छोटे निवेशकों के लिए शुरू हुआ था दुनिया का पहला म्यूचुअल फंड, आज भी उसी सिद्धांत पर चलती है पूरी इंडस्ट्री
नई दिल्ली: आज म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) करोड़ों निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक बन चुका है। SIP के जरिए हर महीने छोटी रकम निवेश करने वाले लोग भी शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा उठा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस क्रांतिकारी निवेश मॉडल की शुरुआत आज नहीं, बल्कि 251 साल पहले हुई थी?
दुनिया का पहला म्यूचुअल फंड 1774 में नीदरलैंड में शुरू किया गया था। इसकी नींव व्यापारी एड्रियन वैन केटविच (Adriaan van Ketwich) ने रखी थी। उनका उद्देश्य था कि छोटे निवेशकों को भी सुरक्षित और विविध (Diversified) निवेश का अवसर मिल सके, ताकि वे सीमित पूंजी के बावजूद बेहतर रिटर्न हासिल कर सकें।
Highlights
- 1774 में नीदरलैंड में शुरू हुआ दुनिया का पहला म्यूचुअल फंड
- एड्रियन वैन केटविच ने रखा था इसकी शुरुआत का विचार
- छोटे निवेशकों के लिए जोखिम कम करने का बनाया मॉडल
- “डाइवर्सिफिकेशन” का सिद्धांत आज भी म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी ताकत
आर्थिक संकट के बीच आया नया निवेश मॉडल
18वीं सदी में यूरोप आर्थिक अनिश्चितता और सरकारी कर्ज के संकट से गुजर रहा था। निवेशक किसी एक कंपनी या सरकार में पैसा लगाने से डरते थे, क्योंकि नुकसान की संभावना काफी अधिक थी।
ऐसे समय में एड्रियन वैन केटविच ने एक नई सोच पेश की। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यदि कई लोगों का पैसा एक साथ इकट्ठा करके उसे अलग-अलग निवेश विकल्पों में लगाया जाए, तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसी विचार के आधार पर उन्होंने “Eendragt Maakt Magt” नाम से दुनिया का पहला म्यूचुअल फंड शुरू किया। डच भाषा में इसका अर्थ है—“एकता शक्ति देती है”।
छोटे निवेशकों को मिला पहली बार बड़ा मौका
उस समय अलग-अलग संपत्तियों में निवेश करना केवल बड़े व्यापारियों और अमीर निवेशकों के लिए संभव था। आम लोगों के पास इतनी पूंजी नहीं होती थी कि वे कई जगह निवेश कर सकें।
पहले म्यूचुअल फंड ने इस समस्या का समाधान निकाला। इसमें अनेक लोगों का पैसा एकत्र किया गया और फिर उसे अलग-अलग एसेट्स में निवेश किया गया। इससे निवेशकों को कम पूंजी में भी विविध निवेश (Diversification) का लाभ मिलने लगा।
यही मॉडल आगे चलकर आधुनिक म्यूचुअल फंड उद्योग की नींव बना।
किन जगहों पर लगाया जाता था निवेश?
आज की तरह उस दौर में हजारों सूचीबद्ध कंपनियां मौजूद नहीं थीं। इसलिए शुरुआती म्यूचुअल फंड मुख्य रूप से इन निवेश विकल्पों में पैसा लगाता था—
- विभिन्न यूरोपीय देशों के सरकारी बॉन्ड
- व्यापारिक संस्थाओं के डेट इंस्ट्रूमेंट्स
- मजबूत और स्थापित कारोबार
उस समय सरकारी बॉन्ड सबसे सुरक्षित निवेश माने जाते थे। इसलिए पोर्टफोलियो में उनका बड़ा हिस्सा रखा जाता था ताकि निवेशकों की पूंजी सुरक्षित रहे और स्थिर आय मिलती रहे।
कैसे काम करता था पहला म्यूचुअल फंड?
इस फंड का संचालन आज के म्यूचुअल फंड से काफी मिलता-जुलता था।
- निवेशक अपनी राशि फंड में जमा करते थे।
- बदले में उन्हें फंड में हिस्सेदारी मिलती थी।
- फंड मैनेजर उस राशि को विभिन्न निवेश साधनों में लगाता था।
- निवेश से मिलने वाला ब्याज और मुनाफा निवेशकों के हिस्से के अनुसार बांटा जाता था।
यदि किसी एक निवेश में नुकसान होता, तो दूसरे निवेश उसका प्रभाव कम कर देते थे। यही डाइवर्सिफिकेशन का सिद्धांत आज भी म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।
कितना था शुरुआती निवेश?
इतिहासकारों के अनुसार, इस फंड में निवेश के लिए निश्चित हिस्सों (Units) की व्यवस्था की गई थी, ताकि अलग-अलग निवेशक इसमें भाग ले सकें।
हालांकि उस समय की मुद्रा और आर्थिक व्यवस्था आज से पूरी तरह अलग थी। इसलिए उस निवेश राशि को आधुनिक रुपये या डॉलर में सटीक रूप से बदलकर बताना संभव नहीं है। लेकिन इतना तय है कि इसका उद्देश्य केवल बड़े निवेशकों तक सीमित रहना नहीं था, बल्कि छोटे निवेशकों को भी निवेश का अवसर देना था।
आज भी वही है म्यूचुअल फंड की सबसे बड़ी ताकत
एड्रियन वैन केटविच का यह प्रयोग आगे चलकर यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका के वित्तीय बाजारों के लिए प्रेरणा बना। समय के साथ इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और इंडेक्स फंड जैसे कई निवेश विकल्प विकसित हुए।
आज तकनीक की मदद से कोई भी व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही मिनटों में SIP शुरू कर सकता है। लेकिन म्यूचुअल फंड का मूल सिद्धांत आज भी वही है, जो 1774 में रखा गया था—कई निवेशकों का पैसा एक साथ जोड़कर उसे अलग-अलग निवेशों में लगाना, ताकि जोखिम कम हो और लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़े।
निष्कर्ष
दुनिया के पहले म्यूचुअल फंड ने निवेश को केवल अमीरों तक सीमित रखने की परंपरा को बदला और छोटे निवेशकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोले। करीब ढाई सौ साल पहले शुरू हुई यह सोच आज वैश्विक निवेश उद्योग की मजबूत नींव बन चुकी है और करोड़ों लोगों को अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में मदद कर रही है।


