India Monsoon Update: देशभर में मानसून को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। जहां एक तरफ अल-नीनो (El Nino) के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। रिपोर्ट के अनुसार, पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (Positive Indian Ocean Dipole – IOD) बनने की संभावना है, जो अल-नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है। इससे अगस्त और आने वाले महीनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना बढ़ गई है।
दक्षिण भारत में अब तक बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई थी, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पॉजिटिव IOD सक्रिय होने के बाद मानसून की रफ्तार तेज हो सकती है और वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
अल-नीनो के बीच राहत की उम्मीद क्यों बढ़ी?
भारत में मानसून का प्रदर्शन केवल अल-नीनो पर निर्भर नहीं करता। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की समुद्री परिस्थितियां मिलकर मानसून को प्रभावित करती हैं।
WMO के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार हिंद महासागर में पॉजिटिव IOD विकसित होने की संभावना है। यह स्थिति मानसूनी हवाओं को मजबूत बनाती है, जिससे देश में सामान्य या उससे बेहतर बारिश हो सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति मजबूत होती है तो अल-नीनो के कारण होने वाली वर्षा की कमी काफी हद तक संतुलित हो सकती है।
क्या है अल-नीनो? क्यों घट जाती है बारिश?
अल-नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है।
इसका भारत पर प्रमुख असर इस प्रकार देखा जाता है—
- दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है।
- कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होती है।
- तापमान बढ़ने से भीषण गर्मी पड़ती है।
- कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ जाता है।
इसी वजह से हर साल अल-नीनो की स्थिति पर मौसम वैज्ञानिकों की खास नजर रहती है।
पॉजिटिव IOD क्या होता है? कैसे करता है मदद?
इंडियन ओशन डिपोल (IOD) हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह तापमान के अंतर को दर्शाता है।
जब पश्चिमी हिंद महासागर का पानी अपेक्षाकृत अधिक गर्म और पूर्वी हिस्सा ठंडा होता है, तब पॉजिटिव IOD की स्थिति बनती है।
इसके प्रमुख फायदे हैं—
- मानसूनी हवाएं मजबूत होती हैं।
- अरब सागर से नमी की आपूर्ति बढ़ती है।
- देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
- अल-नीनो के असर को आंशिक रूप से कम किया जा सकता है।
दक्षिण भारत में 22% बारिश की कमी
1 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में लगभग 22 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
यदि पॉजिटिव IOD पूरी तरह सक्रिय होता है तो—
- दक्षिण भारत में बारिश की कमी तेजी से घट सकती है।
- किसानों को राहत मिल सकती है।
- जलाशयों में पानी का स्तर सुधर सकता है।
- खरीफ फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने ‘सुपर अल-नीनो’ को लेकर क्या कहा?
हाल ही में राज्यसभा में केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि WMO और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से ‘सुपर अल-नीनो’ नाम की कोई आधिकारिक श्रेणी नहीं बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि अल-नीनो को समुद्री सतह के तापमान में बदलाव के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा जाता है—
- कमजोर (Weak)
- मध्यम (Moderate)
- मजबूत (Strong)
- बहुत मजबूत (Very Strong)
इसलिए “सुपर अल-नीनो” शब्द वैज्ञानिक रूप से आधिकारिक वर्गीकरण का हिस्सा नहीं है।
जून में कमजोर, जुलाई में मध्यम हुआ अल-नीनो
IMD के अनुसार—
- जून 2026 में अल-नीनो कमजोर अवस्था में था।
- जुलाई 2026 में इसकी तीव्रता बढ़कर मध्यम स्तर तक पहुंच गई।
- अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई है।
हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मानसून का अंतिम असर केवल अल-नीनो नहीं बल्कि हिंद महासागर और वायुमंडलीय परिस्थितियों के संयुक्त प्रभाव पर निर्भर करेगा।
IMD लगातार जारी कर रहा है चेतावनियां
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लगातार—
- अल-नीनो और IOD की निगरानी कर रहा है।
- केंद्र और राज्य सरकारों को नियमित मौसम पूर्वानुमान भेज रहा है।
- किसानों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए प्रभाव आधारित चेतावनियां जारी कर रहा है।
- अगले सात दिनों तक के विस्तारित मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध करा रहा है।
इससे प्रशासन और किसानों को समय रहते तैयारी करने में मदद मिल रही है।
किसानों और आम लोगों के लिए क्या है अच्छी खबर?
यदि WMO का अनुमान सही साबित होता है और पॉजिटिव IOD मजबूत रूप से विकसित होता है, तो—
- अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
- दक्षिण भारत में वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।
- खरीफ फसलों की स्थिति बेहतर होगी।
- जलाशयों और भूजल स्तर में सुधार आएगा।
- अल-नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर महसूस हो सकता है।
हालांकि अंतिम स्थिति आने वाले सप्ताहों में समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों के विकास पर निर्भर करेगी।


