वापस लेने की कोशिश की, लेकिन मामला टलता रहा।
इसी बीच कपूर ज्वैलर्स के मालिक संजय कपूर का वर्ष 2024 में निधन हो गया। इसके बाद दुकान का कारोबार उनके परिवार के सदस्यों ने संभाला। इसके बावजूद राज कुमार को न तो उनकी नई अंगूठी मिली और न ही 32 ग्राम पुराना सोना वापस किया गया।
करीब दो साल तक इंतजार करने के बाद ग्राहक ने आखिरकार सितंबर 2025 में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनार ने लेन-देन से ही किया इनकार
मामले की सुनवाई के दौरान कपूर ज्वैलर्स के नए मालिकों की ओर से दावा किया गया कि राज कुमार के साथ ऐसा कोई लेन-देन हुआ ही नहीं था। उनका कहना था कि उन्हें शिकायतकर्ता से कोई सोना प्राप्त नहीं हुआ।
मामले में ओम प्रकाश की ओर से भी कहा गया कि वह इस कारोबार से जुड़े हुए नहीं हैं।
लेकिन शिकायतकर्ता ने आयोग के सामने एक अहम दस्तावेज पेश कर दिया।
रसीद ने बदल दिया पूरा मामला
राज कुमार ने 1 सितंबर 2023 की रसीद आयोग के सामने प्रस्तुत की। इस रसीद में 32 ग्राम सोना ज्वैलर के पास जमा किए जाने का रिकॉर्ड मौजूद था।
यही दस्तावेज मामले में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। आयोग ने रसीद को देखते हुए माना कि ग्राहक ने वास्तव में अपना 32 ग्राम सोना ज्वैलर को सौंपा था।
इस तरह ज्वैलर की ओर से लेन-देन से इनकार करने का दावा कमजोर पड़ गया।
आयोग ने क्या कहा?
जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि ग्राहक से सोना लेने के बाद उसे निर्धारित समय में नई ज्वैलरी उपलब्ध नहीं कराना और बाद में सोना वापस नहीं करना सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
आयोग ने यह भी माना कि मूल कारोबारी के निधन के बाद व्यवसाय संभालने वाले उत्तराधिकारी इस जिम्मेदारी से पूरी तरह बच नहीं सकते।
फैसले में आयोग ने ग्राहक के पक्ष में राहत देते हुए 32 ग्राम सोना वापस करने और आर्थिक मुआवजा देने का आदेश जारी किया।
60 दिन के अंदर लौटाना होगा 32 ग्राम सोना
कांगड़ा जिला उपभोक्ता आयोग के 3 अगस्त के आदेश के मुताबिक, संबंधित पक्षों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर राज कुमार को उनका 32 ग्राम सोना वापस करना होगा।
इसका मतलब है कि ग्राहक को लंबे समय तक अपने सोने के लिए इंतजार करने के बाद अब आयोग के आदेश के जरिए अपना मूल सोना वापस मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000
आयोग ने केवल सोना वापस करने का आदेश ही नहीं दिया, बल्कि ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी को भी गंभीरता से लिया।
फैसले के अनुसार, राज कुमार को मानसिक परेशानी के लिए ₹25,000 का मुआवजा दिया जाएगा।
इसके अलावा मुकदमे के दौरान हुए खर्च के लिए ₹10,000 अलग से देने का आदेश दिया गया है।
इस तरह ग्राहक को कुल:
- 32 ग्राम सोना वापस मिलेगा
- ₹25,000 मानसिक परेशानी का मुआवजा
- ₹10,000 कानूनी खर्च
- कुल नकद मुआवजा: ₹35,000
मिलना है।
ग्राहकों के लिए क्या है इस फैसले का मतलब?
यह मामला उन ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जो पुरानी ज्वैलरी को नई ज्वैलरी में बदलवाने के लिए सुनार के पास जमा करते हैं। अक्सर ग्राहक पुराने सोने की पूरी जानकारी या लिखित रिकॉर्ड संभालकर नहीं रखते। ऐसे में विवाद होने पर यह साबित करना मुश्किल हो सकता है कि कितना सोना किस तारीख को और किस उद्देश्य से ज्वैलर को दिया गया था।
इस मामले में रसीद ग्राहक के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत साबित हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि सोना या ज्वैलरी किसी सुनार को देते समय लिखित रसीद लेना कितना जरूरी है।
रसीद में सोने का वजन, तारीख, ज्वैलरी का विवरण और लेन-देन से संबंधित जानकारी दर्ज हो तो भविष्य में विवाद की स्थिति में ग्राहक के पास मजबूत दस्तावेजी सबूत रहता है।
पुरानी ज्वैलरी देते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप अपनी पुरानी ज्वैलरी को नई ज्वैलरी में बदलवाने जा रहे हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
सबसे पहले लिखित रसीद जरूर लें। रसीद में सोने का वजन और जमा करने की तारीख स्पष्ट रूप से लिखी होनी चाहिए।
इसके अलावा यह भी लिखवाना बेहतर है कि पुरानी ज्वैलरी को किस नए आभूषण में बदला जाना है और डिलीवरी की अनुमानित तारीख क्या होगी।
यदि सोने की शुद्धता या मेकिंग से जुड़ी कोई शर्त तय हुई है, तो उसे भी बिल या रसीद में दर्ज कराना चाहिए। केवल मौखिक वादे पर निर्भर रहने से बाद में विवाद होने पर ग्राहक के लिए परेशानी बढ़ सकती है।
बिल और रसीद संभालकर रखना जरूरी
सोने की कीमत अधिक होने के कारण ज्वैलरी से जुड़े विवाद आर्थिक रूप से काफी गंभीर हो सकते हैं। इसलिए पुरानी ज्वैलरी जमा करते समय मिलने वाली रसीद, बिल, भुगतान का रिकॉर्ड और ज्वैलर के साथ हुई बातचीत से जुड़े जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए।
अगर भुगतान ऑनलाइन किया गया है तो उसका रिकॉर्ड भी संभालकर रखें। इसी तरह WhatsApp या अन्य माध्यम से ज्वैलर के साथ हुई महत्वपूर्ण बातचीत को भी डिलीट न करें।
कांगड़ा का यह मामला दिखाता है कि एक छोटी सी रसीद भी उपभोक्ता विवाद में निर्णायक सबूत बन सकती है।
दो साल बाद ग्राहक को मिली राहत
राज कुमार ने सितंबर 2023 में अपना 32 ग्राम सोना नई अंगूठी बनवाने के लिए दिया था। लेकिन तय समय में अंगूठी नहीं मिलने के बाद उन्हें लंबे समय तक ज्वैलर से संपर्क करना पड़ा। जब उन्हें न तो नई ज्वैलरी मिली और न ही पुराना सोना वापस मिला, तब उन्होंने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
अब आयोग के आदेश के बाद उन्हें 32 ग्राम सोना वापस मिलने के साथ-साथ मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के लिए ₹35,000 भी मिलेंगे।
यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि ज्वैलरी से जुड़े लेन-देन में दस्तावेजी सबूत रखना बेहद जरूरी है और सेवा में कमी होने पर उपभोक्ता कानूनी राहत मांग सकता है।


