केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (EMS) और सोलर इंडस्ट्री को बड़ी राहत देते हुए कई अहम कच्चे माल पर आयात शुल्क (Import Duty) खत्म कर दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद बाजार में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। डिक्सन टेक्नोलॉजीज, केन्स टेक्नोलॉजी, सिरमा एसजीएस और पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट जैसे शेयरों में 4% से 5% तक की तेजी दर्ज की गई।
सरकार का यह फैसला घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
EMS सेक्टर को मिली बड़ी राहत
सरकार ने मोबाइल फोन और उससे जुड़े कंपोनेंट्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई जरूरी पार्ट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी को शून्य (Zero) कर दिया है। यह छूट 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी।
नई व्यवस्था के तहत चार्जिंग मॉड्यूल, डिस्प्ले कंपोनेंट्स समेत छह महत्वपूर्ण पार्ट्स पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा कार, मेडिकल डिवाइस और इंडस्ट्रियल मशीनों में इस्तेमाल होने वाले डिस्प्ले बनाने के लिए जरूरी कंपोनेंट्स पर भी ड्यूटी खत्म कर दी गई है।
इस फैसले से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की लागत कम होगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मुनाफे में सुधार की संभावना बढ़ेगी।
लिथियम-आयन बैटरी निर्माण को भी मिलेगा बढ़ावा
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने लिथियम-आयन बैटरी निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी की रियायती कस्टम ड्यूटी वाली सूची का भी विस्तार किया है।
अब इस सूची में 85 प्रकार के उपकरण शामिल किए गए हैं, जिनका उपयोग बैटरी निर्माण की पूरी प्रक्रिया में किया जाता है। इनमें शामिल हैं—
- मटेरियल मिक्सिंग
- कोटिंग
- प्रेसिंग
- स्लिटिंग
- वाइंडिंग
- स्टैकिंग
- इलेक्ट्रोलाइट फिलिंग
- वेल्डिंग
- टेस्टिंग
- एजिंग
- इंस्पेक्शन
- पैकेजिंग
इससे भारत में बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल पर भी राहत
सरकार ने मोबाइल फोन के लिए वायरलेस चार्जिंग इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले छह प्रमुख कंपोनेंट्स पर भी रियायती कस्टम ड्यूटी लागू की है।
इनमें शामिल हैं—
- नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली
- ई-शील्ड
- PET लाइनर
- PC शिम
- कॉइल
- नियोडिमियम मैग्नेट
इस कदम का उद्देश्य भारत में हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है।
सोलर इक्विपमेंट और EPC कंपनियों को भी राहत
सरकार ने सोलर उपकरण और EPC कंपनियों को भी राहत देते हुए 200 kW से अधिक क्षमता वाले सोलर PV इन्वर्टर के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है।
यह फैसला देश में टेस्टिंग लैब्स की सीमित उपलब्धता को देखते हुए लिया गया है, जिससे सोलर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बनी रहे और उद्योग को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
शेयर बाजार में दिखा सकारात्मक असर
सरकार की घोषणा के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली।
तेजी दिखाने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे—
- डिक्सन टेक्नोलॉजीज
- केन्स टेक्नोलॉजी
- सिरमा SGS
- पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट
इन कंपनियों के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 4% से 5% तक की तेजी दर्ज की गई।
लंबी अवधि में क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क में कटौती और मशीनरी पर रियायती कस्टम ड्यूटी से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे उत्पादन लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा और भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में सरकार की रणनीति को मजबूती मिलेगी। साथ ही, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।


