Risks of MTF: दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में सिर्फ चार सप्ताह के भीतर करीब ₹12,000 करोड़ की संपत्ति स्वाहा हो गई। इसकी सबसे बड़ी वजह थी मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के जरिए जरूरत से ज्यादा लेवरेज लेकर निवेश करना। अब यही घटना भारतीय निवेशकों के लिए भी बड़ा अलर्ट बन गई है, क्योंकि भारत में भी MTF का इस्तेमाल पिछले तीन वर्षों में तेजी से बढ़ा है। आखिर दक्षिण कोरिया में ऐसा क्या हुआ, भारत के लिए इसमें क्या खतरे छिपे हैं और निवेशकों को कौन-सी पांच बातें हमेशा याद रखनी चाहिए? आइए विस्तार से जानते हैं।
दक्षिण कोरिया में कैसे हुआ ₹12,000 करोड़ का नुकसान?
जुलाई 2026 में दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया। कुछ ही सप्ताह पहले तक वहां का KOSPI Index रिकॉर्ड ऊंचाई पर था। खासकर सेमीकंडक्टर सेक्टर की तेजी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया था।
इसी तेजी का फायदा उठाने के लिए लाखों निवेशकों ने मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के जरिए उधार लेकर शेयर खरीदने शुरू कर दिए। देखते ही देखते दक्षिण कोरिया की MTF लोन बुक बढ़कर 38.6 ट्रिलियन वॉन (करीब ₹2.56 लाख करोड़) पहुंच गई, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग दोगुनी थी।
सबसे बड़ी बात यह रही कि इस उधार लिए गए पैसे का बड़ा हिस्सा सिर्फ दो कंपनियों—Samsung Electronics और SK Hynix—में लगाया गया था।
लेकिन बाजार ने अचानक करवट बदली और KOSPI इंडेक्स अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 40% तक टूट गया।
मार्जिन कॉल ने बढ़ाया संकट
जैसे ही शेयरों में तेज गिरावट आई, ब्रोकरों ने निवेशकों को मार्जिन कॉल भेजना शुरू कर दिया।
करीब 12 लाख रिटेल निवेशकों को अतिरिक्त पैसा जमा करने का नोटिस मिला। इनमें से लगभग 3.2 लाख से 3.6 लाख खातों में शेयरों की जबरन बिक्री (Forced Selling) करनी पड़ी।
इस जबरन बिकवाली ने बाजार में और दबाव बनाया। शेयरों की कीमतें और गिरीं, जिससे नए निवेशकों को भी मार्जिन कॉल मिलने लगी।
महज एक महीने में खुदरा निवेशकों की करीब ₹12,000 करोड़ की संपत्ति खत्म हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान 20 से 30 वर्ष के युवा निवेशकों को हुआ, जिनकी हिस्सेदारी कुल नुकसान में करीब 62% रही।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ा चेतावनी संकेत?
