नई दिल्ली: देश में पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) को बढ़ावा देने के बाद अब केंद्र सरकार घरेलू रसोई तक भी इस स्वच्छ ईंधन को पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ऐसी नीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत भविष्य में LPG सिलेंडर के साथ-साथ इथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल भी आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य आयातित LPG पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना और पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। यदि यह योजना सफल होती है तो इससे किसानों, उपभोक्ताओं और देश की अर्थव्यवस्था—तीनों को फायदा मिल सकता है।
क्यों लाई जा रही है इथेनॉल कुकिंग फ्यूल योजना?
भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित LPG से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश के आयात बिल और उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
इसी चुनौती को कम करने के लिए सरकार घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले इथेनॉल को कुकिंग फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाश रही है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरा (Molasses), मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है।
इथेनॉल कुकिंग फ्यूल से क्या होंगे फायदे?
यदि सरकार की यह योजना लागू होती है तो इसके कई बड़े लाभ देखने को मिल सकते हैं।
- आयातित LPG पर निर्भरता कम होगी।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- स्वच्छ और हरित ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
- गन्ना और अन्य फसलों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
- बायोफ्यूल सेक्टर में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
क्या इथेनॉल पर मिलेगी सब्सिडी?
सरकार अभी नीति के प्रारंभिक मसौदे पर काम कर रही है। शुरुआती चर्चाओं में इथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल और स्टोव को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी या प्रोत्साहन देने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक सब्सिडी की राशि, पात्रता या लागू होने की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अभी शुरुआती चरण में है योजना
इथेनॉल को घरेलू रसोई तक पहुंचाने के लिए केवल ईंधन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी तैयारियां करनी होंगी।
सरकार जिन पहलुओं पर काम कर रही है, उनमें शामिल हैं—
- इथेनॉल आधारित सुरक्षित कुकिंग स्टोव का विकास
- ईंधन वितरण नेटवर्क तैयार करना
- सुरक्षा मानकों को अंतिम रूप देना
- उपभोक्ताओं के लिए उपयोग संबंधी दिशा-निर्देश
- व्यापक तकनीकी परीक्षण और ट्रायल
इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही इस नीति को लागू किया जाएगा।
पेट्रोल में E20 ब्लेंडिंग जारी रहेगी
इस बीच सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 20% (E20) से अधिक बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
यदि भविष्य में इथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर बढ़ाने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले वैज्ञानिक अध्ययन, वाहन कंपनियों के सुझाव, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य फीडस्टॉक की मांग बढ़ सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मिलने की संभावना है। साथ ही चीनी मिलों और बायोफ्यूल उद्योग को भी उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भारत के बायोफ्यूल मिशन को नई गति प्राप्त होगी।
क्या भविष्य में LPG की जगह ले लेगा इथेनॉल?
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में इथेनॉल पूरी तरह LPG की जगह नहीं लेगा। शुरुआत में इसे वैकल्पिक कुकिंग फ्यूल के रूप में पेश किए जाने की संभावना है। यदि तकनीक सफल रहती है, लागत किफायती होती है और सुरक्षा मानक संतोषजनक रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में इसका उपयोग धीरे-धीरे बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार की इथेनॉल आधारित कुकिंग फ्यूल योजना भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इससे आयातित LPG पर निर्भरता कम करने, किसानों की आय बढ़ाने, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल यह योजना प्रारंभिक चरण में है और इसके लागू होने से पहले कई तकनीकी एवं सुरक्षा प्रक्रियाओं को पूरा किया जाना बाकी है।
FAQ
Q1. क्या LPG सिलेंडर बंद हो जाएंगे?
नहीं। फिलहाल सरकार केवल इथेनॉल को वैकल्पिक कुकिंग फ्यूल के रूप में लाने पर काम कर रही है। LPG की व्यवस्था जारी रहेगी।
Q2. इथेनॉल किससे बनाया जाता है?
मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरा (Molasses), मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से।
Q3. क्या इथेनॉल फ्यूल पर सब्सिडी मिलेगी?
सरकार इस पर विचार कर रही है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
Q4. इस योजना से सबसे अधिक लाभ किसे मिलेगा?
किसानों, बायोफ्यूल उद्योग, उपभोक्ताओं और देश की ऊर्जा सुरक्षा को दीर्घकाल में लाभ मिलने की उम्मीद है।