भारत में भी MTF का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
- FY23 में MTF बुक लगभग ₹25,000 करोड़ थी।
- अब यह बढ़कर ₹1.44 लाख करोड़ से अधिक हो चुकी है।
- यानी केवल तीन वर्षों में लगभग 6 गुना वृद्धि।
हालांकि भारतीय बाजार नियामक SEBI पहले से ही MTF से जुड़े जोखिमों पर नजर रखे हुए है और एक्सपोजर लिमिट तथा रिस्क मैनेजमेंट को लेकर नए नियमों पर काम कर रहा है।
लेकिन केवल नियम बना देने से जोखिम खत्म नहीं होते। सही निवेश निर्णय लेना निवेशक की अपनी जिम्मेदारी होती है।
भारत में MTF निवेश से जुड़े प्रमुख खतरे
1. कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में ज्यादा लेवरेज
आज कई ब्रोकर्स लगभग 1,500 शेयरों में MTF सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
इनमें बड़ी संख्या ऐसे स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों की है जो लगातार लोअर सर्किट में फंस सकते हैं।
अगर ऐसे समय में जबरन बिक्री करनी पड़े तो खरीदार मिलना मुश्किल हो सकता है और नुकसान कई गुना बढ़ सकता है।
2. अभी असली परीक्षा बाकी है
भारत में MTF का चलन पिछले 3-4 वर्षों में तेजी से बढ़ा है।
कोविड के बाद भारतीय बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली है। इसलिए इतनी बड़ी MTF बुक ने अभी तक दक्षिण कोरिया जैसी गंभीर गिरावट का सामना नहीं किया है।
3. युवा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी
MTF का इस्तेमाल बड़ी संख्या में युवा निवेशक कर रहे हैं।
इनमें से कई निवेशकों ने केवल तेजी वाला बाजार देखा है और लंबी गिरावट के दौरान लेवरेज के जोखिम का अनुभव नहीं किया है।
MTF इस्तेमाल करने से पहले याद रखें ये 5 जरूरी सबक
1. लेवरेज कोई निवेश रणनीति नहीं है
MTF में शेयर खरीदने के लिए लिया गया पैसा वास्तव में लोन होता है।
चाहे शेयर बढ़े या गिरे, निवेशक को सालाना लगभग 10-15% तक ब्याज देना पड़ता है।
यदि निवेश पर्याप्त रिटर्न नहीं देता, तो ब्याज का बोझ मुनाफे को खत्म कर सकता है।
2. केवल दो-तीन शेयरों में पूरा दांव न लगाएं
दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी गलती यही थी कि अधिकांश निवेश केवल दो कंपनियों में केंद्रित था।
यदि आपका अधिकांश MTF निवेश भी कुछ गिने-चुने शेयरों में है तो गिरावट के समय नुकसान बहुत तेजी से बढ़ सकता है।
3. मार्जिन कॉल हमेशा सबसे खराब समय पर आती है
अच्छी कंपनियों के शेयर भी बाजार में गिर सकते हैं।
यदि उस समय आपके पास अतिरिक्त मार्जिन जमा करने के लिए नकदी नहीं होगी तो ब्रोकर शेयर बेच सकता है।
4. ज्यादा मुनाफे से पहले पूंजी बचाना जरूरी
हर शेयर बाजार में कभी न कभी 25-30% तक की गिरावट आती है।
निवेश करने से पहले खुद से पूछें—
अगर अगले महीने मेरा शेयर 30% गिर जाए तो क्या मैं बिना दूसरे निवेश बेचे इस स्थिति को संभाल सकता हूं?
यदि जवाब “नहीं” है तो संभव है कि आपका लेवरेज जरूरत से ज्यादा है।
5. उधार लेकर वही शेयर खरीदें जिस पर पूरा भरोसा हो
यदि किसी शेयर को आप अपने पैसों से लंबे समय तक रखने के लिए तैयार नहीं हैं तो उसे उधार लेकर खरीदना और भी बड़ा जोखिम है।
लेवरेज केवल आपके मजबूत निवेश विश्वास को बढ़ाना चाहिए, उसकी जगह नहीं लेना चाहिए।
MTF क्या है?
मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) ऐसी सुविधा है जिसमें ब्रोकर निवेशक को आंशिक राशि देकर बाकी पैसा उधार देता है ताकि वह अधिक मूल्य के शेयर खरीद सके।
यदि शेयर ऊपर जाते हैं तो मुनाफा बढ़ सकता है, लेकिन गिरावट आने पर नुकसान भी कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि MTF को केवल अनुभवी और जोखिम समझने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
निष्कर्ष
दक्षिण कोरिया की घटना यह साबित करती है कि बाजार में सबसे बड़ा जोखिम हमेशा गिरावट नहीं, बल्कि जरूरत से ज्यादा लेवरेज होता है। भारत में MTF का आकार तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में निवेशकों को लालच के बजाय जोखिम प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। निवेश करते समय हमेशा अपनी वित्तीय क्षमता, नकदी उपलब्धता और जोखिम उठाने की क्षमता का सही आकलन करें। बाजार में लंबे समय तक टिके रहना ही सफल निवेश की सबसे बड़ी कुंजी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। NewsJagran.in किसी भी निवेश की सलाह नहीं देता। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


